कोच्चि,27 फरवरी (युआईटीवी)- केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को बहुचर्चित फिल्म ‘केरल स्टोरी 2’ की रिलीज पर 15 दिनों की अंतरिम रोक लगा दी है। यह फिल्म 27 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी,लेकिन अदालत के आदेश के बाद फिलहाल इसे बड़े पर्दे पर नहीं लाया जा सकेगा। अदालत ने यह फैसला फिल्म के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया,जिनमें आरोप लगाया गया था कि फिल्म का विषय और उसका प्रस्तुतिकरण समाज में सांप्रदायिक तनाव पैदा कर सकता है और सार्वजनिक शांति को प्रभावित कर सकता है।
अदालत ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि मामले की गहन सुनवाई आवश्यक है और तब तक एहतियातन फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई जाती है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक,अगले 15 दिनों तक फिल्म किसी भी थिएटर में प्रदर्शित नहीं की जा सकेगी। यह निर्णय फिल्म के निर्माताओं के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है,क्योंकि रिलीज से पहले देश के कई हिस्सों में एडवांस बुकिंग शुरू हो चुकी थी। अब इस रोक के कारण टिकट रद्द करने और दर्शकों को पैसे लौटाने की स्थिति बन सकती है, जिससे आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
‘केरल स्टोरी 2’ का निर्माण विपुल अमृतलाल शाह के बैनर तले हुआ है। फिल्म का टीजर 30 जनवरी को जारी किया गया था और उसी समय से यह विवादों में घिर गई थी। टीजर में तीन हिंदू लड़कियों—उल्का गुप्ता,ऐश्वर्या ओझा और अदिति भाटिया की कहानी दिखाई गई है,जिनके जीवन में प्रेम संबंधों के बाद कथित धर्म परिवर्तन की साजिश का खुलासा होता है। टीजर में लड़कियाँ हिजाब पहने अपने अनुभव साझा करती नजर आती हैं और अंत में “अब सहेंगे नहीं… लड़ेंगे” का नारा सुनाई देता है। इस प्रस्तुति को लेकर कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने आपत्ति जताई थी।
फिल्म के विरोध में दायर याचिकाओं में कहा गया कि इसकी कहानी और दृश्यांकन समाज में विभाजनकारी संदेश दे सकते हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि फिल्म के माध्यम से एक विशेष समुदाय के खिलाफ नकारात्मक धारणा बनाई जा रही है,जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। अदालत ने इन आशंकाओं को नज़रअंदाज़ नहीं किया और कहा कि जब तक सभी पक्षों की दलीलें विस्तार से नहीं सुनी जातीं,तब तक फिल्म की रिलीज रोकना उचित होगा।
फिल्म को लेकर केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने भी कड़ा विरोध जताया था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फिल्म को “प्रोपेगेंडा” करार देते हुए इसे राज्य की धर्मनिरपेक्ष छवि पर हमला बताया। विजयन ने लिखा था कि नफरत फैलाने वाली फिल्मों के सीक्वल को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और समाज को ऐसे प्रयासों का बहिष्कार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पहले भाग में दिखाए गए कथित सांप्रदायिक एजेंडे और तथ्यों की सत्यता पर पहले ही सवाल उठ चुके हैं,इसलिए राज्य को फिर से ऐसी कोशिशों का विरोध करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी जोड़ा कि कला की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए,लेकिन यदि किसी रचना का उद्देश्य समाज में विभाजन पैदा करना हो,तो उसे चुनौती देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि केरल की पहचान सद्भाव और धर्मनिरपेक्षता की रही है और इसे किसी भी तरह से धूमिल नहीं होने दिया जाएगा।
फिल्म के समर्थकों का कहना है कि यह एक काल्पनिक कथा है और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में देखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि फिल्म सामाजिक मुद्दों को उजागर करती है और इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। वहीं,विरोध करने वाले समूहों का कहना है कि फिल्म की विषयवस्तु संवेदनशील है और इससे सामाजिक सौहार्द पर असर पड़ सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में अदालतें अक्सर संतुलित दृष्टिकोण अपनाती हैं। एक ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है,तो दूसरी ओर सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है। अंतरिम रोक का मतलब यह नहीं है कि फिल्म पर स्थायी प्रतिबंध लग गया है,बल्कि यह एक अस्थायी कदम है,ताकि सभी पक्षों की बात सुनने के बाद अंतिम निर्णय लिया जा सके।
फिल्म इंडस्ट्री में भी इस फैसले को लेकर चर्चा तेज है। कई निर्माता और निर्देशक इसे रचनात्मक स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा मान रहे हैं,जबकि कुछ का मानना है कि संवेदनशील विषयों पर काम करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। इस बीच,सिनेमाघर संचालकों और वितरकों को भी असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
अब सबकी नजर अगली सुनवाई पर टिकी है,जहाँ अदालत दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुनेगी। यदि अदालत को लगे कि फिल्म में कोई ऐसा तत्व नहीं है,जो सार्वजनिक शांति को प्रभावित करे,तो संभव है कि रिलीज की अनुमति मिल जाए। फिलहाल,‘केरल स्टोरी 2’ की रिलीज पर लगा यह 15 दिन का ब्रेक फिल्म से जुड़े सभी पक्षों के लिए अनिश्चितता का दौर लेकर आया है।
यह मामला एक बार फिर इस बहस को सामने ले आया है कि कला,अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे कायम रखा जाए। आने वाले दिनों में अदालत का रुख तय करेगा कि यह फिल्म सिनेमाघरों तक पहुँचेगी या नहीं,लेकिन फिलहाल विवाद और कानूनी प्रक्रिया के चलते इसकी रिलीज पर विराम लग चुका है।
