नई दिल्ली,8 अगस्त (युआईटीवी)- भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी मुलाकात को बेहद खास और यादगार बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा करते हुए कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री से विस्तृत और समृद्ध बातचीत करने का अवसर मिला। चड्ढा ने प्रधानमंत्री के बहुमूल्य समय और मार्गदर्शन के लिए उनका आभार जताया।
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “एक सुबह जो हमेशा याद रहेगी। प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का सौभाग्य मिला। विस्तृत और समृद्ध बातचीत हुई। उनके बहुमूल्य समय और मार्गदर्शन से सीखने का अवसर देने के लिए हृदय से आभारी हूँ।” साझा की गई तस्वीर में राघव चड्ढा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान गणेश की एक प्रतिमा भेंट करते हुए दिखाई दे रहे हैं। मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है,लेकिन चड्ढा की पोस्ट से स्पष्ट है कि उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ हुई चर्चा को महत्वपूर्ण माना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात ऐसे समय में हुई है,जब संसद के मानसून सत्र के दौरान विभिन्न राजनीतिक और जनहित के मुद्दों पर चर्चा हो रही है। राघव चड्ढा ने हाल के दिनों में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े एक गंभीर मुद्दे को राज्यसभा में उठाया था। उन्होंने डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच मरीजों को जाँच के लिए भेजने के बदले कथित तौर पर दिए जाने वाले रेफरल कमीशन या ‘कट मनी’ की व्यवस्था पर चिंता जताई थी।
6 अगस्त को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान राघव चड्ढा ने कहा था कि कुछ डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच ऐसी व्यवस्था विकसित हो गई है,जिसका आर्थिक बोझ अंततः मरीजों को उठाना पड़ता है। उन्होंने इस मुद्दे को स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता और मरीजों के हित से जोड़ते हुए सरकार से इस पर गंभीरता से ध्यान देने की माँग की थी।
चड्ढा के अनुसार, कुछ मामलों में डॉक्टर मरीजों को विशेष जाँच केंद्रों पर जाँच कराने के लिए भेजते हैं और इसके बदले डॉक्टरों को एक निश्चित राशि या कमीशन दिए जाने का आरोप है। उन्होंने सदन में दावा किया था कि यह व्यवस्था धीरे-धीरे एक अनौपचारिक तंत्र का रूप ले चुकी है। उनके मुताबिक,कुछ मामलों में मरीज के इलाज या चिकित्सकीय जरूरत के बजाय उसे किसी खास डायग्नोस्टिक सेंटर पर भेजने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन दिए जाते हैं।
राज्यसभा सदस्य ने आरोप लगाया था कि कुछ मामलों में रेफरल के लिए डॉक्टरों को 3,000 रुपये तक दिए जाते हैं। उन्होंने कहा था कि इसके लिए निर्धारित कमीशन दरों के साथ एजेंटों और समानांतर प्रोत्साहन व्यवस्था का भी इस्तेमाल किया जाता है। उनका तर्क था कि इस तरह की व्यवस्था का सीधा प्रभाव मरीज की जेब पर पड़ता है,क्योंकि डायग्नोस्टिक सेंटर द्वारा किए जाने वाले कथित कमीशन भुगतान की लागत अंततः जाँच और उपचार के बिल में शामिल हो सकती है।
चड्ढा ने यह भी आरोप लगाया था कि कुछ डायग्नोस्टिक सेंटर अपने खातों में इस तरह के भुगतान को ‘मार्केटिंग खर्च’ के रूप में दिखाते हैं,जबकि डॉक्टरों की तरफ से इसे ‘रेफरल कमीशन’ के तौर पर दर्ज किए जाने की बात कही जाती है। उन्होंने सवाल उठाया था कि यदि मरीजों को उनकी चिकित्सकीय आवश्यकता के बजाय आर्थिक लाभ के आधार पर किसी विशेष जाँच केंद्र में भेजा जाता है,तो इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता और मरीजों के भरोसे पर पड़ता है।
उन्होंने कहा था कि इस तरह की कथित व्यवस्था में मरीज को यह जानकारी नहीं होती कि उसे किसी विशेष डायग्नोस्टिक सेंटर पर भेजने के पीछे कोई आर्थिक प्रोत्साहन काम कर रहा है या नहीं। परिणामस्वरूप मरीज डॉक्टर की सलाह को पूरी तरह चिकित्सकीय निर्णय मानकर स्वीकार करता है और जाँच के लिए भुगतान करता है। यदि उस लागत में किसी प्रकार का रेफरल कमीशन शामिल है,तो उसका आर्थिक बोझ भी अंततः मरीज पर पड़ता है।
राघव चड्ढा ने इस मुद्दे को उठाते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया था। उनका कहना था कि चिकित्सा व्यवस्था का मूल उद्देश्य मरीज का उपचार और उसकी जरूरत के अनुसार उचित जाँच सुनिश्चित करना होना चाहिए। किसी भी प्रकार की आर्थिक प्रोत्साहन व्यवस्था यदि चिकित्सकीय निर्णयों को प्रभावित करती है,तो वह मरीजों के हित के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी हालिया मुलाकात और इसके कुछ दिन पहले संसद में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा मुद्दा उठाने की घटनाएँ अलग-अलग संदर्भों में हुई हैं। प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात को लेकर चड्ढा ने सार्वजनिक रूप से केवल अपने अनुभव और प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया है। उन्होंने बातचीत में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसका कोई विस्तृत ब्यौरा साझा नहीं किया।
सोशल मीडिया पर साझा तस्वीर में प्रधानमंत्री मोदी और राघव चड्ढा के बीच सहज माहौल दिखाई देता है। चड्ढा द्वारा भगवान गणेश की प्रतिमा भेंट किए जाने को भी मुलाकात का प्रमुख दृश्य माना जा रहा है। प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद चड्ढा ने इसे अपने लिए सीखने और मार्गदर्शन हासिल करने का अवसर बताया।
इस मुलाकात के साथ ही राघव चड्ढा द्वारा संसद में उठाया गया स्वास्थ्य क्षेत्र का मुद्दा भी चर्चा में बना हुआ है। डायग्नोस्टिक जाँच स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और मरीजों के इलाज में इसकी भूमिका लगातार बढ़ी है। ऐसे में जाँच की जरूरत तय करने और किसी विशेष केंद्र की सिफारिश करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर उठाए गए सवाल स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक बहस का विषय बन सकते हैं।
रेफरल कमीशन के आरोपों पर संबंधित संस्थाओं और नियामक तंत्र की ओर से आगे क्या कार्रवाई होती है, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल चड्ढा ने इस मुद्दे को संसद के माध्यम से उठाकर मरीजों पर पड़ने वाले संभावित आर्थिक बोझ और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता की जरूरत को सामने रखा है।
वहीं प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई मुलाकात को लेकर उनकी टिप्पणी राजनीतिक और व्यक्तिगत दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चड्ढा ने प्रधानमंत्री के साथ बातचीत को यादगार बताते हुए उनके समय और मार्गदर्शन के लिए आभार जताया है। गणेश प्रतिमा भेंट करते हुए साझा की गई तस्वीर के साथ उनका संदेश यह दर्शाता है कि वह इस मुलाकात को अपने सार्वजनिक जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों में से एक मानते हैं।
