अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@garrywalia_)

ईरान संघर्ष के बीच अमेरिका की बड़ी एडवाइजरी,मिडिल ईस्ट छोड़ने को कहा; हाई अलर्ट पर स्टेट डिपार्टमेंट

वाशिंगटन,3 मार्च (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान के साथ संघर्ष की स्थिति के बीच अमेरिका ने अपने नागरिकों को क्षेत्र के कई देशों को तत्काल छोड़ने की सलाह दी है। अमेरिकी प्रशासन ने इसे “गंभीर सुरक्षा जोखिम” बताते हुए स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में हालात तेजी से बदल रहे हैं और किसी भी अप्रत्याशित घटना से नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक वीडियो संदेश जारी कर मध्य पूर्व में मौजूद सभी अमेरिकी नागरिकों से सावधानी बरतने और उपलब्ध वाणिज्यिक साधनों का उपयोग कर जल्द-से-जल्द सुरक्षित स्थानों की ओर रवाना होने की अपील की है।

रुबियो ने अपने संदेश में कहा कि अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सरकार हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने लोगों से आधिकारिक एडवाइजरी का पालन करने और स्थानीय दूतावासों के संपर्क में बने रहने को कहा। अमेरिकी विदेश विभाग ने जिन देशों को तुरंत छोड़ने की सलाह दी है,उनमें बहरीन,मिस्र, ईरान,इराक,इजरायल,वेस्ट बैंक और गाजा,जॉर्डन,कुवैत,लेबनान,ओमान,कतर,सऊदी अरब,सीरिया,संयुक्त अरब अमीरात और यमन शामिल हैं। यह सूची इस बात का संकेत देती है कि चेतावनी व्यापक स्तर पर जारी की गई है और केवल किसी एक देश तक सीमित नहीं है।

विदेश विभाग में वाणिज्य दूतावास मामलों की सहायक सचिव मोरा नामदार ने कहा कि हालात की गंभीरता को देखते हुए अमेरिकियों से अनुरोध किया जा रहा है कि वे उपलब्ध कमर्शियल ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें और बिना देरी किए क्षेत्र से बाहर निकलें। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिस्थितियाँ तेजी से बदल सकती हैं,इसलिए निर्णय लेने में देरी करना जोखिम भरा हो सकता है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार,खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में प्रवासी समुदाय और महत्वपूर्ण ऊर्जा अवसंरचना मौजूद है,जिससे सुरक्षा चिंताएँ और बढ़ गई हैं।

एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि वाशिंगटन में चौबीसों घंटे काम करने वाली एक अंतर-एजेंसी टास्क फोर्स को सक्रिय कर दिया गया है। यह टास्क फोर्स एक विशेष ऑपरेशन सेंटर से संचालित हो रही है,जहाँ कांसुलर मामलों,नागरिक सुरक्षा और राजनयिक सुरक्षा के विशेषज्ञ मिलकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा,एक संकट संचार टीम 110 से अधिक अंतर-एजेंसी प्रतिभागियों और प्रभावित देशों में स्थित दूतावासों के साथ रोजाना समन्वय बैठकें कर रही है,ताकि जमीनी हालात की सटीक जानकारी मिलती रहे और जरूरत पड़ने पर तत्काल कदम उठाए जा सकें।

विदेश विभाग ने अब तक 30 से अधिक एसटीईपी संदेश और 15 सुरक्षा अलर्ट जारी किए हैं। एसटीईपी यानी स्मार्ट ट्रैवलर नामांकन कार्यक्रम एक ऐसी व्यवस्था है,जिसके जरिए अमेरिकी नागरिक अपने यात्रा विवरण दर्ज कराते हैं और आपात स्थिति में दूतावास उन्हें वास्तविक समय में सुरक्षा अपडेट भेज सकता है। अधिकारियों के मुताबिक,इन संदेशों पर करीब 50 लाख लोगों ने प्रतिक्रिया दी है। इसके अतिरिक्त,एक विशेष व्हाट्सएप चैनल भी शुरू किया गया है,जिसके 15,000 से अधिक फॉलोअर्स हैं और यह 6.5 लाख से ज्यादा लोगों तक पहुँच चुका है। यह दर्शाता है कि प्रशासन नागरिकों तक हर संभव माध्यम से सूचना पहुँचाने की कोशिश कर रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि वे वैश्विक और क्षेत्रीय मीडिया रुझानों पर लगातार नजर रख रहे हैं और नेतृत्व के बयानों का फारसी भाषा में अनुवाद कर प्रसारित किया जा रहा है,ताकि क्षेत्र में मौजूद लोगों तक सही और आधिकारिक जानकारी पहुँचे। इस कदम का उद्देश्य अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं को रोकना भी है,जो संकट के समय तेजी से फैल सकती हैं।

यह चेतावनी ऐसे समय में आई है,जब ईरान के साथ तनाव खुले संघर्ष में बदलने की आशंका बढ़ गई है। हालाँकि,अमेरिकी प्रशासन ने किसी विशिष्ट सैन्य कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है,लेकिन हालिया घटनाक्रम ने क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है। ऊर्जा आपूर्ति,समुद्री मार्गों की सुरक्षा और राजनयिक परिसरों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह एडवाइजरी एहतियाती कदम है,जिसका उद्देश्य संभावित खतरे से पहले ही नागरिकों को सुरक्षित करना है। अतीत में भी संकट की स्थितियों में अमेरिका ने इसी तरह की चेतावनियाँ जारी की हैं,लेकिन इस बार क्षेत्रीय दायरा अधिक व्यापक है। इससे यह संकेत मिलता है कि वाशिंगटन स्थिति को अत्यंत संवेदनशील मान रहा है।

फिलहाल अमेरिकी प्रशासन का फोकस अपने नागरिकों की सुरक्षित निकासी और उन्हें अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराने पर है। विदेश विभाग ने दोहराया है कि नागरिक आधिकारिक चैनलों के जरिए संपर्क में रहें और बिना पुष्टि वाली सूचनाओं पर भरोसा न करें। मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात के बीच यह एडवाइजरी आने वाले दिनों में क्षेत्रीय कूटनीति और सुरक्षा समीकरणों पर भी असर डाल सकती है।