जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स (तस्वीर क्रेडिट@TNPNEWS1)

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स, खुलते ही दो घंटे में हुआ पूरी तरह सब्सक्राइब,जानें निवेश की रकम और आगे की रणनीति

नई दिल्ली,22 अक्टूबर (युआईटीवी)- जियो प्लेटफॉर्म्स के बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ को शेयर बाजार में निवेशकों की ओर से शानदार प्रतिक्रिया मिली है। कंपनी का आईपीओ खुलने के कुछ ही समय के भीतर पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। शुरुआती दो घंटों में ही निवेशकों की ओर से इतनी बोलियाँ आ गईं कि यह 10,000 करोड़ रुपये से अधिक आकार वाले बड़े आईपीओ की श्रेणी में सबसे तेजी से पूरी तरह सब्सक्राइब होने वाले निर्गमों में शामिल हो गया। इस प्रतिक्रिया से बाजार में जियो प्लेटफॉर्म्स को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालाँकि,शुरुआती माँग के आधार पर किसी शेयर के लिस्टिंग प्रदर्शन या भविष्य में मिलने वाले रिटर्न की गारंटी नहीं मानी जा सकती।

कंपनी ने आईपीओ के लिए प्रति शेयर 1,065 रुपये से 1,119 रुपये का मूल्य दायरा तय किया है। निवेशक इसी दायरे में शेयर खरीदने के लिए बोली लगा सकते हैं। आईपीओ में आवेदन करने की अंतिम तारीख शुक्रवार, 23 अक्टूबर बताई गई है। कंपनी के इस निर्गम पर घरेलू संस्थागत निवेशकों के साथ-साथ खुदरा निवेशकों की भी नजर बनी हुई है। जियो प्लेटफॉर्म्स के कारोबार,बड़े ग्राहक आधार और डिजिटल सेवाओं में उसकी मौजूदगी को इस पेशकश के प्रति आकर्षण की प्रमुख वजहों के रूप में देखा जा रहा है।

आईपीओ खुलने के बाद निवेशकों ने तेजी से बोली लगाई। उपलब्ध आँकड़ों के मुताबिक, सुबह 10 बजकर 45 मिनट तक यानी बोली शुरू होने के लगभग 100 मिनट के भीतर ही इश्यू के तहत उपलब्ध शेयरों के बराबर बोलियाँ प्राप्त हो गई थीं। इस समय तक कुल सब्सक्रिप्शन करीब 101 प्रतिशत पहुँच गया था। इसके बाद भी निवेशकों की माँग और आवेदन प्रक्रिया पर बाजार की नजर बनी रही।

इस शुरुआती तेजी में सबसे बड़ी भूमिका योग्य संस्थागत खरीदारों की रही। इनके लिए आरक्षित शेयरों के मुकाबले करीब 3.25 गुना बोलियाँ प्राप्त हुईं। इससे संकेत मिलता है कि बड़े संस्थागत निवेशकों ने निर्गम में विशेष रुचि दिखाई। हालाँकि,निवेशकों की दूसरी श्रेणियों की भागीदारी उस समय अपेक्षाकृत कम रही।

गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में निर्धारित हिस्से के मुकाबले लगभग 27 प्रतिशत सब्सक्रिप्शन दर्ज किया गया,जबकि खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित शेयरों में करीब 24 प्रतिशत के बराबर बोलियां मिलीं। इस तरह शुरुआती चरण में संस्थागत माँग ने आईपीओ को पूरी तरह सब्सक्राइब कराने में अहम योगदान दिया। आगे की बोली प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग श्रेणियों में माँग में बदलाव हो सकता है।

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में निवेश करने से पहले निवेशकों के लिए न्यूनतम आवेदन राशि और शेयरों की संख्या समझना जरूरी है। कंपनी के प्रॉस्पेक्टस के अनुसार, एक लॉट में 12 शेयर रखे गए हैं। इसका मतलब है कि निवेशक को कम से कम 12 शेयरों के लिए आवेदन करना होगा। ऊपरी मूल्य सीमा 1,119 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से न्यूनतम आवेदन राशि 13,428 रुपये बनती है।

