लिंकन,27 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत ए और न्यूजीलैंड ए के बीच खेला गया पहला अनाधिकारिक टेस्ट मुकाबला बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुँचने के बाद ड्रॉ पर समाप्त हो गया। भारतीय टीम जीत से महज एक विकेट दूर थी,लेकिन खराब रोशनी के कारण खेल रोकना पड़ा। इसके बाद मुकाबले को दोबारा शुरू नहीं किया जा सका और भारत ए के हाथ से लगभग तय नजर आ रही जीत निकल गई। भारतीय गेंदबाजों ने दूसरी पारी में शानदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड ए को मुश्किल में डाल दिया था,लेकिन मैच के अंतिम क्षणों में मौसम और रोशनी ने टीम की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
इस मुकाबले में भारतीय टीम का प्रदर्शन उतार-चढ़ाव से भरा रहा। पहली पारी में बल्लेबाजों के निराशाजनक प्रदर्शन के कारण टीम कम स्कोर पर सिमट गई थी। हालांकि, दूसरी पारी में भारतीय बल्लेबाजों ने जोरदार वापसी करते हुए विशाल स्कोर खड़ा किया। इसके बाद गेंदबाजों ने भी न्यूजीलैंड ए पर दबाव बनाया और उसके नौ बल्लेबाजों को पवेलियन भेज दिया। इसके बावजूद भारतीय टीम जीत दर्ज नहीं कर सकी। मुकाबले का नतीजा भले ही ड्रॉ रहा,लेकिन भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन से कई सकारात्मक संकेत मिले। वहीं,सीनियर टीम के लिए पारी की शुरुआत करने वाले बल्लेबाजों की नाकामी चिंता का विषय बनी रही।
मुकाबले की शुरुआत न्यूजीलैंड ए के टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनने के साथ हुई। कीवी टीम का यह फैसला सही साबित हुआ,क्योंकि भारतीय बल्लेबाज शुरुआत से ही संघर्ष करते नजर आए। नियमित अंतराल पर विकेट गिरने के कारण टीम बड़ा स्कोर बनाने में नाकाम रही और उसकी पहली पारी महज 113 रन पर समाप्त हो गई।
भारत ए की ओर से यश राठौड़ ने सबसे ज्यादा 44 रन बनाए। उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में टीम की पारी को संभालने की कोशिश की। देवदत्त पड्डिकल ने भी 32 रन का योगदान दिया,लेकिन अन्य बल्लेबाज बड़ी पारियां खेलने में सफल नहीं रहे। कम स्कोर पर पूरी टीम के आउट होने से न्यूजीलैंड ए को मैच में मजबूत स्थिति हासिल करने का अवसर मिल गया।
पहली पारी में भारतीय बल्लेबाजों के प्रदर्शन ने टीम की कमजोरियों को उजागर किया। खासकर सलामी बल्लेबाजों का जल्दी आउट होना टीम के लिए नुकसानदायक रहा। शुरुआती झटकों से उबरने के लिए मध्यक्रम को बड़ी साझेदारियाँ करनी थीं,लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
भारतीय टीम को कम स्कोर पर समेटने के बाद न्यूजीलैंड ए ने अपनी पहली पारी में बेहतर बल्लेबाजी की। टीम के कप्तान राइस मारिउ ने 76 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली,जबकि डिन फॉक्सक्रॉफ्ट ने 51 रन बनाकर उनका अच्छा साथ दिया। दोनों बल्लेबाजों के योगदान से न्यूजीलैंड ए की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने मजबूती से खड़ी रही।
कीवी टीम ने पहली पारी में कुल 317 रन बनाए। इस तरह उसे भारत ए के मुकाबले 204 रन की बड़ी बढ़त हासिल हुई। पहली पारी के आधार पर न्यूजीलैंड ए मुकाबले में काफी आगे दिखाई दे रही थी। भारतीय टीम के लिए अब मैच में वापसी करना आसान नहीं था। उसे दूसरी पारी में न केवल बड़ा स्कोर बनाना था,बल्कि विरोधी टीम को चौथी पारी में रोकने के लिए गेंदबाजों को भी प्रभावी प्रदर्शन करना था।
पहली पारी की नाकामी के बाद भारतीय बल्लेबाजों ने दूसरी पारी में शानदार जवाब दिया। टीम ने धैर्य और आक्रामकता का बेहतरीन मेल दिखाते हुए 516 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। इस पारी के सबसे बड़े आकर्षण देवदत्त पड्डिकल रहे,जिन्होंने लगभग दोहरा शतक पूरा कर लिया था,लेकिन दुर्भाग्यवश केवल एक रन से इस उपलब्धि से चूक गए।
तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे पड्डिकल ने 248 गेंदों का सामना करते हुए 199 रन बनाए। उनकी पारी में 24 चौके और तीन छक्के शामिल रहे। उन्होंने लंबे समय तक क्रीज पर टिककर न्यूजीलैंड ए के गेंदबाजों का सामना किया और भारतीय पारी को मजबूती प्रदान की। उनकी बल्लेबाजी ने यह भी दिखाया कि पहली पारी में कम स्कोर पर आउट होने के बाद टीम ने किस तरह अपनी रणनीति बदली।
साई सुदर्शन ने भी अच्छी बल्लेबाजी की,हालाँकि,वह शतक पूरा नहीं कर सके। उन्होंने 184 गेंदों पर 12 चौकों की मदद से 91 रन बनाए। उनके और पड्डिकल के बीच महत्वपूर्ण योगदान ने भारतीय टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
यश राठौड़ ने दूसरी पारी में 66 रन बनाए,जबकि वाशिंगटन सुंदर ने 52 रन की उपयोगी पारी खेली। इन बल्लेबाजों के योगदान से भारत ए ने मुकाबले में शानदार वापसी की और न्यूजीलैंड ए के सामने चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखने की स्थिति में पहुँच गया।
भारत ए की पहली पारी में मिली 204 रन की बढ़त को ध्यान में रखते हुए न्यूजीलैंड ए के सामने जीत के लिए 313 रन का लक्ष्य था। लक्ष्य का पीछा करने उतरी कीवी टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी। दूसरी पारी में लगातार विकेट गिरने से उसकी मुश्किलें बढ़ती चली गईं।
भारतीय गेंदबाजों ने सटीक लाइन और लेंथ के साथ गेंदबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ए के बल्लेबाजों पर दबाव बनाया। एक समय ऐसा आया,जब कीवी टीम ने 187 रन के स्कोर पर अपने नौ विकेट गंवा दिए थे। भारत ए को जीत हासिल करने के लिए केवल एक विकेट की जरूरत थी। मैच में लगभग एक घंटे का समय शेष था और भारतीय टीम जीत के बेहद करीब खड़ी थी।
लेकिन इसी दौरान खराब रोशनी के कारण खेल रोकना पड़ा। परिस्थितियाँ ऐसी नहीं थीं कि मुकाबले को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके। आखिरकार मैच दोबारा शुरू नहीं हो पाया और इसे ड्रॉ घोषित कर दिया गया। इस तरह भारतीय टीम शानदार वापसी और प्रभावशाली गेंदबाजी के बावजूद जीत दर्ज करने से चूक गई।
इस मुकाबले में भारतीय टीम के लिए एक अहम चिंता सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल और केएल राहुल का प्रदर्शन रहा। दोनों बल्लेबाज दोनों पारियों में बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। जायसवाल ने पहली पारी में 17 रन बनाए,जबकि दूसरी पारी में उनके बल्ले से केवल पाँच रन निकले। दूसरी ओर,राहुल पहली पारी में खाता भी नहीं खोल सके और दूसरी पारी में महज चार रन बनाकर आउट हो गए।
इन दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर इसलिए भी नजरें थीं,क्योंकि भारतीय सीनियर टीम के लिए न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में पारी की शुरुआत करने की जिम्मेदारी भी इन्हीं पर है। ऐसे में अनाधिकारिक टेस्ट की दोनों पारियों में उनकी नाकामी टीम प्रबंधन के लिए विचार करने का विषय हो सकती है।
टेस्ट क्रिकेट में सलामी बल्लेबाजों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्हें नई गेंद का सामना करते हुए शुरुआती विकेट बचाने और मध्यक्रम के लिए मजबूत आधार तैयार करने की जरूरत होती है। जायसवाल और राहुल जैसे अनुभवी बल्लेबाजों से टीम को बड़ी पारियों की उम्मीद रहेगी। न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी चुनौती से पहले दोनों खिलाड़ियों के लिए अपनी लय हासिल करना जरूरी होगा।
कुल मिलाकर,भारत ए के लिए यह मुकाबला मिश्रित अनुभव लेकर आया। पहली पारी में खराब बल्लेबाजी के बाद टीम ने दूसरी पारी में दमदार वापसी की और गेंदबाजों ने जीत की उम्मीद जगा दी। देवदत्त पड्डिकल की 199 रन की शानदार पारी मुकाबले की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल रही। हालाँकि,खराब रोशनी के कारण जीत से चूकना भारतीय टीम के लिए निराशाजनक रहा। अब टीम की नजर अगले मुकाबलों में इसी प्रदर्शन को दोहराने और सलामी बल्लेबाजों की समस्याओं को दूर करने पर होगी।
