डॉलर

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 10.51 अरब डॉलर बढ़कर 692.87 अरब डॉलर पहुँचा, रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुँची अर्थव्यवस्था

नई दिल्ली,8 अगस्त (युआईटीवी)- भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार पाँचवें सप्ताह जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा शुक्रवार को जारी आँकड़ों के अनुसार,31 जुलाई को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 10.512 अरब डॉलर बढ़कर 692.866 अरब डॉलर हो गया। यह जनवरी के अंत के बाद विदेशी मुद्रा भंडार में हुई सबसे बड़ी साप्ताहिक वृद्धि है। ताजा बढ़ोतरी के साथ भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फरवरी 2026 में दर्ज किए गए अपने सर्वकालिक उच्च स्तर के और करीब पहुंच गया है।

भारतीय रिजर्व बैंक के आँकड़ों के मुताबिक, 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया था। इसके बाद वैश्विक अनिश्चितताओं और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच भंडार में कुछ गिरावट देखने को मिली थी। हालाँकि,हाल के सप्ताहों में विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ने के साथ भंडार में फिर से मजबूती आई है। 31 जुलाई को समाप्त सप्ताह में हुई 10.512 अरब डॉलर की वृद्धि इसी सुधार की कड़ी का हिस्सा है।

इससे पहले 24 जुलाई को समाप्त सप्ताह में भी भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 6.118 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई थी। लगातार दो सप्ताह में हुई बड़ी बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि देश की बाहरी वित्तीय स्थिति में सुधार जारी है। विदेशी मुद्रा भंडार में मजबूती ऐसे समय में आई है,जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता,प्रमुख मुद्राओं में उतार-चढ़ाव और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है।

आरबीआई के साप्ताहिक आँकड़ों के अनुसार,31 जुलाई को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार के प्रमुख घटकों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ 8.750 अरब डॉलर बढ़कर 564.680 अरब डॉलर हो गईं। विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का ही होता है,इसलिए इसमें होने वाली वृद्धि का कुल भंडार पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में विभिन्न विदेशी मुद्राओं में रखी गई परिसंपत्तियाँ शामिल होती हैं। इन्हें डॉलर के संदर्भ में व्यक्त किया जाता है। इसलिए यूरो,पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में होने वाले बदलाव का असर भी डॉलर में आंके गए विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है। इसके अलावा विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में निवेश और अन्य संबंधित बदलाव भी कुल आँकड़े को प्रभावित करते हैं।

सप्ताह के दौरान भारत के स्वर्ण भंडार में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। आरबीआई के मुताबिक, 31 जुलाई को समाप्त सप्ताह में स्वर्ण भंडार का मूल्य 1.685 अरब डॉलर बढ़कर 104.743 अरब डॉलर हो गया। वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में मजबूती और केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने को भंडार के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में रखने की प्रवृत्ति के बीच भारत के स्वर्ण भंडार का महत्व भी बढ़ा है।

इसके अलावा भारत के विशेष आहरण अधिकार यानी एसडीआर में भी वृद्धि दर्ज की गई। आरबीआई के अनुसार,संबंधित सप्ताह में एसडीआर 48 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.666 अरब डॉलर हो गया। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से जुड़े इस भंडार घटक का इस्तेमाल सदस्य देशों की अंतर्राष्ट्रीय तरलता को मजबूत करने में किया जाता है।

विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार हो रही वृद्धि का एक प्रमुख कारण देश में बढ़ा विदेशी मुद्रा प्रवाह माना जा रहा है। जून की शुरुआत से भारत में विदेशी पूँजी का प्रवाह मजबूत रहा है। इस अवधि में अनिवासी भारतीयों की जमा योजनाओं और विदेशी उधारी के माध्यम से करीब 40.8 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश भारत में आया है। इससे देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूती मिली है और विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने में मदद मिली है।

विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच का काम करता है। पर्याप्त भंडार होने से किसी देश को अंतर्राष्ट्रीय भुगतान,आयात खर्च और बाहरी वित्तीय दबावों से निपटने में मदद मिलती है। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार विशेष रूप से महत्वपूर्ण है,क्योंकि इससे कच्चे तेल,इलेक्ट्रॉनिक्स,मशीनरी और अन्य आवश्यक वस्तुओं के आयात भुगतान में मदद मिलती है।

