अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@ShpoolNews)

ब्राजील की जगह भारत का राष्ट्रपति चुनाव बता बैठे ट्रंप, 12.5 करोड़ वोटरों का किया गलत दावा

वॉशिंगटन,5 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी चुनाव व्यवस्था पर निशाना साधने की कोशिश में एक ऐसी गलती कर दी, जिसने सोशल मीडिया पर उन्हें चर्चा में ला दिया। ट्रंप ने ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर टिप्पणी करते हुए गलती से भारत का नाम ले लिया और दावा कर दिया कि भारत में राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में 12.5 करोड़ लोगों ने मतदान किया। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि मतदान खत्म होने के कुछ ही समय बाद उसी दिन चुनाव परिणाम सामने आ गए। जबकि भारत में राष्ट्रपति का चुनाव आम जनता सीधे मतदान करके नहीं करती है। भारत के राष्ट्रपति का निर्वाचन निर्वाचक मंडल के जरिए होता है, जिसमें संसद और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।

ट्रंप ने यह दावा अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर की गई एक पोस्ट में किया। उनकी पोस्ट का उद्देश्य अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया में कथित देरी और अनियमितताओं पर सवाल उठाना था, लेकिन ब्राजील की जगह भारत का उल्लेख किए जाने के कारण उनका दावा तथ्यात्मक रूप से गलत हो गया। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में भारत के राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में 12.5 करोड़ लोगों के मतदान करने की बात कही और अमेरिका की चुनावी प्रक्रिया से इसकी तुलना की।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी पोस्ट में कहा कि भारत में मतदान समाप्त होने के कुछ ही समय बाद उसी दिन परिणाम भी सामने आ गए, जबकि अमेरिका के डेट्रॉयट, फिलाडेल्फिया, कैलिफोर्निया और कई अन्य शहरों तथा राज्यों में इससे कम संख्या में पड़े मतों की गिनती के नतीजे आने में कई सप्ताह लग जाते हैं। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर कटाक्ष करते हुए मतों की गिनती को लेकर भी सवाल उठाया और अमेरिका की मतदान व्यवस्था को भ्रष्ट बताया। ट्रंप की इस पोस्ट को व्हाइट हाउस के आधिकारिक त्वरित प्रतिक्रिया खाते से भी दोबारा साझा किया गया, जिसके बाद उनकी गलती और ज्यादा लोगों तक पहुंच गई।

सोशल मीडिया पर ट्रंप की पोस्ट सामने आने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी गलती की ओर ध्यान दिलाया। कई उपयोगकर्ताओं ने बताया कि जिस चुनाव का उल्लेख ट्रंप करना चाहते थे,वह भारत का नहीं बल्कि ब्राजील का राष्ट्रपति चुनाव था। भारत में राष्ट्रपति का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान के जरिए नहीं होता,इसलिए 12.5 करोड़ लोगों के राष्ट्रपति चुनाव में सीधे मतदान करने का दावा भी वास्तविक व्यवस्था से मेल नहीं खाता।

दरअसल, ट्रंप की टिप्पणी ब्राजील में हुए राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण के बाद सामने आई। ब्राजील में राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो और मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। पहले चरण की मतगणना में फ्लावियो बोल्सोनारो ने लूला पर बढ़त बनाई,लेकिन वह राष्ट्रपति पद पर सीधे जीत हासिल करने के लिए जरूरी 50 प्रतिशत से अधिक मत हासिल नहीं कर सके। इसके चलते अब दोनों उम्मीदवारों के बीच दूसरे चरण का मुकाबला होना तय हुआ है।

लगभग 98.81 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने तक फ्लावियो बोल्सोनारो को 47.24 प्रतिशत वोट मिले थे,जबकि लूला दा सिल्वा को 44.91 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। दोनों उम्मीदवार बहुमत के निर्धारित आँकड़े को पार नहीं कर सके। ऐसे में अब ब्राजील के मतदाता 25 अक्टूबर को होने वाले दूसरे चरण के मतदान में दोनों में से किसी एक को राष्ट्रपति पद के लिए चुनेंगे। पहले चरण में तीसरे और अन्य उम्मीदवारों को मिले वोट अब चुनाव की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

