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मध्य-पूर्व तनाव के बीच सोना-चाँदी में तेज उतार-चढ़ाव,सुरक्षित निवेश की तलाश में बढ़ी माँग

नई दिल्ली,5 मार्च (युआईटीवी)- मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच गुरुवार के कारोबारी सत्र में कीमती धातुओं—सोना और चाँदी की कीमतों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अमेरिका,इजरायल और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के कारण वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ गई है और इसी वजह से बाजार में सुरक्षित निवेश विकल्पों यानी सेफ-हेवन एसेट्स की माँग में तेजी आई। शुरुआती कारोबार में सोना और चाँदी की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया,हालाँकि दिन बढ़ने के साथ-साथ कुछ निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली करने के कारण दोनों धातुओं की कीमतों में हल्की गिरावट भी देखने को मिली।

घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर खबर लिखे जाने तक दोपहर लगभग 12 बजकर 13 मिनट पर सोने के अप्रैल वायदा में इंट्रा-डे आधार पर करीब 0.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और इसकी कीमत 1,61,165 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गई। इसी तरह मई डिलीवरी वाले चाँदी के वायदा में भी गिरावट देखी गई और यह 1.17 प्रतिशत यानी 3,109 रुपये फिसलकर 2,62,451 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुँच गया। हालाँकि,दिन की शुरुआत में बाजार का रुख पूरी तरह अलग था। सुबह के शुरुआती सत्र में एमसीएक्स पर सोना तेजी से चढ़कर 1,63,142 रुपये प्रति 10 ग्राम के दिन के उच्च स्तर तक पहुँच गया था,जबकि चाँदी ने भी जोरदार उछाल के साथ 2,74,251 रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर छू लिया था।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती तेजी की मुख्य वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और युद्ध का खतरा है। जब भी दुनिया में राजनीतिक या सैन्य संकट गहराता है,तो निवेशक जोखिम भरे निवेश विकल्पों से निकलकर सोना और चाँदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं। यही कारण है कि मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव ने कीमती धातुओं की माँग को बढ़ावा दिया। इससे पहले दिन में चाँदी की कीमतों में लगभग 3.3 प्रतिशत तक की तेज बढ़त दर्ज की गई थी,जबकि सोना भी एक प्रतिशत से अधिक मजबूत हुआ था। हालाँकि,बाद में कई निवेशकों ने ऊँचे स्तर पर मुनाफा वसूली शुरू कर दी,जिसके कारण कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली। वैश्विक बाजार में स्पॉट सिल्वर लगभग 1.2 प्रतिशत बढ़कर 84.43 डॉलर प्रति औंस पर पहुँच गया,जबकि स्पॉट गोल्ड 0.8 प्रतिशत की तेजी के साथ 5,176.69 डॉलर प्रति औंस तक पहुँच गया। वैश्विक स्तर पर यह तेजी मुख्य रूप से बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों और कमजोर अमेरिकी मुद्रा के कारण देखी गई। निवेशकों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है तो सोना-चाँदी में आगे भी तेजी देखने को मिल सकती है।

दरअसल अमेरिका,इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब छठे दिन में प्रवेश कर चुका है। इस संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े महत्वपूर्ण मार्गों पर खतरा मंडराने लगा है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के बंद होने की आशंका ने ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है तो वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और इससे महँगाई में तेज वृद्धि हो सकती है। यही आशंका निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर धकेल रही है।

कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी का एक और बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी भी माना जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बाजार में डॉलर की स्थिति निवेशकों के लिए काफी महत्वपूर्ण होती है क्योंकि जब डॉलर कमजोर होता है तो अन्य मुद्राओं के निवेशकों के लिए सोना-चाँदी खरीदना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है। इसी वजह से वैश्विक बाजार में इन धातुओं की माँग बढ़ जाती है। डॉलर इंडेक्स में मामूली बदलाव देखने को मिला और यह लगभग 0.22 प्रतिशत बढ़कर 98.99 के स्तर पर पहुँच गया। हालाँकि,विश्लेषकों का मानना है कि हाल के दिनों में तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक शेयर बाजारों में सुधार के कारण सुरक्षित मुद्रा माने जाने वाले डॉलर की माँग कुछ हद तक कम हुई है।

ऊर्जा बाजार में भी तनाव का असर साफ दिखाई दे रहा है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बेंचमार्क कच्चे तेल के अप्रैल अनुबंध में शुरुआती कारोबार के दौरान करीब 2.43 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और इसकी कीमत 83.26 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई। इसी तरह न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज यानी एनवाईमेक्स पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल का अप्रैल अनुबंध 2.63 प्रतिशत बढ़कर 76.63 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। ऊर्जा कीमतों में इस तेजी ने भी निवेशकों की चिंता को बढ़ाया है क्योंकि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर वैश्विक महंगाई पर पड़ता है।

इस बीच क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाने वाली एक बड़ी खबर भी सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका की एक पनडुब्बी ने श्रीलंका के पास ईरान के एक युद्धपोत को निशाना बनाते हुए उसे डुबो दिया। इस घटना में कम से कम 80 लोगों की मौत की खबर सामने आई है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है और अब यह आशंका जताई जा रही है कि संघर्ष का दायरा और बढ़ सकता है। यदि ऐसा होता है,तो इसका असर न केवल ऊर्जा बाजार बल्कि वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में सोने और चाँदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। तकनीकी विश्लेषण के आधार पर विशेषज्ञों का कहना है कि एमसीएक्स पर सोने के लिए 1,58,000 रुपये और 1,62,000 रुपये का स्तर मजबूत सपोर्ट के रूप में काम कर सकता है। वहीं यदि कीमतों में तेजी आती है तो 1,75,000 रुपये और 1,80,000 रुपये का स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस माना जा रहा है। इसी तरह चाँदी के लिए 2,50,000 रुपये और 2,70,000 रुपये का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट हो सकता है,जबकि 3,00,000 रुपये और 3,20,000 रुपये के स्तर को मजबूत रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है।

वैश्विक स्तर पर भी कई विशेषज्ञ चाँदी की कीमतों को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं। उनका मानना है कि आने वाले समय में चाँदी की कीमतें 85 से 95 डॉलर प्रति औंस के बीच स्थिर रह सकती हैं। इसके बाद यदि बाजार में तेजी बनी रहती है तो यह 100 डॉलर प्रति औंस के स्तर की ओर भी बढ़ सकती है। वहीं सोने के मामले में कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ता है और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ता है तो सोना 5,500 से 5,600 डॉलर प्रति औंस तक पहुँच सकता है।

हालाँकि,दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सोना-चाँदी की तेजी पर कुछ सीमाएँ भी हो सकती हैं। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण वैश्विक महँगाई बढ़ने की आशंका है और यदि ऐसा होता है तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना टल सकती है। यदि ब्याज दरें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं,तो अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को समर्थन मिल सकता है और इससे सोना-चाँदी की तेजी कुछ हद तक सीमित हो सकती है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो मौजूदा समय में वैश्विक बाजार कई तरह की अनिश्चितताओं से गुजर रहा है। एक तरफ मध्य-पूर्व में बढ़ता सैन्य संघर्ष है,दूसरी तरफ ऊर्जा आपूर्ति और महँगाई को लेकर चिंता बनी हुई है। इन परिस्थितियों में निवेशक लगातार सुरक्षित निवेश विकल्पों की तलाश कर रहे हैं,जिससे सोना और चाँदी जैसी कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव तेज हो गया है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि मध्य-पूर्व में जारी तनाव किस दिशा में आगे बढ़ता है और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियाँ किस तरह आकार लेती हैं।