नई दिल्ली,31 अगस्त (युआईटीवी)- एचडीएफसी बैंक में शीर्ष नेतृत्व को लेकर बदलाव की प्रक्रिया ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। बैंक के उप प्रबंध निदेशक कैजाद भरूचा को अगले प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी एमडी एवं सीईओ पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। यह संभावना मौजूदा एमडी एवं सीईओ शशिधर जगदीशन के उस फैसले के बाद और मजबूत हुई है,जिसमें उन्होंने मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का निर्णय किया है। जगदीशन का कार्यकाल अक्टूबर 2026 में समाप्त होने वाला है। इसके बाद बैंक को नए नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपने के लिए उत्तराधिकार प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक,एचडीएफसी बैंक अक्टूबर 2026 में जगदीशन का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक के समक्ष संभावित उत्तराधिकारियों के नाम भेजेगा। इस सूची में कैजाद भरूचा का नाम प्राथमिकता के साथ शामिल किए जाने की संभावना है। हालाँकि,अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है और बैंक अन्य संभावित उम्मीदवारों पर भी विचार कर सकता है। निजी क्षेत्र के बैंकों में एमडी एवं सीईओ की नियुक्ति में आरबीआई की भूमिका महत्वपूर्ण होती है,इसलिए किसी भी उम्मीदवार के नाम को अंतिम रूप देने से पहले नियामकीय प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होगा।
आरबीआई के मौजूदा नियमों के तहत निजी क्षेत्र के बैंकों को एमडी एवं सीईओ पद के लिए दो से तीन संभावित उम्मीदवारों के नाम वरीयता क्रम में केंद्रीय बैंक को भेजने होते हैं। इन नामों की समीक्षा के बाद आरबीआई अपनी मंजूरी देता है और उसके बाद ही अंतिम नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होती है। इसलिए एचडीएफसी बैंक के भीतर उत्तराधिकार को लेकर चर्चा भले ही शुरू हो गई हो,लेकिन नए प्रमुख के नाम पर अंतिम फैसला नियामकीय मंजूरी के बाद ही होगा।
कैजाद भरूचा एचडीएफसी बैंक के सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल हैं। वह जून 2014 से बैंक के निदेशक मंडल का हिस्सा हैं और वर्तमान में उप प्रबंध निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। बैंक के संचालन,जोखिम प्रबंधन और व्यावसायिक रणनीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उनकी भूमिका रही है। बैंक के कामकाज और आंतरिक प्रक्रियाओं की उनकी लंबी समझ को देखते हुए उन्हें मौजूदा नेतृत्व के बाद स्वाभाविक उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है।
भरूचा की उम्मीदवारी के पक्ष में सबसे महत्वपूर्ण बात उनका लंबा अनुभव और बैंक के संचालन से गहरी परिचितता है। एचडीएफसी बैंक पिछले कई वर्षों में देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक के रूप में उभरा है और इसके कारोबार का आकार लगातार बढ़ा है। ऐसे में नए प्रमुख के सामने केवल रोजमर्रा के बैंकिंग संचालन की जिम्मेदारी नहीं होगी, बल्कि बड़े स्तर पर रणनीतिक फैसले लेने,जोखिमों का प्रबंधन करने और बैंक की विकास गति बनाए रखने की चुनौती भी होगी।
हालाँकि,भरूचा की संभावित नियुक्ति के सामने एक नियामकीय पेच भी है। नियमों के अनुसार किसी पूर्णकालिक निदेशक की लगातार सेवा अवधि 15 वर्षों तक सीमित होती है। भरूचा जून 2014 में बैंक के बोर्ड में शामिल हुए थे। इस लिहाज से उनकी 15 वर्ष की सीमा जून 2029 में पूरी हो जाएगी। यदि वह अक्टूबर 2026 में एमडी एवं सीईओ का पद सँभालते हैं,तो सामान्य स्थिति में उनका संभावित कार्यकाल तीन वर्ष से भी कम रह सकता है।
यह अवधि बैंक के लिए महत्वपूर्ण है,क्योंकि किसी बड़े निजी बैंक के सीईओ के कार्यकाल को आमतौर पर दीर्घकालिक रणनीति लागू करने के लिहाज से देखा जाता है। एचडीएफसी बैंक के मामले में नेतृत्व की निरंतरता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बैंक एचडीएफसी लिमिटेड के साथ हुए ऐतिहासिक विलय के बाद अपने विस्तारित कारोबार को एकीकृत और मजबूत करने के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में नए सीईओ के सामने कारोबार के अलग-अलग हिस्सों के समन्वय,विकास और दक्षता बढ़ाने की चुनौती होगी।
रिपोर्ट के अनुसार,अगर आरबीआई विशेष अनुमति देता है तो भरूचा के संभावित कार्यकाल को आगे बढ़ाया जा सकता है। हालाँकि,फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक संकेत सामने नहीं आया है। यही वजह है कि भरूचा की उम्मीदवारी मजबूत होने के बावजूद बैंक को उत्तराधिकार प्रक्रिया में नियामकीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ना होगा।
