टोक्यो,25 अप्रैल (युआईटीवी)- जापान के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित इवाते प्रीफेक्चर इन दिनों भीषण जंगल की आग की चपेट में है,जिस पर काबू पाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,शुक्रवार सुबह तक इस आग ने करीब 1,200 हेक्टेयर क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई रिहायशी इलाकों तक इसकी लपटें पहुँच चुकी हैं और दर्जनों इमारतों को नुकसान हुआ है।
जानकारी के मुताबिक,यह आग ओत्सुची टाउन के पहाड़ी इलाके में बुधवार को शुरू हुई थी और देखते ही देखते तेजी से फैल गई। अब तक इस आग ने कम से कम आठ इमारतों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है,जिनमें कई रिहायशी मकान भी शामिल हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने लगभग 2,600 लोगों को अपने घर खाली करने के निर्देश दिए हैं,जो शहर की कुल आबादी का करीब एक चौथाई हिस्सा है।
आग पर काबू पाने के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर पर बचाव और राहत कार्य शुरू किया है। इवाते प्रीफेक्चरल सरकार के साथ-साथ जापान की सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज को भी इस अभियान में लगाया गया है। हेलीकॉप्टरों के जरिए जंगलों में पानी गिराकर आग बुझाने की कोशिश की जा रही है,जबकि जमीन पर अग्निशमन दल लगातार सक्रिय हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अन्य प्रांतों जैसे होक्काइडो,यामागाटा,फुकुशिमा,तोचिगी और निगाटा से भी अतिरिक्त मदद मँगाई गई है।
इस आपदा को और जटिल बनाने वाली बात यह है कि हाल ही में इस क्षेत्र में एक बड़ा भूकंप भी आया था। सोमवार को उत्तर-पूर्वी जापान में 7.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया,जिसके बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने इवाते समेत सात क्षेत्रों की 182 नगरपालिकाओं के लिए एक सप्ताह का विशेष अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि आग बुझाने के दौरान संभावित भूकंपीय गतिविधियों से भी सतर्क रहना होगा,जिससे राहत कार्य और चुनौतीपूर्ण हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जापान में इस समय का मौसम भी आग के तेजी से फैलने की एक बड़ी वजह है। सर्दियों के अंत और वसंत की शुरुआत में यहाँ का मौसम काफी शुष्क हो जाता है। इस दौरान पेड़-पौधों में नमी की मात्रा बेहद कम हो जाती है,जिससे वे जल्दी आग पकड़ लेते हैं। शुष्क हवा और तेज हवाएँ आग को तेजी से फैलाने में मदद करती हैं,जिससे नियंत्रण पाना मुश्किल हो जाता है।
जापान की भौगोलिक स्थिति भी इस समस्या को बढ़ाती है। देश का एक बड़ा हिस्सा घने जंगलों से ढका हुआ है,जिनमें देवदार और चीड़ जैसे शंकुधारी पेड़ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। इन पेड़ों में रेजिन नामक पदार्थ होता है,जो अत्यधिक ज्वलनशील होता है। यही कारण है कि एक बार आग लगने के बाद यह बहुत तेजी से फैलती है और लंबे समय तक जलती रहती है।
घने जंगलों की वजह से आग पर काबू पाने में भी कठिनाई आती है। जब आग पेड़ों के ऊपरी हिस्सों तक पहुँच जाती है,तो यह एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक तेजी से फैलती है और बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लेती है। यही स्थिति इवाते में भी देखने को मिल रही है,जहाँ आग लगातार फैल रही है और बुझाने के प्रयासों को चुनौती दे रही है।
हालाँकि,प्राकृतिक कारणों के अलावा मानवीय लापरवाही भी जंगल की आग का एक बड़ा कारण मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार,बिना निगरानी के छोड़ा गया कैंपफायर,खेतों में जलाया गया कचरा,फेंकी गई सिगरेट या मशीनों से निकली चिंगारी भी आग लगने का कारण बन सकती है। जापान में बड़ी आबादी जंगलों के पास रहती है,जिससे इंसानी गतिविधियों और प्राकृतिक संसाधनों के बीच सीधा संपर्क बना रहता है और आग लगने का खतरा बढ़ जाता है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है। राहत शिविरों में विस्थापित लोगों के लिए भोजन,पानी और चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही,आग पर काबू पाने के लिए हर संभव प्रयास जारी हैं।
इवाते में लगी यह भीषण आग जापान के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। प्राकृतिक परिस्थितियाँ,भौगोलिक स्थिति और हालिया भूकंप ने इस संकट को और गंभीर बना दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन कब तक इस आग पर पूरी तरह काबू पा पाता है और प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल हो पाती है या नहीं।
