नई दिल्ली,14 जनवरी (युआईटीवी)- भारत और फ्रांस के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में मंगलवार को नई दिल्ली में एक अहम कदम उठाया गया,जब भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और फ्रांसीसी राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार इमैनुएल बोन ने 38वीं भारत-फ्रांस रणनीतिक वार्ता की सह-अध्यक्षता की। इस उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देशों ने न केवल आपसी सहयोग की मौजूदा पहलों की समीक्षा की,बल्कि भविष्य के लिए साझा दृष्टिकोण को भी स्पष्ट किया। बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच इस वार्ता को भारत-फ्रांस संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रणनीतिक वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और फ्रांस की साझेदारी केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका उद्देश्य क्षेत्रीय और वैश्विक शांति,स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देना भी है। बैठक में सुरक्षा और रक्षा सहयोग को केंद्रीय विषय के रूप में देखा गया। दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में चल रही परियोजनाओं,संयुक्त अभ्यासों और तकनीकी सहयोग पर संतोष जताया और इन्हें और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना के अनुरूप संयुक्त विकास और सह-निर्माण के अवसरों पर विशेष रूप से चर्चा हुई,ताकि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के साथ-साथ उच्च तकनीक का समावेश किया जा सके।
बैठक में प्रौद्योगिकी,अंतरिक्ष और नागरिक परमाणु सहयोग जैसे क्षेत्रों पर भी गहन विचार-विमर्श हुआ। भारत और फ्रांस पहले से ही अंतरिक्ष सहयोग में मजबूत साझेदार रहे हैं और इस वार्ता में दोनों पक्षों ने उपग्रह प्रौद्योगिकी,पृथ्वी अवलोकन और अंतरिक्ष अनुसंधान के नए क्षेत्रों में मिलकर काम करने की संभावनाओं पर चर्चा की। नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी,जिसे ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रणनीतिक वार्ता का एक अहम पहलू बदलती भू-राजनीतिक स्थिति पर विचार था। दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र,यूरोप और पश्चिम एशिया में उभरती चुनौतियों पर अपने-अपने दृष्टिकोण साझा किए। भारत और फ्रांस ने यह माना कि मौजूदा वैश्विक सुरक्षा माहौल में अनिश्चितताएँ बढ़ी हैं और ऐसे में समान सोच वाले देशों के बीच करीबी समन्वय पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। इस संदर्भ में दोनों पक्षों ने बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने और अंतर्राष्ट्रीय कानून के सम्मान पर आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की आगामी भारत यात्रा की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों में एक और अहम अध्याय जोड़ने वाली मानी जा रही है। मैक्रों ने पहले ही 8 जनवरी को भारत आने की घोषणा कर दी थी और कहा था कि वे अगले महीने नई दिल्ली का दौरा करेंगे। उनकी यह यात्रा ऐसे समय हो रही है,जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,वैश्विक शासन और तकनीकी नवाचार जैसे मुद्दे अंतर्राष्ट्रीय एजेंडे में शीर्ष पर हैं।
दरअसल,फ्रांस नई दिल्ली में आयोजित होने वाले एआई इम्पैक्ट समिट की सह-मेजबानी कर रहा है,जिसमें राष्ट्रपति मैक्रों की भागीदारी तय मानी जा रही है। पेरिस में राजदूतों को संबोधित करते हुए मैक्रों ने भारत के साथ एआई के क्षेत्र में सहयोग को रेखांकित किया था। उन्होंने कहा था कि पिछले साल पेरिस में आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट में पूरी दुनिया ने भाग लिया था और उस समिट की सह-अध्यक्षता उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ की थी। अब उसी पहल के फॉलो-अप के तौर पर वे भारत आ रहे हैं।
मैक्रों ने यह भी कहा था कि भारत और फ्रांस ने मिलकर एक ऐसा अंतर्राष्ट्रीय समझौता तैयार किया है,जो बहुपक्षवाद के केंद्र में है और नवाचार में विश्वास करता है,लेकिन साथ ही निष्पक्ष और जिम्मेदार नियमन पर भी जोर देता है। यह बयान इस बात का संकेत है कि दोनों देश एआई जैसी उभरती तकनीकों के लिए वैश्विक नियम तय करने में अग्रणी भूमिका निभाना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही फ्रांस एआई एक्शन समिट में ‘इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ की घोषणा कर चुके हैं। यह समिट 19 और 20 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली है और इसे ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाली पहली वैश्विक एआई समिट के रूप में देखा जा रहा है। इस पहल के जरिए भारत और फ्रांस न केवल तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना चाहते हैं,बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि एआई का विकास समावेशी,नैतिक और मानव-केंद्रित हो।
38वीं भारत-फ्रांस रणनीतिक वार्ता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों देश अपनी साझेदारी को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सुरक्षा और रक्षा से लेकर एआई और अंतरिक्ष तक,सहयोग के कई आयाम ऐसे हैं,जो आने वाले वर्षों में भारत-फ्रांस संबंधों को और गहराई देंगे। राष्ट्रपति मैक्रों की आगामी भारत यात्रा और एआई इम्पैक्ट समिट जैसे कार्यक्रम इस साझेदारी को वैश्विक मंच पर और अधिक प्रभावशाली बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले हैं।
