घाना में एस जयशंकर की अहम बैठक, भारत-घाना साझेदारी को नई गति देने पर बनी सहमति (तस्वीर क्रेडिट@DrSJaishankar)

घाना में एस जयशंकर की अहम बैठक, भारत-घाना साझेदारी को नई गति देने पर बनी सहमति

अकरा,7 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने घाना की राजधानी अकरा में अपने समकक्ष सैमुअल ओकुडजेटो अबलाकवा के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। दोनों नेताओं के बीच भारत और घाना के बीच व्यापक साझेदारी को और मजबूत करने तथा द्विपक्षीय संबंधों के नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में व्यापार, निवेश, विकास सहायता, फार्मास्यूटिकल्स, क्षमता निर्माण, रक्षा, प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच संपर्क जैसे मुद्दे प्रमुखता से शामिल रहे। दोनों देशों ने वैश्विक दक्षिण के साझेदारों के रूप में साझा विकास लक्ष्यों और ऐतिहासिक संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई।

घाना पहुँचने के बाद एस जयशंकर ने सैमुअल ओकुडजेटो अबलाकवा से मुलाकात की। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों को व्यापक स्तर पर आगे ले जाने की काफी संभावनाएँ हैं। उन्होंने वैश्विक दक्षिण के साझेदारों के तौर पर भारत और घाना की साझा आकांक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक एकजुटता और विकास को लेकर समान सोच है। इसी आधार पर दोनों पक्षों ने मौजूदा सहयोग को और व्यापक बनाने के तरीकों पर बातचीत की।

बैठक में व्यापार और निवेश को द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बनाने पर जोर दिया गया। दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ विकास सहयोग को नए क्षेत्रों तक ले जाने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। भारत और घाना के बीच फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को विशेष महत्व दिया गया। स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत की क्षमताओं और घाना की जरूरतों को देखते हुए इस क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाने की संभावनाएं दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

क्षमता निर्माण भी बातचीत का एक प्रमुख विषय रहा। भारत लंबे समय से विभिन्न विकासशील देशों के साथ प्रशिक्षण, कौशल विकास और संस्थागत क्षमता बढ़ाने के क्षेत्र में सहयोग करता रहा है। घाना के साथ भी इस सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसके अलावा रक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने के रास्तों पर विचार किया गया। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में तकनीकी सहयोग और कौशल आधारित साझेदारी दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा दे सकती है।

एस जयशंकर ने बैठक के बाद कहा कि भारत और घाना ने बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को आगे बढ़ाने के मुद्दे पर भी बातचीत की। दोनों देशों ने अफ्रीकी संघ और पश्चिमी अफ्रीकी राज्यों के आर्थिक समुदाय के साथ भारत के जुड़ाव को और गहरा करने की संभावनाओं पर चर्चा की। भारत अफ्रीकी देशों के साथ अपने संबंधों को केवल द्विपक्षीय स्तर तक सीमित रखने के बजाय व्यापक क्षेत्रीय और बहुपक्षीय सहयोग के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर देता रहा है। ऐसे में घाना के साथ बातचीत का यह पहलू भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एस जयशंकर मंगलवार को घाना पहुँचे थे। अकरा पहुँचने के बाद उन्होंने घाना की ओर से किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया और दोनों देशों की व्यापक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए सार्थक बातचीत की उम्मीद जताई थी। उनकी यात्रा को भारत और घाना के बीच राजनीतिक, आर्थिक और विकासात्मक संबंधों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

इस यात्रा से पहले घाना के विदेश मंत्रालय ने भी कहा था कि एस जयशंकर की यात्रा दोनों देशों को एकजुटता और साझा मूल्यों पर आधारित अपने संबंधों को और मजबूत करने का अवसर देगी। घाना के विदेश मंत्री सैमुअल ओकुडजेटो अबलाकवा के निमंत्रण पर एस जयशंकर 6 और 7 अक्टूबर को घाना की आधिकारिक यात्रा पर हैं। घाना ने इस यात्रा को दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को और मजबूत करने के अवसर के रूप में रेखांकित किया है।

घाना की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, यात्रा के दौरान फार्मास्यूटिकल विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह पहल राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा की ‘अकरा रीसेट’ नीति से भी जुड़ी हुई है। इसके अलावा कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण और मूल्य संवर्धन के जरिए सहयोग बढ़ाने पर भी बातचीत की जा रही है। घाना कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग तथा मूल्य संवर्धन को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। ऐसे में भारत के अनुभव और तकनीकी क्षमताएं इस साझेदारी में उपयोगी भूमिका निभा सकती हैं।

दोनों देशों के बीच औद्योगीकरण और रोजगार सृजन से जुड़े मुद्दे भी यात्रा के महत्वपूर्ण एजेंडे में शामिल हैं। घाना अपनी औद्योगिक क्षमता बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में भारत के औद्योगिक अनुभव,कौशल विकास और तकनीकी सहयोग के जरिए दोनों देशों के बीच नए अवसर तलाशे जा सकते हैं। इसके साथ ही छात्रवृत्ति और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने पर भी चर्चा होने की संभावना है। शिक्षा और तकनीक को भारत-अफ्रीका संबंधों के महत्वपूर्ण स्तंभों में माना जाता है।

घाना के बाद एस जयशंकर अपनी पाँच दिन की आधिकारिक यात्रा के दौरान कोटे डी आइवर और इथियोपिया भी जाएँगे। इस पूरी यात्रा का उद्देश्य इन तीन अफ्रीकी देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना है। यात्रा के दौरान आर्थिक सहयोग, विकास साझेदारी, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, तकनीक और बहुपक्षीय मुद्दों पर भारत की अफ्रीकी साझेदारों के साथ बातचीत को आगे बढ़ाया जाएगा।

भारत और अफ्रीकी देशों के बीच संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में लगातार विस्तार देखने को मिला है। वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के प्रयासों के बीच अफ्रीका भारत की विदेश नीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। घाना के साथ हुई ताजा बातचीत इसी व्यापक साझेदारी का हिस्सा है। अकरा में एस जयशंकर और सैमुअल ओकुडजेटो अबलाकवा की बैठक से संकेत मिलता है कि दोनों देश पारंपरिक संबंधों को बनाए रखते हुए व्यापार, स्वास्थ्य, कृषि, तकनीक, रक्षा और मानव संसाधन विकास जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग को और व्यापक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।