इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (तस्वीर क्रेडिट@Renardpaty)

इटली के स्कूलों में विदेशी छात्रों की 30 प्रतिशत सीमा,बुर्का-नकाब पर भी रोक को मंजूरी

रोम,25 सितंबर (युआईटीवी)- इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने स्कूलों में विदेशी छात्रों के एक वर्ग की संख्या सीमित करने और बुर्का-नकाब पर रोक लगाने से जुड़े अहम नियमों को मंजूरी दे दी है। मंत्रिपरिषद ने 24 सितंबर को स्कूलों से संबंधित डिक्री को मंजूरी दी। इसके तहत उन छात्रों की संख्या एक कक्षा में 30 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रावधान है, जिन्हें इतालवी भाषा का पर्याप्त ज्ञान नहीं है। इसके साथ ही स्कूलों में बुर्का और नकाब जैसे पूरे चेहरे को ढकने वाले परिधानों पर रोक लगाने का फैसला किया गया है। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य स्कूलों में बेहतर एकीकरण,भाषा सीखने में मदद और सभी छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।

जॉर्जिया मेलोनी ने मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद सोशल मीडिया पर कहा कि सरकार ने ऐसा स्कूल सिस्टम बनाने की दिशा में कदम उठाया है,जो एकीकरण को बढ़ावा दे, लेकिन नियमों से समझौता न करे। उन्होंने कहा कि कक्षाओं में ऐसे छात्रों की संख्या पर 30 प्रतिशत की सीमा होगी,जिन्हें इतालवी भाषा ठीक से नहीं आती। इसके साथ ही भाषा सीखने के लिए अतिरिक्त सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। उन्होंने बुर्का और नकाब पर रोक का भी उल्लेख किया और कहा कि इन उपायों का मकसद छात्रों को अलग-अलग समूहों में बाँटना नहीं,बल्कि उन्हें एक-दूसरे के साथ बेहतर तरीके से जोड़ना है।

सरकार के मुताबिक,कक्षा में ऐसे छात्रों की संख्या सीमित रखने का उद्देश्य उन परिस्थितियों को रोकना है,जहाँ भाषा की समस्या के कारण एक ही कक्षा में बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे इकट्ठा हो जाएँ जिन्हें इतालवी समझने या बोलने में कठिनाई होती है। सरकार का मानना है कि इससे अलग-थलग कक्षाएं बनने की संभावना कम होगी और छात्रों को पढ़ाई के दौरान एक-दूसरे के साथ बेहतर तरीके से घुलने-मिलने का अवसर मिलेगा। हालाँकि,यह सीमा सभी विदेशी मूल के छात्रों पर समान रूप से लागू नहीं होगी। नियमों में कुछ श्रेणियों के छात्रों को इस गणना से बाहर रखने का प्रावधान भी किया गया है,जिसमें इटली में जन्मे दूसरी पीढ़ी के छात्र और पर्याप्त अवधि तक इतालवी स्कूलों में पढ़ चुके कुछ छात्र शामिल हैं।

नए नियमों के तहत भाषा सीखने पर भी विशेष जोर दिया गया है। जिन छात्रों को इतालवी भाषा समझने में गंभीर कठिनाई है, उनके लिए अतिरिक्त और निःशुल्क भाषा कक्षाओं की व्यवस्था किए जाने का प्रावधान है। सरकार का मानना है कि केवल कक्षा में छात्रों की संख्या को नियंत्रित करना पर्याप्त नहीं होगा,बल्कि भाषा की समस्या का समाधान भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से छात्रों के साथ उनके परिवारों को भी इतालवी भाषा और स्कूल व्यवस्था से बेहतर तरीके से जोड़ने की योजना बनाई गई है।

इस डिक्री में विदेशी छात्रों के माता-पिता से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार,जिन अभिभावकों को अपने बच्चों के एकीकरण में मदद करने के लिए इतालवी भाषा सीखने की आवश्यकता होगी, उनके लिए भाषा पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जाएँगे। नियमों का पालन नहीं करने की स्थिति में आर्थिक दंड का भी प्रावधान किया गया है। सरकार का तर्क है कि बच्चों की शिक्षा और स्कूल में उनकी प्रगति में परिवार की भागीदारी महत्वपूर्ण होती है,इसलिए भाषा सीखने की प्रक्रिया में अभिभावकों की भूमिका भी जरूरी है।

स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक इस फैसले का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा है। बुर्का और नकाब ऐसे परिधान हैं जिनमें चेहरा ढका रहता है,जबकि हिजाब में आम तौर पर सिर और गर्दन ढके होते हैं और चेहरा दिखाई देता है। सरकार की घोषणा विशेष रूप से बुर्का और नकाब पर केंद्रित है। यानी प्रस्तावित नियम पूरे चेहरे को ढकने वाले परिधानों से संबंधित हैं और सामान्य रूप से सिर ढकने वाले हिजाब को इसमें शामिल नहीं किया गया है।

चेहरा ढकने वाले परिधानों को लेकर इटली में पहले से भी कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। वर्ष 1975 के एक कानून में सार्वजनिक स्थानों पर ऐसी वस्तुओं या परिधानों के इस्तेमाल को लेकर नियम हैं,जिनसे किसी व्यक्ति की पहचान छिप सकती है। हालाँकि,बुर्का या नकाब पर स्कूलों के लिए देशव्यापी स्पष्ट रोक का यह नया प्रावधान अलग से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार ने इसे स्कूलों के वातावरण,पहचान और एकीकरण से जुड़े अपने व्यापक शिक्षा सुधारों का हिस्सा बताया है।

नए नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने का भी प्रावधान है। मसौदे के अनुसार,स्कूलों में बुर्का या नकाब संबंधी प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर एक हजार यूरो तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। हालाँकि,डिक्री को स्थायी कानून का रूप देने के लिए इटली की संसद की मंजूरी आवश्यक होगी। मौजूदा व्यवस्था के तहत सरकार द्वारा जारी डिक्री को 60 दिनों के भीतर संसद से कानून के रूप में मंजूरी हासिल करनी होती है।

इटली सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है,जब देश में प्रवासन,भाषा और सामाजिक एकीकरण को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। इटली यूरोप में प्रवासियों के पहुँचने वाले प्रमुख देशों में शामिल है और बड़ी संख्या में विदेशी मूल के परिवार वहाँ रह रहे हैं। ऐसे में स्कूलों में भाषा संबंधी कठिनाइयों और छात्रों के सामाजिक एकीकरण का मुद्दा सरकार की शिक्षा नीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

सरकार ने इन उपायों को समान अवसर और बेहतर एकीकरण से जोड़ा है,लेकिन प्रस्तावित नियमों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस भी शुरू हो गई है। आलोचकों की ओर से सवाल उठाए गए हैं कि विदेशी छात्रों की संख्या पर सीमा लगाने से स्कूलों में छात्रों के बीच विभाजन की स्थिति पैदा हो सकती है। वहीं सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी समुदाय को अलग करना नहीं,बल्कि भाषा और शिक्षा से जुड़ी कठिनाइयों को कम करना है।

जॉर्जिया मेलोनी ने कहा है कि सरकार आगे भी ऐसे स्कूल सिस्टम की दिशा में काम करेगी,जिसमें कठिनाइयों का सामना कर रहे छात्रों को अतिरिक्त सहायता मिले और हर बच्चे को अपनी शिक्षा की शुरुआत समान अवसरों के साथ करने का मौका मिले। अब इस डिक्री के संसदीय अनुमोदन की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। संसद में चर्चा और मंजूरी के बाद ही इसके प्रावधान स्थायी कानून का हिस्सा बन सकेंगे।