प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला दा सिल्वा (तस्वीर क्रेडिट@ransinghBJP)

भारत-ब्राजील के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई रफ्तार, 2030 तक 30 अरब डॉलर का लक्ष्य तय

नई दिल्ली,31 अगस्त (युआईटीवी)- भारत और ब्राजील ने अपने आर्थिक एवं व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 30 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। दोनों देशों ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यापार के मौजूदा ढाँचे को अधिक विविध, संतुलित और टिकाऊ बनाने पर जोर दिया है। इसके तहत दवा,रसायन,इंजीनियरिंग उत्पाद,मशीनरी और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने तथा दोनों देशों के उद्योगों के बीच सीधा संपर्क मजबूत करने पर सहमति बनी है। यह लक्ष्य ऐसे समय में सामने आया है,जब भारत और ब्राजील के बीच व्यापार लगातार विस्तार कर रहा है और दोनों देश वैश्विक स्तर पर भी आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं।

ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में सोमवार को भारत-ब्राजील व्यापार निगरानी तंत्र की आठवीं बैठक आयोजित की गई। इसी बैठक के दौरान दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 30 अरब डॉलर तक पहुँचाने की महत्वाकांक्षी योजना पर चर्चा की। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और ब्राजील के विकास, उद्योग, वाणिज्य एवं सेवाएँ मंत्रालय की विदेश व्यापार सचिव तातियाना लासेर्दा प्राजेरेस ने की। बैठक में व्यापारिक संबंधों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करने के साथ-साथ आने वाले वर्षों में सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान की गई।

बैठक के दौरान भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने ब्राजील के विकास, उद्योग, वाणिज्य एवं सेवाएँ मंत्री मार्सियो एलियास रोसा से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच हुई चर्चा में व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग बढ़ाने के उपायों पर विचार किया गया। दोनों देशों की ओर से इस बात पर जोर दिया गया कि द्विपक्षीय व्यापार को केवल कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रखने के बजाय इसका विस्तार व्यापक औद्योगिक और रणनीतिक क्षेत्रों में किया जाना चाहिए।

आधिकारिक बयान के अनुसार,भारत और ब्राजील के बीच द्विपक्षीय व्यापार पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 15.07 अरब डॉलर तक पहुँच गया। यह आँकड़ा दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ते कारोबारी जुड़ाव को दर्शाता है। हालाँकि, 2030 तक 30 अरब डॉलर का लक्ष्य मौजूदा व्यापार के लगभग दोगुने स्तर तक पहुँचने की माँग करता है। इसके लिए दोनों देशों को व्यापार की मात्रा बढ़ाने के साथ-साथ उत्पादों और सेवाओं की श्रेणियों का भी विस्तार करना होगा।

भारत और ब्राजील ने इस दिशा में दवा क्षेत्र को महत्वपूर्ण प्राथमिकता के रूप में चिन्हित किया है। भारत दुनिया के प्रमुख दवा उत्पादकों में शामिल है और उसकी फार्मास्युटिकल कंपनियों की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मजबूत मौजूदगी है। वहीं ब्राजील लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े बाजारों में से एक है। ऐसे में भारत ने ब्राजील से भारतीय दवा कंपनियों के लिए अधिक पूर्वानुमेय नियामकीय व्यवस्था और बेहतर बाजार पहुँच सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। भारतीय पक्ष का मानना है कि नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल और अधिक स्पष्ट बनाने से भारतीय कंपनियों के लिए ब्राजील में कारोबार का विस्तार करना आसान होगा।

दवा क्षेत्र के अलावा रसायन, इंजीनियरिंग उत्पाद और मशीनरी को भी व्यापार विस्तार के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है। दोनों देशों के बीच औद्योगिक सहयोग बढ़ने से कंपनियों के लिए नए बाजार खुल सकते हैं और आपूर्ति श्रृंखलाओं में भी विविधता आ सकती है। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत और ब्राजील जैसे बड़े विकासशील देशों के बीच औद्योगिक सहयोग को रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कृषि क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर पर बातचीत आगे बढ़ी है। विशेष रूप से कृषि उत्पादों के व्यापार में स्वास्थ्य और पादप स्वच्छता मानकों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इन मानकों का संबंध खाद्य और कृषि उत्पादों की सुरक्षा तथा आयात-निर्यात से जुड़ी आवश्यकताओं से होता है। दोनों देशों ने समयबद्ध तरीके से पारस्परिक बाजार पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में काम जारी रखने पर सहमति जताई है। इससे कृषि उत्पादों के व्यापार में आने वाली व्यावहारिक और नियामकीय बाधाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

