नई दिल्ली,5 मार्च (युआईटीवी)- भारत और फिनलैंड के बीच कूटनीतिक संबंधों को नई दिशा देने के उद्देश्य से अलेक्जेंडर स्टब इन दिनों तीन दिवसीय भारत दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने गुरुवार को भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से मुलाकात की और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की। इसके बाद उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की,जहाँ सहयोग के कई क्षेत्रों को आगे बढ़ाने पर विचार किया गया। इस दौरे को भारत और फिनलैंड के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राष्ट्रपति स्टब के साथ हुई अपनी मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्हें गुरुवार सुबह नई दिल्ली में फिनलैंड के राष्ट्रपति से मिलकर बेहद खुशी हुई। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति स्टब के बीच होने वाली बैठक से दोनों देशों के संबंधों को और मजबूती मिलेगी। जयशंकर ने यह भी कहा कि उन्हें रायसीना डायलॉग में राष्ट्रपति स्टब के संबोधन का इंतजार है,जहाँ वे मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेने वाले हैं।
राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत पहुँचे। यह उनकी राष्ट्रपति पद सँभालने के बाद पहली भारत यात्रा है,इसलिए इसे विशेष महत्व दिया जा रहा है। उनके साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है,जिसमें कई मंत्री,वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और प्रमुख उद्योग जगत के नेता शामिल हैं। इस प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य भारत और फिनलैंड के बीच व्यापार,तकनीक,नवाचार और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाना है।
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के अनुसार,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति स्टब के बीच हुई बातचीत में दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा हुई। खास तौर पर डिजिटल टेक्नोलॉजी,स्वच्छ ऊर्जा,शिक्षा,अनुसंधान और नवाचार जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसके अलावा दोनों नेताओं ने अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया,जिनमें बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के उपाय शामिल हैं।
भारत और फिनलैंड के बीच लंबे समय से मित्रतापूर्ण संबंध रहे हैं। दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों,कानून के शासन और खुली अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को साझा करते हैं। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ता रहा है। विशेष रूप से यूरोपीय संघ और नॉर्डिक क्षेत्र में फिनलैंड को भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है। भारत के लिए फिनलैंड तकनीकी नवाचार,शिक्षा प्रणाली और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रमुख सहयोगी है।
राष्ट्रपति स्टब की यात्रा का एक अहम हिस्सा नई दिल्ली में आयोजित होने वाला रायसीना डायलॉग है। 5 से 7 मार्च तक आयोजित होने वाले इस प्रतिष्ठित वैश्विक सम्मेलन के 11वें संस्करण में वे मुख्य अतिथि के रूप में भाग ले रहे हैं। इस सम्मेलन में दुनिया भर के नीति-निर्माता,रणनीतिक विशेषज्ञ,राजनयिक और शिक्षाविद भाग लेते हैं। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति स्टब अपने संबोधन में वैश्विक सुरक्षा,यूरोप की रणनीतिक प्राथमिकताओं और भारत-यूरोप सहयोग पर अपने विचार साझा करेंगे।
इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति स्टब के सम्मान में एक विशेष लंच का आयोजन भी करेंगे। यह औपचारिक कार्यक्रम दोनों देशों के बीच मित्रता और सहयोग के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा राष्ट्रपति स्टब भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में भारत और फिनलैंड के बीच राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा होने की उम्मीद है।
नई दिल्ली में अपने आधिकारिक कार्यक्रमों के बाद राष्ट्रपति स्टब मुंबई का भी दौरा करेंगे। मुंबई में वे महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे भारतीय उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे और एक भारत-फिनलैंड बिजनेस इवेंट में भाग लेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना है।
मुंबई दौरे के दौरान राष्ट्रपति स्टब शैक्षणिक क्षेत्र में भी संवाद स्थापित करेंगे। वे मुंबई विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करेंगे और युवाओं के साथ बातचीत करेंगे। इस संवाद में शिक्षा,नवाचार,वैश्विक नेतृत्व और भारत-फिनलैंड सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। यह कार्यक्रम दोनों देशों के बीच अकादमिक सहयोग को बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत और फिनलैंड के बीच हाल के वर्षों में तकनीकी और नवाचार आधारित सहयोग तेजी से बढ़ा है। फिनलैंड की कंपनियाँ खास तौर पर दूरसंचार,स्वच्छ ऊर्जा,स्मार्ट शहर,डिजिटल तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। भारत में भी इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विकास हो रहा है,जिससे दोनों देशों के बीच साझेदारी के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति स्टब की यह यात्रा भारत-फिनलैंड संबंधों को नई ऊँचाई तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वैश्विक स्तर पर बदलते राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य के बीच भारत और फिनलैंड जैसे लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग और संवाद का महत्व और बढ़ गया है।
इस यात्रा से न केवल दोनों देशों के राजनीतिक संबंध मजबूत होंगे,बल्कि व्यापार,तकनीक,शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में भी नई संभावनाएँ खुलेंगी। ऐसे समय में जब वैश्विक चुनौतियाँ बढ़ रही हैं,भारत और फिनलैंड के बीच यह बढ़ती साझेदारी अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और स्थिरता को भी नई दिशा दे सकती है।