फ्लावियो बोल्सोनारो का पहले चरण में बेहतर प्रदर्शन दक्षिणपंथी खेमे के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। जायर बोल्सोनारो के राजनीतिक प्रभाव का उनके बेटे के चुनावी अभियान पर भी असर देखा गया है। पूर्व राष्ट्रपति को पिछले चुनाव के परिणाम को सैन्य तख्तापलट के जरिए पलटने की असफल कोशिश की साजिश से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया है और वह 27 वर्ष की जेल की सजा काट रहे हैं।

पहले चरण में बढ़त हासिल करने के बाद फ्लावियो बोल्सोनारो के सामने अब इस प्रदर्शन को निर्णायक जीत में बदलने की चुनौती होगी। उन्हें उन मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने की कोशिश करनी होगी,जिन्होंने पहले दौर में दूसरे उम्मीदवारों का समर्थन किया था। वहीं लूला दा सिल्वा के लिए चुनौती और भी बड़ी है, क्योंकि उन्हें अपनी मौजूदा राजनीतिक पकड़ बनाए रखने के साथ-साथ उन मतदाताओं को भी आकर्षित करना होगा,जिन्होंने दक्षिणपंथी उम्मीदवारों या अन्य राजनीतिक दलों को वोट दिया है।

लूला के लिए दूसरा चरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके सामने ब्राजील की सत्ता में दक्षिणपंथी खेमे की वापसी रोकने की चुनौती है। पहले चरण के आँकड़ों से स्पष्ट है कि मुकाबला बेहद करीबी है और किसी भी उम्मीदवार को आसान जीत मिलने की स्थिति नहीं है। ऐसे में अगले दौर के चुनाव अभियान में आर्थिक नीतियाँ, रोजगार, सामाजिक कल्याण, कानून-व्यवस्था और देश की राजनीतिक दिशा जैसे मुद्दे प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं।

ट्रंप की पोस्ट ने इसी बीच एक अलग राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है। अमेरिकी चुनाव व्यवस्था पर टिप्पणी करने की उनकी कोशिश में भारत और ब्राजील के चुनावों को आपस में मिला दिया गया। भारत में राष्ट्रपति का निर्वाचन अप्रत्यक्ष प्रणाली से होता है, जबकि ब्राजील में राष्ट्रपति का चुनाव जनता सीधे मतदान के जरिए करती है और यदि किसी उम्मीदवार को पहले चरण में आवश्यक बहुमत नहीं मिलता,तो शीर्ष दो उम्मीदवारों के बीच दूसरा चरण कराया जाता है। इस अंतर के कारण ट्रंप का भारत से जुड़ा दावा तथ्यात्मक रूप से गलत साबित होता है।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि अंतर्राष्ट्रीय चुनावों पर टिप्पणी करते समय देशों की अलग-अलग चुनाव प्रणालियों को समझना कितना जरूरी है। ट्रंप की पोस्ट में भारत का नाम आने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी गलती को लेकर चर्चा तेज हो गई। हालाँकि,उनकी टिप्पणी का मूल उद्देश्य अमेरिकी चुनाव व्यवस्था की आलोचना करना था, लेकिन ब्राजील की जगह भारत का उल्लेख किए जाने से उनकी पोस्ट का एक बड़ा हिस्सा तथ्यात्मक विवाद में घिर गया। अब ब्राजील में 25 अक्टूबर को होने वाला दूसरा चरण यह तय करेगा कि देश की सत्ता लूला दा सिल्वा के पास रहती है या दक्षिणपंथी खेमे के फ्लावियो बोल्सोनारो को सत्ता सँभालने का मौका मिलता है।