निवेशकों को शेयरों के लिए 12 के गुणक में ही बोली लगानी होगी। यानी एक लॉट के लिए 12 शेयर, दो लॉट के लिए 24 शेयर और तीन लॉट के लिए 36 शेयरों का आवेदन किया जा सकता है। इसी तरह 48 या 60 शेयरों के लिए भी बोली लगाई जा सकती है। आवेदन करते समय निवेशकों को अपने बजट,निवेश अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता का ध्यान रखना चाहिए।

आईपीओ में निवेश करने का निर्णय केवल इस आधार पर नहीं लेना चाहिए कि निर्गम तेजी से सब्सक्राइब हो गया है। कंपनी की वित्तीय स्थिति,कारोबार की संभावनाएँ,प्रतिस्पर्धा,मूल्यांकन और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जैसे पहलुओं को समझना भी जरूरी है। आईपीओ में आवंटन मिलने के बाद शेयरों की कीमत बाजार की परिस्थितियों के अनुसार ऊपर या नीचे जा सकती है।

जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने सार्वजनिक निर्गम के जरिए कुल 30,213 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई है। इस पेशकश में नए इक्विटी शेयर जारी किए जा रहे हैं। कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक,इसके तहत 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए जाने हैं। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से शेयर बेचने वाला ऑफर-फॉर-सेल शामिल नहीं है।

इसका अर्थ है कि निर्गम से मिलने वाली राशि कंपनी को प्राप्त होगी और उसका इस्तेमाल निर्धारित कारोबारी उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। कंपनी की योजना इस रकम के एक हिस्से का उपयोग अपनी सहायक कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कुछ बकाया कर्ज को चुकाने में करने की है। इसके अलावा,राशि का इस्तेमाल सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए भी किया जाएगा।

कर्ज चुकाने से सहायक कंपनी पर वित्तीय दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। इससे समूह की वित्तीय स्थिति और नकदी प्रबंधन को बेहतर बनाने की संभावना भी पैदा होती है। हालाँकि,इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि जुटाई गई राशि का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है और भविष्य में कंपनी का कारोबार किस गति से बढ़ता है।

सार्वजनिक निर्गम खुलने से पहले जियो प्लेटफॉर्म्स ने एंकर निवेशकों से 8,110 करोड़ रुपये जुटाए। कंपनी ने 212 एंकर निवेशकों को 1,119 रुपये प्रति शेयर के भाव पर कुल 7,24,74,066 इक्विटी शेयर आवंटित किए। एंकर निवेशक वे बड़े संस्थागत निवेशक होते हैं जिन्हें आईपीओ खुलने से पहले निर्धारित नियमों के तहत शेयर आवंटित किए जाते हैं।

कंपनी की एंकर बुक में घरेलू म्यूचुअल फंड कंपनियों, जीवन बीमा कंपनियों, पेंशन फंड और अंतर्राष्ट्रीय निवेश कोषों की भागीदारी रही। इसमें 25 घरेलू म्यूचुअल फंड हाउस, 22 जीवन बीमा कंपनियाँ और पेंशन फंड तथा 85 वैश्विक फंड शामिल बताए गए। एंकर बुक को कुल मिलाकर 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संस्थागत माँग मिली।

इस मजबूत माँग को कंपनी के प्रति बड़े निवेशकों के भरोसे के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालाँकि,एंकर निवेशकों की भागीदारी को भविष्य में शेयर के प्रदर्शन की निश्चित गारंटी नहीं माना जा सकता। निवेशकों को कंपनी के कारोबार और वित्तीय आँकड़ों के आधार पर अपना निर्णय लेना चाहिए।