भंडार में मौजूदा बढ़ोतरी का असर भारतीय रुपये की स्थिति पर भी देखने को मिल रहा है। मई 2026 में रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुँचने के बाद भारतीय रुपया अब तक लगभग 1.8 प्रतिशत मजबूत हो चुका है। विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने से भारतीय रिजर्व बैंक के पास मुद्रा बाजार में जरूरत के मुताबिक हस्तक्षेप करने की अधिक क्षमता होती है। यदि रुपये पर अचानक दबाव बढ़ता है,तो केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए कर सकता है।

मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार निवेशकों के भरोसे के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। जब किसी देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध होती है,तो वैश्विक निवेशकों को उसकी बाहरी देनदारियों और आयात संबंधी जरूरतों को पूरा करने की क्षमता पर अधिक भरोसा रहता है। इससे वित्तीय बाजारों में स्थिरता बढ़ सकती है और वैश्विक आर्थिक झटकों का असर सीमित करने में मदद मिल सकती है।

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार इस साल की शुरुआत में वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण दबाव में आया था। हालाँकि,फरवरी में यह रिकॉर्ड 728.494 अरब डॉलर तक पहुँचा था। इसके बाद इसमें गिरावट आई,लेकिन अब लगातार पाँच सप्ताह से हो रही वृद्धि से संकेत मिल रहा है कि देश का बाहरी क्षेत्र फिर से मजबूत स्थिति में लौट रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार,विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी के पीछे केवल निवेश प्रवाह ही नहीं, बल्कि वैश्विक मुद्रा मूल्यों में बदलाव और सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसे कारक भी भूमिका निभाते हैं। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों को डॉलर में मापे जाने के कारण गैर-डॉलर मुद्राओं के मूल्य में बदलाव से भी भंडार के आँकड़े प्रभावित हो सकते हैं। इसी तरह सोने के बाजार मूल्य में वृद्धि होने पर डॉलर के लिहाज से स्वर्ण भंडार का मूल्य बढ़ जाता है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में विदेशी निवेश और अन्य विदेशी मुद्रा प्रवाह मजबूत बने रहते हैं तथा वैश्विक परिस्थितियाँ अपेक्षाकृत अनुकूल रहती हैं, तो भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अपने पुराने रिकॉर्ड को फिर से पार कर सकता है। 692.866 अरब डॉलर का मौजूदा स्तर फरवरी में दर्ज रिकॉर्ड से अभी करीब 35.6 अरब डॉलर नीचे है,लेकिन हाल की लगातार वृद्धि ने नए रिकॉर्ड की संभावना को मजबूत किया है।

विदेशी मुद्रा भंडार में मजबूती ऐसे समय में भारत के लिए विशेष महत्व रखती है,जब वैश्विक व्यापार, भू-राजनीतिक तनाव और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। मजबूत भंडार भारत को अचानक होने वाले बाहरी झटकों का सामना करने में अधिक सक्षम बनाता है। इसके साथ ही यह रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए आरबीआई को अतिरिक्त गुंजाइश देता है।

कुल मिलाकर,31 जुलाई को समाप्त सप्ताह के आँकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था के बाहरी क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। विदेशी मुद्रा भंडार में 10.512 अरब डॉलर की साप्ताहिक वृद्धि,विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में 8.750 अरब डॉलर की बढ़ोतरी और स्वर्ण भंडार में 1.685 अरब डॉलर की वृद्धि ने कुल भंडार को 692.866 अरब डॉलर तक पहुँचा दिया है। यदि विदेशी पूँजी का प्रवाह और वैश्विक परिस्थितियाँ अनुकूल बनी रहती हैं,तो भारत आने वाले समय में अपने सर्वकालिक विदेशी मुद्रा भंडार के रिकॉर्ड को पार कर सकता है। इससे रुपये को समर्थन मिलने के साथ-साथ भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति और वैश्विक निवेशकों का भरोसा भी और मजबूत होने की उम्मीद है।