बांद्रा ईस्ट में अतिक्रमण हटाने के दौरान हिंसा (तस्वीर क्रेडिट@PandurangDhond7)

बांद्रा ईस्ट में अतिक्रमण हटाने के दौरान हिंसा,पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच झड़प में कई जवान घायल,10 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज

मुंबई,21 मई (युआईटीवी)- मुंबई के बांद्रा ईस्ट इलाके में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई उस समय हिंसक रूप ले बैठी,जब स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच टकराव हो गया। बुधवार को गरीब नगर क्षेत्र में चलाए जा रहे अवैध निर्माण हटाने के अभियान के दौरान स्थिति अचानक बिगड़ गई और भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस झड़प में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए,जिसके बाद इलाके में भारी तनाव का माहौल बन गया। घटना के बाद पुलिस ने 10 नामजद आरोपियों सहित कई अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और मामले की जाँच शुरू कर दी गई है।

पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई मुंबई उच्च न्यायालय के आदेश और पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत की जा रही थी। बांद्रा ईस्ट रेलवे स्टेशन के पास स्थित गरीब नगर इलाके में लंबे समय से गैर-कानूनी निर्माण को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं। प्रशासन द्वारा पहले भी नोटिस जारी किए गए थे और इसके बाद बुधवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई।

इस अभियान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। मुंबई पुलिस के अलावा रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स यानी आरपीएफ,होम गार्ड और अन्य सुरक्षा कर्मियों को भी मौके पर लगाया गया था। अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन को पहले से आशंका थी कि कार्रवाई के दौरान विरोध हो सकता है,इसलिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।

जैसे ही बुलडोजर और अन्य मशीनों के जरिए अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई,वहाँ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जमा हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुरुआत में लोगों ने नारेबाजी करते हुए कार्रवाई का विरोध किया। पुलिस लगातार लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से शांति बनाए रखने और क्षेत्र खाली करने की अपील करती रही,लेकिन भीड़ धीरे-धीरे उग्र होती चली गई।

कुछ ही देर बाद हालात पूरी तरह तनावपूर्ण हो गए। पुलिस के मुताबिक भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर और अन्य वस्तुएँ फेंकना शुरू कर दिया। अचानक हुई पत्थरबाजी से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। कई पुलिसकर्मी इस हमले में घायल हो गए। इसके बाद पुलिस ने हालात को नियंत्रित करने के लिए न्यूनतम बल का प्रयोग किया और भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की।

घायल पुलिसकर्मियों को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुँचाया गया,जहाँ उनका इलाज किया गया। अधिकारियों ने बताया कि सभी घायल कर्मियों की हालत फिलहाल स्थिर है। घटना के बाद इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया,ताकि स्थिति फिर से न बिगड़े।

इस पूरे मामले में निर्मल नगर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें अवैध जमावड़ा,दंगा,सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी करने से रोकना,सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाना और पुलिसकर्मियों पर हमला करने जैसी गंभीर धाराएँ शामिल हैं।

पुलिस ने बताया कि अब तक 10 आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा अन्य अज्ञात लोगों की भी पहचान की जा रही है। जाँच एजेंसियाँ इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही हैं,ताकि पत्थरबाजी और हिंसा में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके।

मुंबई पुलिस ने घटना को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और इसके बावजूद कुछ असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। पुलिस ने स्पष्ट किया कि सरकारी काम में बाधा डालने और सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और किसी को भी हिंसा फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज,वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य तकनीकी सबूतों की मदद से सभी दोषियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गरीब नगर क्षेत्र में लंबे समय से बड़ी संख्या में परिवार रह रहे हैं और अचानक की गई कार्रवाई से लोगों में नाराजगी फैल गई। कुछ निवासियों का दावा है कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया,जबकि प्रशासन का कहना है कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था और पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके थे।

मुंबई में अतिक्रमण और अवैध निर्माण का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रहा है। शहर में रेलवे लाइन,सड़कों और सरकारी जमीनों के आसपास बड़ी संख्या में अवैध बस्तियाँ और निर्माण मौजूद हैं। समय-समय पर प्रशासन इन्हें हटाने के लिए अभियान चलाता रहा है,लेकिन कई बार इन कार्रवाइयों का स्थानीय स्तर पर विरोध भी देखने को मिलता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई जैसे महानगर में तेजी से बढ़ती आबादी और सीमित जमीन की वजह से झुग्गी और अवैध निर्माण की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं दूसरी ओर प्रशासन पर अदालतों और शहरी विकास योजनाओं के तहत कार्रवाई करने का दबाव रहता है। ऐसे में कई बार स्थिति टकराव तक पहुंच जाती है।

फिलहाल बांद्रा ईस्ट के गरीब नगर इलाके में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है,लेकिन तनाव अब भी बना हुआ है। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है और पुलिस लगातार निगरानी कर रही है। जाँच एजेंसियाँ हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करने और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जाँच में जुटी हुई हैं।

प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ आगे की कार्रवाई भी जारी रहेगी। वहीं इस घटना ने एक बार फिर मुंबई में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाइयों और उससे जुड़े सामाजिक तथा कानूनी मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।