प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज (तस्वीर क्रेडिट@narendramodi)

जुलाई में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जा सकते हैं पीएम मोदी,इंडोनेशिया और न्यूजीलैंड भी होंगे कार्यक्रम का हिस्सा

कैनबरा,25 अप्रैल (युआईटीवी)- भारत की कूटनीतिक सक्रियता को नई गति देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जुलाई महीने में एक व्यापक अंतर्राष्ट्रीय दौरे पर जा सकते हैं। इस संभावित यात्रा में इंडोनेशिया,न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,यह दौरा क्षेत्रीय सहयोग,रणनीतिक साझेदारी और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री सबसे पहले इंडोनेशिया का दौरा करेंगे,जहाँ वह क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं। इसके बाद 7 और 8 जुलाई को उनका न्यूजीलैंड दौरा प्रस्तावित है। इस चरण में द्विपक्षीय संबंधों,व्यापारिक सहयोग और प्रवासी भारतीयों के साथ संवाद पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है। इसके बाद प्रधानमंत्री 9 और 10 जुलाई को ऑस्ट्रेलिया पहुँच सकते हैं,जहाँ उनके कई उच्चस्तरीय कार्यक्रम निर्धारित किए जाने की तैयारी चल रही है।

ऑस्ट्रेलिया में प्रधानमंत्री मोदी के दौरे को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। यह दौरा ऐसे समय में प्रस्तावित है,जब भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक,आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री के सिडनी और मेलबर्न दोनों शहरों में कार्यक्रम होने की संभावना है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ का कार्यालय सिडनी में आधिकारिक कार्यक्रम आयोजित करने के पक्ष में बताया जा रहा है,ताकि दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती दी जा सके।

वहीं,भारतीय समुदाय को संबोधित करने के लिए एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम की योजना मेलबर्न में बनाई जा रही है। यह कार्यक्रम न केवल प्रवासी भारतीयों के साथ जुड़ाव को मजबूत करेगा,बल्कि दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को भी नई ऊर्जा देगा। जानकारी के मुताबिक,इस आयोजन के लिए मेलबर्न के दो बड़े इनडोर स्थलों का निरीक्षण किया गया है,जिनकी क्षमता क्रमशः लगभग 14,000 और 35,000 से अधिक लोगों की है। जुलाई में मेलबर्न के ठंडे मौसम को देखते हुए इन स्थलों को उपयुक्त माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री के इस संभावित दौरे को लेकर ऑस्ट्रेलिया के कारोबारी और सामुदायिक संगठनों में भी उत्साह है। ऑस्ट्रेलिया-भारत व्यापार परिषद,जो इस वर्ष अपनी 40वीं वर्षगांठ मना रही है,प्रधानमंत्री के साथ एक विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया-भारत सीईओ फोरम भी एक उच्चस्तरीय बैठक की मेजबानी के लिए प्रयासरत है। हालाँकि,सूत्रों के अनुसार इन दोनों संगठनों में से किसी एक को ही आधिकारिक कार्यक्रम की मेजबानी का अवसर मिल सकता है और इसको लेकर बातचीत जारी है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले वह मई 2023 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर का दौरा कर चुके हैं। उस समय उन्होंने ‘क्वाड लीडर्स समिट’ में हिस्सा लिया था और वहाँ प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की थी। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी थी,जिनमें माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप अरेंजमेंट और ग्रीन हाइड्रोजन टास्कफोर्स के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस शामिल थे।

इसके अलावा उस यात्रा के दौरान ब्रिस्बेन में भारतीय वाणिज्य दूतावास खोलने और बेंगलुरु में ऑस्ट्रेलियाई वाणिज्य दूतावास शुरू करने की घोषणा भी की गई थी। इन कदमों ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत किया है। अब प्रस्तावित जुलाई दौरा इन संबंधों को और नई दिशा देने का अवसर प्रदान कर सकता है।

ऑस्ट्रेलिया के मीडिया और विश्लेषकों ने भी इस संभावित यात्रा को महत्वपूर्ण बताया है। ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन के विदेश मामलों के पत्रकार स्टीफन ज़ीज़िक के अनुसार,यदि यह दौरा तय होता है,तो यह ऑस्ट्रेलिया आने वाले वैश्विक नेताओं की एक मजबूत श्रृंखला का हिस्सा होगा। इससे ऑस्ट्रेलिया की अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में भूमिका भी और मजबूत होगी।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में सहयोग के कई नए आयाम सामने आए हैं। रक्षा,व्यापार,शिक्षा,ऊर्जा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का यह प्रस्तावित दौरा इन प्रयासों को और गति दे सकता है।

न्यूजीलैंड और इंडोनेशिया के साथ भी भारत के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। इंडोनेशिया के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक सहयोग महत्वपूर्ण है,जबकि न्यूजीलैंड के साथ हाल ही में प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा दे सकता है। इस लिहाज से यह पूरा दौरा भारत की व्यापक विदेश नीति और रणनीतिक दृष्टिकोण का हिस्सा माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी का प्रस्तावित जुलाई दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं है,बल्कि यह भारत की वैश्विक भूमिका को और सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस दौरे के जरिए भारत अपने प्रमुख साझेदार देशों के साथ संबंधों को और गहरा कर सकता है और क्षेत्रीय तथा वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति को और मजबूत बना सकता है। आने वाले दिनों में इस यात्रा के आधिकारिक कार्यक्रम और एजेंडे को लेकर और अधिक जानकारी सामने आने की संभावना है,जिस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।