अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (तस्वीर क्रेडिट@mdzishan0786)

इजरायली चुनाव से पहले ट्रंप ने नेतन्याहू के समर्थन में की अपील, बोले- हमारी जोड़ी ने रचा इतिहास

वॉशिंगटन/यरूशलम,26 अक्टूबर (युआईटीवी)- इजरायल में आम चुनाव से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के समर्थन में बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने इजरायल की जनता से अपील की है कि वह नेतन्याहू को एक बार फिर सत्ता में लाने पर विचार करे। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने मिलकर जिस बड़े मिशन की शुरुआत की थी,उसे अब पूरा करने की जरूरत है। ट्रंप ने नेतन्याहू के नेतृत्व की तारीफ करते हुए दावा किया कि दोनों के बीच मजबूत साझेदारी ने कई महत्वपूर्ण परिणाम दिए हैं। उनके इस बयान को इजरायली चुनाव से पहले नेतन्याहू के लिए खुला राजनीतिक समर्थन माना जा रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए नेतन्याहू के साथ अपने संबंधों और दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने नेतन्याहू को उनके उपनाम ‘बीबी’ से संबोधित किया और कहा कि दोनों नेताओं ने मिलकर इतिहास रचा है। ट्रंप के अनुसार,उनके और नेतन्याहू के बीच ऐसा संबंध रहा है,जिसने दोनों पक्षों को कई चुनौतियों का सामना करने में मदद की।

ट्रंप ने इसराइली मतदाताओं से कहा कि मतदान करते समय उन्हें नेतन्याहू के नेतृत्व और उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने नेतन्याहू को असाधारण और जुझारू प्रधानमंत्री बताते हुए उनके प्रति अपना समर्थन दोहराया।

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि नेतन्याहू और उनके बीच सहयोग का रिश्ता मजबूत रहा है और उनके विरोधी भी इस साझेदारी की ताकत को जानते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने कई अहम मुद्दों पर साथ काम किया है और उनकी साझा रणनीति के परिणाम सामने आए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसराइल और अमेरिका के खिलाफ लगाए जाने वाले नारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें इसराइल को ‘छोटा शैतान’ और अमेरिका को ‘बड़ा शैतान’ कहती रही हैं। ट्रंप ने दावा किया कि अब दुनिया भर में अमेरिका और इसराइल के खिलाफ लगाए जाने वाले ऐसे नारे सुनाई नहीं देते और भविष्य में भी ऐसा नहीं होगा।

उनके बयान में इजरायल की सुरक्षा और अमेरिका के साथ उसके संबंधों को प्रमुखता दी गई। ट्रंप ने संकेत दिया कि उनके प्रशासन की नीतियों और नेतन्याहू के नेतृत्व के बीच तालमेल ने क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

हालाँकि,ट्रंप के ये दावे उनके अपने बयान का हिस्सा हैं। इनका स्वतंत्र आकलन संबंधित सैन्य अभियानों,क्षेत्रीय परिस्थितियों और दोनों देशों की नीतियों के व्यापक संदर्भ में किया जाना जरूरी है।

अपनी पोस्ट में ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों का भी उल्लेख किया। उन्होंने ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ का हवाला देते हुए दावा किया कि इस अभियान ने ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने में सफलता हासिल की।

ट्रंप ने कहा कि इस अभियान के बाद अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत भी कार्रवाई की। उनके मुताबिक,इन अभियानों के परिणामस्वरूप ईरान की सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुँचा और उसकी नौसेना तथा वायुसेना प्रभावी रूप से कमजोर हो गईं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में ईरान की आर्थिक स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि नाकाबंदी के कारण ईरान के लिए तेल बेचना मुश्किल हो गया है और वहाँ महँगाई की दर 301 प्रतिशत तक पहुँच गई है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के सैन्य और प्रशासनिक नेतृत्व को भी गंभीर नुकसान पहुँचने की बात कही।

इन दावों के संबंध में स्वतंत्र रूप से सत्यापित आँकड़े और विस्तृत जानकारी महत्वपूर्ण हैं। खासकर महँगाई दर,तेल निर्यात और सैन्य क्षमताओं से जुड़े आँकड़ों का आकलन विश्वसनीय आर्थिक तथा सुरक्षा संबंधी आँकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है,जब ईरान को लेकर अमेरिकी नीति और संभावित सैन्य कार्रवाई पर चर्चा जारी है। इससे एक दिन पहले उन्होंने कहा था कि उन्होंने अभी अंतिम रूप से तय नहीं किया है कि ईरान के साथ कूटनीतिक समझौते का रास्ता अपनाया जाएगा या पूर्ण युद्ध की स्थिति पैदा होगी।

इस बयान से स्पष्ट होता है कि ईरान को लेकर अमेरिकी प्रशासन के सामने कूटनीति और सैन्य दबाव के बीच विकल्प मौजूद हैं। किसी संभावित समझौते की शर्तें,क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति और ईरान की प्रतिक्रिया आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

इसराइल और अमेरिका के बीच सुरक्षा सहयोग लंबे समय से दोनों देशों के संबंधों का प्रमुख हिस्सा रहा है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम,उसकी सैन्य गतिविधियों और मध्य पूर्व में उसके प्रभाव को लेकर दोनों देशों की चिंताएँ भी इस साझेदारी को प्रभावित करती रही हैं।

ऐसे में ट्रंप की ओर से नेतन्याहू के समर्थन में दिया गया बयान केवल व्यक्तिगत प्रशंसा तक सीमित नहीं है,बल्कि यह दोनों नेताओं के साझा सुरक्षा एजेंडे को भी रेखांकित करता है।

इजरायल में चुनाव से पहले किसी विदेशी नेता की ओर से मौजूदा प्रधानमंत्री के समर्थन में खुली अपील राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकती है। ट्रंप ने अपने बयान के जरिए इजरायली मतदाताओं के सामने नेतन्याहू के नेतृत्व और अमेरिका के साथ उनके संबंधों को प्रमुखता से रखा है।

हालाँकि, चुनाव में मतदाताओं का फैसला कई मुद्दों पर निर्भर करेगा। इनमें सुरक्षा व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, सरकार का प्रदर्शन और घरेलू राजनीतिक परिस्थितियाँ शामिल हो सकती हैं। ट्रंप का समर्थन नेतन्याहू के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संदेश है,लेकिन इससे चुनाव के नतीजे तय होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

नेतन्याहू की सरकार और अमेरिका के बीच संबंधों का भविष्य भी चुनावी परिणामों तथा दोनों देशों की आगे की नीतियों से प्रभावित हो सकता है। विशेष रूप से ईरान को लेकर तनाव,क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य सहयोग जैसे मुद्दे दोनों देशों के लिए अहम बने रहेंगे।

कुल मिलाकर,अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली चुनाव से पहले नेतन्याहू के पक्ष में स्पष्ट समर्थन जताते हुए अपनी साझा रणनीतिक उपलब्धियों का उल्लेख किया है। उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाइयों को भी अपने बयान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। अब यह देखना अहम होगा कि इसराइल के मतदाता इस अपील को किस तरह लेते हैं और चुनाव के बाद देश की राजनीतिक दिशा तथा अमेरिका के साथ उसके संबंधों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।