वाशिंगटन,19 मई (युआईटीवी)- अफ्रीका में एक अमेरिकी नागरिक में इबोला वायरस के खतरनाक स्ट्रेन की पुष्टि होने के बाद अमेरिका में सतर्कता बढ़ा दी गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने नए यात्रा प्रतिबंधों और आपातकालीन कदमों की घोषणा की है। हालाँकि,अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल अमेरिका के भीतर इबोला संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है,लेकिन वायरस के संभावित खतरे को देखते हुए सरकार किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहती।
व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस मामले को लेकर चर्चा हुई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या अमेरिकियों को इस नए प्रकोप को लेकर चिंता करनी चाहिए,तो उन्होंने कहा कि वह हर तरह की संभावित स्थिति को लेकर चिंतित रहते हैं। ट्रंप ने कहा, “यह अभी अफ्रीका तक सीमित है,लेकिन यह एक तरह का फैलाव है।” उनके इस बयान के बाद प्रशासन की ओर से विस्तृत जानकारी साझा की गई।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हेइडी ओवरटन को मंच पर बुलाया,जिन्होंने सरकार की प्रतिक्रिया और सुरक्षा उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। डॉ. ओवरटन ने बताया कि अमेरिका ने इस स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से अंतर-एजेंसी प्रतिक्रिया प्रणाली शुरू कर दी है। इसमें विदेश विभाग,सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन यानी सीडीसी और डिपार्टमेंट ऑफ वॉर समेत कई एजेंसियाँ मिलकर काम कर रही हैं।
डॉ. ओवरटन ने बताया कि एक अमेरिकी नागरिक में इबोला वायरस के बुंडिबुग्यो स्ट्रेन की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा, “एक अमेरिकी नागरिक में लक्षण दिखाई दिए हैं और उसका परीक्षण बुंडिबुग्यो वायरस के लिए पॉजिटिव आया है,जो इबोला का एक प्रकार है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संक्रमित व्यक्ति अभी अमेरिका में नहीं है और उसका मामला अफ्रीका में चल रहे प्रकोप से जुड़ा हुआ है।
अधिकारियों के अनुसार संक्रमित अमेरिकी नागरिक और उसके संपर्क में आए छह अन्य उच्च जोखिम वाले लोगों को उस क्षेत्र से निकालकर जर्मनी भेजा जाएगा। वहाँ उन्हें एक विशेष वायरस उपचार केंद्र में रखा जाएगा,जहाँ उनकी निगरानी और इलाज किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि यह कदम वायरस के संभावित प्रसार को रोकने के लिए उठाया गया है।
इस घटनाक्रम के बीच ट्रंप प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से कुछ अफ्रीकी देशों से आने वाले गैर-अमेरिकी नागरिकों पर यात्रा प्रतिबंध लगाने की घोषणा भी की है। नए नियमों के तहत उन लोगों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगाई जाएगी,जिन्होंने पिछले 21 दिनों के भीतर युगांडा,डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो,कांगो और दक्षिण सूडान की यात्रा की हो।
डॉ. ओवरटन ने कहा, “हमने आज ही उन गैर-नागरिकों के लिए प्रवेश प्रतिबंध लागू कर दिए हैं, जो हाल के दिनों में इस क्षेत्र में रहे हैं।” उन्होंने बताया कि यह कदम पूरी तरह एहतियात के तौर पर उठाया गया है ताकि वायरस अमेरिका तक न पहुँच सके।
अमेरिकी प्रशासन ने इन देशों में मौजूद अपने नागरिकों के लिए यात्रा चेतावनियाँ भी जारी कर दी हैं। अधिकारियों ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने और स्वास्थ्य संबंधी निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वह वायरस को अमेरिका में फैलने से रोकने के लिए बेहद गंभीर कदम उठा रही है।
डॉ. ओवरटन ने कहा, “अभी अमेरिका में इबोला का कोई मामला नहीं है और हम इसे ऐसा ही बनाए रखना चाहते हैं।” उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की और कहा कि स्वास्थ्य एजेंसियाँ लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
बुंडिबुग्यो स्ट्रेन इबोला वायरस के कई ज्ञात प्रकारों में से एक है। यह इंसानों में गंभीर हेमोरेजिक फीवर यानी रक्तस्रावी बुखार पैदा कर सकता है। इस बीमारी के लक्षणों में तेज बुखार,उल्टी,दस्त,कमजोरी और कई मामलों में अंदरूनी रक्तस्राव शामिल होता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलता है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इबोला वायरस का प्रकोप अफ्रीकी देशों में समय-समय पर सामने आता रहा है,लेकिन हर बार वैश्विक स्तर पर चिंता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि यह वायरस तेजी से फैलने और उच्च मृत्यु दर के लिए जाना जाता है। हालाँकि,आधुनिक चिकित्सा और निगरानी प्रणालियों की वजह से अब पहले की तुलना में इसके फैलाव को नियंत्रित करने की क्षमता बेहतर हुई है।
व्हाइट हाउस की यह घोषणा ऐसे समय में आई है,जब सीडीसी ने अफ्रीका में चल रहे प्रकोप और उससे बचाव के उपायों को लेकर अलग से प्रेस ब्रीफिंग की थी। अमेरिकी अधिकारियों ने संक्रमित अमेरिकी नागरिक की सटीक लोकेशन सार्वजनिक नहीं की है,लेकिन इतना जरूर कहा है कि मामला अभी भी प्रकोप वाले क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
अमेरिका में कोविड-19 महामारी के बाद स्वास्थ्य सुरक्षा और सीमा नियंत्रण को लेकर सरकार पहले से अधिक सतर्क नजर आती है। यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन ने इस मामले में शुरुआती स्तर पर ही सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यात्रा प्रतिबंध और संक्रमित लोगों को विशेष उपचार केंद्र में स्थानांतरित करने जैसे फैसले प्रशासन की सतर्क रणनीति को दर्शाते हैं।
फिलहाल अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार हालात की निगरानी कर रही हैं और अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों के साथ समन्वय बनाए हुए हैं। दुनिया भर की नजर अब इस बात पर टिकी है कि अफ्रीका में चल रहे इस प्रकोप को कितनी जल्दी नियंत्रित किया जा सकेगा और क्या यह वायरस सीमित दायरे में ही रोका जा पाएगा।
