7 सितंबर (युआईटीवी)- भारतीय-अमेरिकी फिजीशियन डॉ सिद्धार्थ मुखर्जी की पुस्तक को बैली गिफोर्ड पुरस्कार जो ब्रिटेन के शीर्ष पुरस्कारों में से एक है की सूचि में सम्मिलित किया गया है। डॉ सिद्धार्थ मुखर्जी भारतीय-अमेरिकी कैंसर चिकित्सक और शोधकर्ता हैं। जिनके पुस्तक को नॉन-फिक्शन के लिए लंदन में दिए जाने वाले प्रतिष्ठित 50,000 पाउंड की बैली गिफ़ोर्ड पुरस्कार की सूचि में सम्मिलित किया गया है।
13 पुस्तकों की सूचि की घोषणा की गई है जिसमें डॉ सिद्धार्थ मुखर्जी की पुस्तक ” द सॉन्ग ऑफ़ द सेल : एन एक्सप्लोरेशन ऑफ़ मेडिसिन एंड द न्यू ह्यूमन ” की भी घोषणा की गई। इस पुस्तक में सेलुलर अनुसंधान ने चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत से महत्वपूर्ण कार्य किए हैं के बारे में बताया गया है। जिससे एड्स,अल्जाइमर जैसे बीमारियों का इलाज संभव हो गया है।
53 वर्षीय रोड्स स्कॉलर को निर्णायक पैनल ने अब तक की सबसे आश्चर्यजनक और प्रभावशाली पुस्तक बताया है।
हमारे जीवन की मूलभूत इकाई कोशिका है। हमारी समझ जो हमारे शरीर और हमारे कोशिका के बारे में है उसे नया आकर और नया आयाम देने का काम कोशिका की खोज ने दिया है। जो चिकित्सा की क्षेत्र में क्रांति लाने का काम किया है। निर्णायक पैनल के जजों का कहना है कि पहले से कहीं अधिक यह भविष्य के लिए क्लीनिकल संभावनाएं रखता है।
“डॉ सिद्धार्थ मुखर्जी द्वारा इस सेलुलर कहानी का विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं,जो व्यक्तिगत तो है ही साथ ही आधिकारिक भी है। उनके पास नायाब वैज्ञानिक कौशल है – कठिनाइयों,जटिलताओं को दूर कर कोशिकाओं के जैसे जीवन की बुनियाद को प्रकाशित करने की निपुणता है।
डॉ मुखर्जी के कई पत्रिकाओं जैसे द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन,द न्यूयॉर्क टाइम्स,नेचर,सेल और द न्यू यॉर्कर आदि में कई लेख प्रकाशित हुए हैं।
265 पुस्तकों में से जजों के एक पैनल द्वारा चयन किया गया है। 8 अक्टूबर 2023 को इंग्लैंड के वार्षिक चेल्टनहैम लिटरेचर फेस्टिवल में पुरस्कार के लिए छह फाइनलिस्ट की घोषणा एक लाइव कार्यक्रम में किया जाएगा। उन छह फाइनलिस्ट में विजेता कौन होगा इसका खुलासा 16 नवंबर 2023 को लंदन के विज्ञान संग्रहालय में एक समारोह में किया जाएगा।