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को लेकर कई ब्रोकरेज और वित्तीय सलाहकार कंपनियों ने सकारात्मक रुख दिखाया है। मोतीलाल ओसवाल ने निर्गम को सब्सक्राइब करने की सलाह दी है। एमके ग्लोबल ने भी निवेशकों को इसमें निवेश पर विचार करने की सिफारिश की है। वेंचुरा सिक्योरिटीज और केडिया एडवाइजरी ने कंपनी की दीर्घकालिक कारोबारी संभावनाओं को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया है।

कोलकाता स्थित वित्तीय फर्म एसएमआईएफएस लिमिटेड ने भी अपनी शोध रिपोर्ट में आईपीओ को सब्सक्राइब करने की रेटिंग दी है। फर्म के अनुसार,जियो प्लेटफॉर्म्स का व्यापक नेटवर्क,बड़ी संख्या में ग्राहक और तकनीकी क्षमताएँ उसे बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करती हैं।

एसएमआईएफएस की रिपोर्ट में कंपनी के 533 मिलियन से अधिक ग्राहकों के आधार को भी महत्वपूर्ण ताकत बताया गया है। इतने बड़े ग्राहक आधार के जरिए कंपनी अपनी डिजिटल सेवाओं का विस्तार कर सकती है और विभिन्न प्रकार के डिजिटल उत्पादों तथा समाधानों को अधिक लोगों तक पहुँचा सकती है। हालाँकि,बाजार में प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों को बनाए रखने की लागत भविष्य के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।

जियो प्लेटफॉर्म्स की स्थापना 2019 में हुई थी। मुंबई स्थित यह प्रौद्योगिकी कंपनी डिजिटल कनेक्टिविटी,डिजिटल सेवाओं और तकनीक आधारित समाधानों पर ध्यान केंद्रित करती है। कंपनी ने देश में विभिन्न आय वर्ग के लोगों और व्यवसायों तक डिजिटल सेवाएँ पहुँचाने के लिए अपना कनेक्टिविटी नेटवर्क और तकनीकी ढाँचा विकसित किया है।

भारत में डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल से इस क्षेत्र में कारोबार के विस्तार की संभावनाएँ बनी हुई हैं। इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीक आधारित सेवाओं की बढ़ती माँग कंपनी के लिए अवसर पैदा कर सकती है। दूसरी ओर,प्रतिस्पर्धी कंपनियों से मुकाबला,नेटवर्क और तकनीक पर लगातार निवेश की जरूरत तथा वित्तीय दायित्व इसके सामने महत्वपूर्ण चुनौतियाँ भी हैं।

कंपनी के आईपीओ से प्राप्त रकम का इस्तेमाल सहायक कंपनी के कुछ कर्ज चुकाने में किया जाना निवेशकों के लिए एक अहम पहलू है। इससे वित्तीय ढाँचे को मजबूत करने और भविष्य में नकदी प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। फिर भी,निवेशकों को कंपनी के मूल्यांकन,आय बढ़ने की संभावनाओं और जोखिमों का आकलन करना चाहिए।

कुल मिलाकर,जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को शुरुआती चरण में मिली मजबूत प्रतिक्रिया ने इसे बाजार के प्रमुख निर्गमों में ला खड़ा किया है। संस्थागत निवेशकों की भारी माँग,एंकर निवेशकों से जुटाई गई बड़ी रकम और ब्रोकरेज कंपनियों की सकारात्मक राय ने इस पेशकश को चर्चा में रखा है। अब निवेशकों की नजर अंतिम दिन तक मिलने वाली बोलियों,शेयर आवंटन और बाजार में संभावित सूचीबद्धता पर रहेगी। हालाँकि, मजबूत सब्सक्रिप्शन अपने आप में मुनाफे की गारंटी नहीं है,इसलिए निवेश से पहले सभी उपलब्ध जानकारियों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना जरूरी है।