नई दिल्ली,29 जनवरी (युआईटीवी)- परीक्षा पर चर्चा 2024 में छात्रों के साथ चर्चा’ करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पढ़ाई करने के साथ-साथ छात्रों को अच्छी नींद व संतुलित आहार लेना चाहिए और प्रेशर झेलने के लिए खुद को सामर्थ्यवान बनाना चाहिए। क्योंकि जीवन में दबाव बनता रहता है और इसका निराकरण हमें खुद सामर्थ्यवान बन कर करना है। प्रधानमंत्री ने ‘परीक्षा पर चर्चा’ के दौरान छात्रों को शारीरिक गतिविधि (फिजिकल एक्टिविटी) के लिए प्रेरित किया।
चर्चा के दौरान ओमान में भारतीय स्कूल की छात्रा डेन्या ने प्रधानमंत्री से पहला प्रश्न पूछा। दिल्ली के कक्षा 12 के छात्र अर्श व अन्य छात्रों ने प्रधानमंत्री से पूछा कि सामाजिक अपेक्षाएं दबाव बनाती हैं और हम कैसे इन दबाव से बाहर निकल सकते हैं। इसका जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक दबाव तो हम खुद ही बनाते हैं,जैसे-इतने बजे सुबह उठना ही उठना है, इतने प्रश्नों को हल करना ही करना है इत्यादि। धीरे-धीरे हमें आगे बढ़ना है,आज जितना किया है,उससे अधिक अगले दिन करना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि छात्रों के माता-पिता दूसरा दबाव यह कह कर उत्पन्न करते हैं कि सोते क्यों रह गए,जल्दी उठो,यह क्यों नहीं किया,वह क्यों नहीं किया,एग्जाम के बारे में पता नहीं है क्या ? अपने बच्चों की तुलना उनके दोस्तों और उनके सहपाठियों से करते हैं कि देखो वह कितना अच्छा कर रहा है। तीसरा दबाव तो बिना कारण के ही,समझ की कमी के कारण उत्पन्न हो जाता है। किसी चीज को हम बिना मतलब के ही परेशानी मान लेते हैं।
प्रधानमंत्री ने इन समस्याओं को हल करने के लिए सलाह दी कि पूरे परिवार,शिक्षकों व छात्र सबको मिलकर इसे हल करना होगा। अकेले छात्र इन समस्याओं से नहीं निपट सकते हैं। इन चीजों को दूर करने के लिए आपसी चर्चा और समन्वय की जरुरत है।
छात्रों की आपसी प्रतिस्पर्धा के कारण से जो तनाव उत्पन्न हुए हैं,उस पर कुछ छात्रों व अभिभावकों ने प्रश्न पूछे। इसका जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जीवन में प्रतिस्पर्धा का होना भी जरुरी है। बिना प्रतिस्पर्धा के जीवन बहुत ही प्रेरणाहीन व चेतनाहीन बन जाएगा। लेकिन जो भी प्रतिस्पर्धा हो खराब प्रवृत्ति का नहीं होना चाहिए ,बल्कि वह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए। कभी-कभी पारिवारिक वातावरण में दो भाइयों या दो बहनों के मध्य खराब प्रवृत्ति के तहत विकृत स्पर्धा के बीज बो दिया जाता है,जो आगे चलकर एक जहरीला वृक्ष बन जाता है।
प्रधानमंत्री ने दोस्तों के साथ प्रतिस्पर्धा पर कहा कि यदि आपका दोस्त 100 अंकों में से 90 अंक ले गया तो ऐसा नहीं केवल 10 अंक आपके लिए बचे हैं। अगर आपका दोस्त 100 अंकों के लिए परीक्षा लिखा है,तो आपने भी तो 100 अंकों के लिए परीक्षा लिखा है। आप को सकारात्मक सोच रखना है और सोचना है कि 100 अंकों में आप कितने अंक लाने में सक्षम हो सकते हैं। प्रतिभावान दोस्त तो प्रेरणा के स्रोत होते हैं। अपने मन में कभी भी खराब भाव नहीं आने देना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने माता-पिता से भी अनुरोध किया कि वे दूसरे छात्रों से अपने बच्चों की तुलना न करें।
प्रधानमंत्री से शिक्षकों ने छात्रों को प्रेरित करने से संबंधित प्रश्न पूछे। इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षकों को सिर्फ सिलेबस पर ध्यान नहीं देना है,बल्कि उन्हें अपना नाता छात्रों से जोड़ना है। शिक्षकों को छात्रों से खुलकर बात करनी चाहिए,जिससे छात्र परीक्षा के दौरान तनाव महसूस नहीं करेंगे। शिक्षक का काम नौकरी करना नहीं है, बल्कि शिक्षक का कार्य जिंदगियों को सवांरना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि परीक्षा के दिन कई छात्र पुस्तक पढ़ना छोड़ते ही नहीं है,इससे तनाव और अधिक बढ़ता है। इसलिए परीक्षा केंद्र में छात्रों को सहज भाव से जाना चाहिए। पूरे प्रश्न पत्र को गहरी सांस लेकर प्रसन्न भाव से पढ़ लेना चाहिए और निर्णय लेना चाहिए कि सबसे पहले कौन से प्रश्न का उत्तर लिखना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्रों में लिखने की आदत कम हो गई है,जो उचित नहीं है। प्रतिदिन छात्रों को लिखने का नियमित अभ्यास करना चाहिए,ताकि परीक्षा में लिखते समय कोई समस्या न आए।
