प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@immanojjain)

पाँच देशों की यात्रा से लौटे प्रधानमंत्री मोदी,वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत का मिला बड़ा संदेश

नई दिल्ली,21 मई (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी घाना,त्रिनिदाद एंड टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया की महत्वपूर्ण विदेश यात्रा पूरी करने के बाद गुरुवार को भारत लौट आए। विदेश मंत्रालय ने इस दौरे को बेहद सफल बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की इस यात्रा ने वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को और मजबूत किया है। पाँच देशों के इस दौरे में प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल कई अहम समझौतों और रणनीतिक साझेदारियों को आगे बढ़ाया,बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव को भी स्पष्ट रूप से सामने रखा।

प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह रही कि उन्होंने विदेशी संसदों को संबोधित करने के मामले में नया रिकॉर्ड बना लिया। अब तक वह 17 विदेशी संसदों में भाषण दे चुके हैं। यह संख्या कांग्रेस पार्टी के सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों द्वारा संयुक्त रूप से विदेशी संसदों में दिए गए संबोधनों के बराबर पहुँच गई है। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री मोदी ने यह उपलब्धि लगभग एक दशक के भीतर हासिल की,जबकि कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्रियों को इस मुकाम तक पहुँचने में कई दशक लगे थे।

हाल ही में घाना,त्रिनिदाद एंड टोबैगो और नामीबिया की संसदों में दिए गए उनके संबोधनों ने इस रिकॉर्ड को पूरा किया। राजनीतिक और कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उपलब्धि केवल आँकड़ों तक सीमित नहीं है,बल्कि यह वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती स्वीकार्यता और प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय विदेश नीति का संकेत भी है।

कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्रियों की बात करें तो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सात बार विदेशी संसदों को संबोधित किया था। इंदिरा गांधी ने चार बार, जवाहरलाल नेहरू ने तीन बार, राजीव गांधी ने दो बार और पी. वी. नरसिम्हा राव ने एक बार विदेशी संसदों में भाषण दिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने अकेले ही इन सभी का संयुक्त रिकॉर्ड बराबर कर लिया है।

इस यात्रा ने भारत की विदेश नीति में आए बदलाव को भी उजागर किया। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने केवल बड़े देशों तक सीमित रहने के बजाय अफ्रीका,कैरिबियन और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ संबंध मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। घाना,त्रिनिदाद एंड टोबैगो और नामीबिया जैसे देशों में भारत की बढ़ती सक्रियता ने यह संदेश दिया कि भारत विकासशील देशों के साथ मजबूत साझेदारी बनाकर वैश्विक शक्ति संतुलन में नई भूमिका निभाना चाहता है।

यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को कई देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित भी किया। घाना ने उन्हें ‘ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना’ सम्मान से नवाजा। यह पिछले 30 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली घाना यात्रा थी,इसलिए इसे ऐतिहासिक माना गया। घाना सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी को सम्मानित करते हुए भारत और घाना के बीच मजबूत होते रिश्तों की सराहना की।

ब्राजील ने भी प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉस’ से सम्मानित किया। यह सम्मान भारत और ब्राजील के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार,ऊर्जा,कृषि और वैश्विक मंचों पर सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

त्रिनिदाद एंड टोबैगो की यात्रा भी प्रधानमंत्री मोदी के लिए बेहद खास रही। वहाँ उन्हें ‘द ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगो’ सम्मान प्रदान किया गया। वह यह सम्मान पाने वाले पहले विदेशी नेता बन गए हैं। इस सम्मान को भारत और कैरिबियाई देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिनिदाद एंड टोबैगो की संसद को भी संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय मूल के लोगों के योगदान और दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा विकासशील देशों के साथ खड़ा रहा है और आगे भी साझेदारी को मजबूत करता रहेगा। इस दौरान उन्होंने संसद में मौजूद उस ऐतिहासिक स्पीकर कुर्सी का भी उल्लेख किया,जिसे भारत ने वर्ष 1968 में उपहार के रूप में दिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे दोनों देशों की समय की कसौटी पर खरी उतरने वाली दोस्ती का प्रतीक बताया।

नामीबिया में भी प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत हुआ। वहाँ उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द मोस्ट एंशिएंट वेल्वित्चिया मिराबिलिस’ प्रदान किया गया। यह प्रधानमंत्री मोदी का 27वां अंतर्राष्ट्रीय सम्मान बन गया है। नामीबिया की संसद में जब उन्हें यह सम्मान दिया गया,तो पूरा संसद कक्ष “मोदी, मोदी” के नारों से गूँज उठा। इस दृश्य को भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जा रहा है।

नामीबिया की संसद में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने लोकतांत्रिक मूल्यों,तकनीकी सहयोग और स्वास्थ्य व डिजिटल बुनियादी ढाँचे में साझेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और अफ्रीकी देशों के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं,बल्कि साझा विकास और साझी आकांक्षाओं पर आधारित हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की विदेश नीति के उस नए दौर को दर्शाती है,जहाँ देश केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं,बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अफ्रीका और कैरिबियन देशों में भारत की बढ़ती मौजूदगी चीन और पश्चिमी देशों के प्रभाव के बीच एक संतुलन बनाने की रणनीति का हिस्सा भी मानी जा रही है।

इस यात्रा के दौरान भारत ने कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए और ऊर्जा,डिजिटल तकनीक,स्वास्थ्य,शिक्षा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए। प्रधानमंत्री मोदी के लगातार विदेशी दौरों और वैश्विक मंचों पर सक्रिय भागीदारी ने भारत की अंतर्राष्ट्रीय छवि को काफी मजबूत किया है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार विदेशी संसदों में प्रधानमंत्री मोदी के लगातार संबोधन केवल कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं हैं,बल्कि यह भारत की सॉफ्ट पावर और लोकतांत्रिक छवि को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का माध्यम भी बन चुके हैं। जिस तरह विभिन्न देशों की संसदों में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत हुआ,उसने यह संकेत दिया कि दुनिया भारत को एक भरोसेमंद और उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में देख रही है।

पाँच देशों की यह यात्रा केवल सम्मान और भाषणों तक सीमित नहीं रही,बल्कि इसने भारत की विदेश नीति,आर्थिक साझेदारी और वैश्विक प्रभाव को नई मजबूती देने का काम किया है। आने वाले समय में इन संबंधों का असर भारत की रणनीतिक और आर्थिक स्थिति पर भी देखने को मिल सकता है।