एचडीएफसी बैंक केवल भरूचा के नाम पर निर्भर नहीं रहेगा। आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार,बैंक की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति को मौजूदा प्रमुख का कार्यकाल समाप्त होने से कम से कम छह महीने पहले उत्तराधिकार प्रक्रिया शुरू करनी होती है। इस प्रक्रिया में बैंक को आंतरिक और बाहरी दोनों तरह के उम्मीदवारों पर विचार करना होता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शीर्ष नेतृत्व के लिए बैंक के पास योग्य और उपयुक्त विकल्प मौजूद हों।
ऐसे में आने वाले महीनों में एचडीएफसी बैंक के भीतर संभावित उम्मीदवारों को लेकर विचार-विमर्श तेज होने की संभावना है। बैंक के लिए यह प्रक्रिया केवल किसी एक व्यक्ति को चुनने तक सीमित नहीं होगी,बल्कि नए नेतृत्व की क्षमताओं,अनुभव, रणनीतिक दृष्टिकोण और नियामकीय आवश्यकताओं का व्यापक मूल्यांकन भी किया जाएगा।
एचडीएफसी बैंक के नेतृत्व में यह बदलाव उस समय होने जा रहा है,जब बैंक अपने इतिहास के एक महत्वपूर्ण चरण में है। वर्ष 2023 में एचडीएफसी लिमिटेड का एचडीएफसी बैंक में विलय हुआ था। इस विलय के बाद बैंक का कारोबार और ग्राहक आधार काफी विस्तृत हुआ। अब बैंक को इस विशाल संगठन को एकीकृत करते हुए विकास,लागत नियंत्रण,जोखिम प्रबंधन और डिजिटल बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखना है।
नए सीईओ के लिए यह चुनौती इसलिए भी महत्वपूर्ण होगी क्योंकि बैंकिंग क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। डिजिटल भुगतान,कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सेवाएँ,साइबर सुरक्षा,ग्राहक अनुभव और तकनीकी निवेश जैसे विषय बैंकिंग रणनीति के केंद्र में आ चुके हैं। इसके अलावा ब्याज दरों,ऋण की माँग,जमा वृद्धि और परिसंपत्ति गुणवत्ता जैसे पारंपरिक बैंकिंग संकेतक भी शीर्ष प्रबंधन के लिए लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
शशिधर जगदीशन ने वर्ष 2020 में लंबे समय तक एचडीएफसी बैंक का नेतृत्व करने वाले आदित्य पुरी के सेवानिवृत्त होने के बाद बैंक की कमान सँभाली थी। उस समय भी उत्तराधिकार की प्रक्रिया में जगदीशन सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल थे और अंततः उन्हें एमडी एवं सीईओ नियुक्त किया गया था। अब उनके कार्यकाल के समाप्त होने के साथ बैंक एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया से गुजर रहा है।
जगदीशन के कार्यकाल के दौरान एचडीएफसी बैंक ने विलय के बाद एक नए आकार और संरचना के साथ काम करना शुरू किया। ऐसे में उनके उत्तराधिकारी के लिए बैंक की मौजूदा रणनीति को आगे बढ़ाने के साथ-साथ भविष्य की प्राथमिकताओं को तय करना भी अहम होगा। निवेशकों और बाजार की नजर इस बात पर होगी कि नया नेतृत्व बैंक की विकास क्षमता और वित्तीय प्रदर्शन को किस दिशा में ले जाता है।
कैजाद भरूचा की संभावित उम्मीदवारी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह बैंक की कार्यप्रणाली से लंबे समय से जुड़े हुए हैं। अंदरूनी नेतृत्व से आने वाले किसी उम्मीदवार को बैंक की संस्कृति,परिचालन व्यवस्था और मौजूदा रणनीति की बेहतर समझ होने का फायदा मिल सकता है। दूसरी ओर,यदि बैंक बाहरी उम्मीदवारों पर विचार करता है,तो उसके सामने नई रणनीतिक सोच और अलग अनुभव को संगठन में शामिल करने का विकल्प भी होगा।
फिलहाल कैजाद भरूचा को सबसे मजबूत संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है,लेकिन उनकी नियुक्ति को अंतिम मानना जल्दबाजी होगी। बैंक को पहले अपनी आंतरिक उत्तराधिकार प्रक्रिया पूरी करनी होगी,संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार करनी होगी और उसे आरबीआई के पास भेजना होगा। इसके बाद केंद्रीय बैंक की मंजूरी के आधार पर अंतिम फैसला होगा।
एचडीएफसी बैंक के लिए अगला नेतृत्व केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं होगा। यह फैसला उस समय लिया जा रहा है,जब बैंक विलय के बाद अपने कारोबार को नए स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहा है और भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नए एमडी एवं सीईओ की रणनीति बैंक के विकास,जोखिम प्रबंधन,तकनीकी बदलाव और निवेशकों के भरोसे पर लंबे समय तक असर डाल सकती है। आने वाले महीनों में उत्तराधिकार प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि बैंक कैजाद भरूचा को प्राथमिकता देता है या किसी अन्य आंतरिक अथवा बाहरी उम्मीदवार को नेतृत्व सौंपने का फैसला करता है।
