नई दिल्ली,22 जुलाई (युआईटीवी)- नीट पेपर लीक मामले को लेकर संसद का मानसून सत्र लगातार हंगामे की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। बुधवार को भी लोकसभा की कार्यवाही के दौरान इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दिए। हालाँकि,केंद्र सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह नीट पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है,लेकिन इसके बावजूद विपक्ष ने अपना विरोध जारी रखा। सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा के प्रारूप, नियम और प्रक्रिया को लेकर सहमति नहीं बन सकी,जिसके चलते सदन में लगातार शोर-शराबा होता रहा और अंततः लोकसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
दोपहर बारह बजे जब लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो विपक्षी सांसदों ने नीट पेपर लीक मामले और दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों एवं विपक्षी नेताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया। विपक्षी दलों का कहना था कि परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के कारण लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है,इसलिए सरकार को इस विषय पर तत्काल जवाब देना चाहिए। साथ ही,विपक्ष ने प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को भी लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सदन में अपनी बात रखते हुए एक बार फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग दोहराई। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री की बनती है और उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस विषय पर स्थगन प्रस्ताव स्वीकार किया जाए ताकि सदन में व्यापक चर्चा हो सके। वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्ष की माँग बिल्कुल स्पष्ट है और सरकार को इस विषय पर बहस से बचने के बजाय खुलकर चर्चा करनी चाहिए।
विपक्ष की मांगों के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार नीट पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में चर्चा से पीछे नहीं हट रही है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दिनों से सरकार लगातार विपक्ष को चर्चा का प्रस्ताव दे रही है और आज भी वही रुख बरकरार है। उनके अनुसार सरकार इस विषय पर हर प्रकार की चर्चा के लिए तैयार है,लेकिन संसद की कार्यवाही निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के तहत संचालित होती है,इसलिए चर्चा का स्वरूप भी संसदीय नियमों के अनुरूप ही तय किया जाएगा।
किरेन रिजिजू ने अपने वक्तव्य में कहा कि चर्चा कब होगी,कितनी देर चलेगी और किस संसदीय नियम के तहत आयोजित की जाएगी,यह निर्णय लोकसभा अध्यक्ष की ओर से सभी दलों के फ्लोर नेताओं के साथ परामर्श के बाद लिया जाएगा। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अनुरोध किया कि वे विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक कर इस विषय पर सहमति बनाएँ और उसके बाद सरकार को आवश्यक व्यवस्था के बारे में अवगत कराएँ। उन्होंने दोहराया कि सरकार किसी भी प्रकार की सार्थक चर्चा से पीछे नहीं हटेगी।
रिजिजू ने यह भी कहा कि संसद में बहस की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है और उसी प्रक्रिया का पालन करना सभी दलों की जिम्मेदारी है। उनका कहना था कि यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के मुद्दे पर चर्चा चाहता है,तो उसे सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने देनी चाहिए,ताकि सभी सदस्य अपनी बात रख सकें। उन्होंने विपक्ष से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सरकार इस संवेदनशील विषय पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।
इस बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सदन में हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि यह मामला किसी एक राजनीतिक दल या सरकार का नहीं,बल्कि पूरे देश के छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार इस विषय को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और यहाँ प्रत्येक राजनीतिक दल को अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने सरकार और विपक्ष दोनों से आग्रह किया कि छात्रों के हित में सार्थक बहस सुनिश्चित की जाए।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सदन में लगातार व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की। उन्होंने विपक्षी सांसदों से कई बार अनुरोध किया कि वे अपनी सीटों पर लौटें और नियमों के तहत चर्चा में भाग लें। उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही संसदीय कार्य मंत्री के माध्यम से स्पष्ट कर चुकी है कि वह इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है। ऐसे में विरोध जारी रखने के बजाय बहस के माध्यम से अपनी बात रखना अधिक उचित होगा।
स्पीकर ने यह भी कहा कि संसद में किसी भी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत होती है और सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाता है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह सदन की कार्यवाही में सहयोग करे ताकि छात्रों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर सार्थक बहस हो सके। हालाँकि,विपक्षी सांसदों ने उनकी अपील पर तत्काल सहमति नहीं जताई और सदन के भीतर नारेबाजी तथा विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
हंगामा लगातार बढ़ने के कारण लोकसभा की कार्यवाही सामान्य रूप से नहीं चल सकी। विपक्षी सांसद अपनी मांगों पर अड़े रहे,जबकि सरकार चर्चा के लिए तैयार होने की बात दोहराती रही। दोनों पक्षों के बीच सहमति न बनने के कारण सदन में गतिरोध बना रहा। अंततः लोकसभा अध्यक्ष को कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
नीट पेपर लीक का मुद्दा पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बना हुआ है। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी और कथित अनियमितताओं के कारण लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को इस मामले में जवाबदेही तय करनी चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। साथ ही,केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की भी माँग की जा रही है।
दूसरी ओर केंद्र सरकार का कहना है कि वह इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है और संसद में इस पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार का तर्क है कि किसी भी बहस का स्वरूप संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप तय होना चाहिए और सभी दलों को लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करना चाहिए। सरकार यह भी मानती है कि चर्चा के माध्यम से ही सभी पक्षों के विचार सामने आएँगे और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सार्थक समाधान निकल सकेगा।
संसद में जारी इस गतिरोध ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नीट पेपर लीक का मुद्दा केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है,बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच इस विषय पर और तीखी बहस देखने को मिल सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि लोकसभा अध्यक्ष विभिन्न दलों के नेताओं के साथ बातचीत के बाद किस प्रारूप में चर्चा की अनुमति देते हैं और क्या इसके बाद सदन का गतिरोध समाप्त हो पाएगा। छात्रों के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर देशभर की निगाहें संसद की कार्यवाही और वहाँ होने वाली बहस पर बनी हुई हैं।