बैठक में भारत-मर्कोसुर व्यापार संबंध भी महत्वपूर्ण मुद्दा रहे। भारत और दक्षिण अमेरिकी व्यापार समूह मर्कोसुर के बीच वरीयता प्राप्त व्यापार समझौता पहले से मौजूद है। दोनों पक्षों ने इस समझौते के विस्तार और आधुनिकीकरण की संभावनाओं की समीक्षा की। वर्ष 2025 में भारत और मर्कोसुर देशों के बीच कुल व्यापार 20.84 अरब डॉलर तक पहुँच गया था। ऐसे में इस समझौते को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारत और ब्राजील ने समझौते से जुड़े संदर्भ दस्तावेजों को जल्द अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता भी जताई। इससे व्यापारिक संबंधों को अधिक संस्थागत आधार मिलने की उम्मीद है। दोनों पक्षों का मानना है कि मौजूदा व्यापार समझौतों को बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल के अनुरूप बनाना जरूरी है,ताकि उद्योगों को अधिक अवसर मिल सकें और दोनों देशों के उत्पादों की बाजार पहुँच बढ़ाई जा सके।

द्विपक्षीय व्यापार के अलावा भारत और ब्राजील ने निवेश संबंधों को भी प्राथमिकता दी है। दोनों देशों के उद्योगों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क बढ़ाने के लिए भारत-ब्राजील उच्च स्तरीय व्यापारिक स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। इसमें दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों,कारोबारी प्रतिनिधियों और कंपनियों के अधिकारियों ने भाग लिया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने किया। प्रतिनिधिमंडल में किर्लोस्कर समूह, यूपीएल और आदित्य बिड़ला समूह समेत 25 से अधिक भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी से यह संकेत मिलता है कि दोनों देश सरकारी स्तर की बातचीत के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी बढ़ाना चाहते हैं। व्यापार और निवेश के लक्ष्यों को हासिल करने में कंपनियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उद्योगों के बीच सीधे संपर्क से संयुक्त उपक्रम,निवेश,तकनीकी सहयोग और नए बाजारों में प्रवेश के अवसर पैदा हो सकते हैं।

भारत और ब्राजील ने नई दिल्ली में एपेक्सब्रासिल कार्यालय की स्थापना का भी स्वागत किया। एपेक्सब्रासिल ब्राजील की व्यापार और निवेश प्रोत्साहन संस्था है। भारत में इसके कार्यालय की मौजूदगी से दोनों देशों के कारोबारी समुदायों के बीच संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है। इससे ब्राजील की कंपनियों को भारतीय बाजार और यहां उपलब्ध निवेश अवसरों की जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी। साथ ही भारतीय कंपनियों के लिए ब्राजील में संभावित व्यापार और निवेश के अवसरों तक पहुँच आसान हो सकती है।

दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं है। भारत और ब्राजील ब्रिक्स, जी-20 और विश्व व्यापार संगठन जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी सहयोग करते हैं। बैठक में दोनों देशों ने इन मंचों पर खुले, समावेशी और विकासोन्मुख वैश्विक व्यापार तंत्र के समर्थन में मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों का जोर ऐसे वैश्विक व्यापार ढाँचे पर है,जिसमें विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के हितों और प्राथमिकताओं को पर्याप्त महत्व मिले।

भारत और ब्राजील दोनों ही बड़ी आबादी और विशाल घरेलू बाजार वाली उभरती अर्थव्यवस्थाएँ हैं। दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने से न केवल व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि हो सकती है,बल्कि तकनीक,उद्योग, कृषि और निवेश जैसे क्षेत्रों में भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। ऐसे में 30 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्य केवल एक आर्थिक आँकड़ा नहीं है,बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक और कारोबारी संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत भी है।

यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच मजबूत हो रहे राजनीतिक और आर्थिक संबंधों की पृष्ठभूमि में हुई। भारत और ब्राजील लंबे समय से विकासशील देशों के हितों,बहुपक्षीय सहयोग और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दों पर एक-दूसरे के साथ काम करते रहे हैं। अब दोनों देश इस राजनीतिक साझेदारी को व्यापार और निवेश के क्षेत्र में और ठोस रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।

आने वाले समय में 30 अरब डॉलर के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बाजार पहुँच, नियामकीय बाधाओं को कम करना, व्यापार समझौतों का विस्तार और निजी क्षेत्र की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। दवा, रसायन, इंजीनियरिंग, मशीनरी और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से व्यापार का आधार व्यापक हो सकता है। साथ ही निवेश और औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा मिलने से दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच दीर्घकालिक संबंध मजबूत हो सकते हैं।

कुल मिलाकर, भारत-ब्राजील व्यापार निगरानी तंत्र की आठवीं बैठक ने दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए एक स्पष्ट दिशा तय की है। मौजूदा 15.07 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 30 अरब डॉलर तक ले जाना एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य जरूर है, लेकिन दोनों देशों ने व्यापार विविधीकरण, बाजार पहुँच, निवेश और औद्योगिक सहयोग के जरिए इसे हासिल करने की प्रतिबद्धता जताई है। अगर प्रस्तावित पहलों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है,तो भारत और ब्राजील के बीच आर्थिक साझेदारी आने वाले वर्षों में और व्यापक तथा मजबूत हो सकती है।