चेन्नई,27 फरवरी (युआईटीवी)- टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 चरण में गुरुवार को चेन्नई के ऐतिहासिक एमए चिदंबरम स्टेडियम में भारत ने जिम्बाब्वे के खिलाफ 72 रन से शानदार जीत दर्ज कर अपनी सेमीफाइनल की उम्मीदों को जिंदा रखा। इस जीत ने न केवल टीम इंडिया के आत्मविश्वास को नई ऊँचाई दी,बल्कि ग्रुप-1 के समीकरण भी बदल दिए। इस परिणाम के साथ दक्षिण अफ़्रीका ने नॉकआउट चरण में अपनी जगह पक्की कर ली,जबकि जिम्बाब्वे की टीम सुपर-8 में लगातार दो हार के बाद खिताबी दौड़ से बाहर हो गई।
ग्रुप-1 की अंकतालिका पर नजर डालें तो साउथ अफ्रीका दो में दो जीत और +2.890 के बेहतरीन नेट रन रेट के साथ शीर्ष पर है। वेस्ट इंडीज एक जीत और एक हार के साथ +1.791 नेट रन रेट लेकर दूसरे स्थान पर है। भारत ने दो में से एक मुकाबला जीतकर -0.100 नेट रन रेट के साथ तीसरा स्थान हासिल किया है,जिससे आगामी मुकाबले उसके लिए करो या मरो जैसे हो गए हैं। जिम्बाब्वे की टीम शुरुआती दोनों मैच हारने के बाद टूर्नामेंट से लगभग बाहर हो चुकी है।
टॉस गंवाकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने आक्रामक अंदाज में खेलते हुए चार विकेट पर 256 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया,जो टी20 वर्ल्ड कप इतिहास के सबसे बड़े स्कोरों में से एक है। शुरुआत से ही भारतीय बल्लेबाजों ने संकेत दे दिए थे कि वे विपक्षी गेंदबाजों को कोई मौका नहीं देने वाले। सलामी बल्लेबाज संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा ने मात्र 3.4 ओवर में 48 रन जोड़कर जिम्बाब्वे के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। सैमसन ने 15 गेंदों पर 24 रन की तेज पारी खेली,जिसमें तीन आकर्षक चौके शामिल थे। हालाँकि,वह ज्यादा देर टिक नहीं सके,लेकिन उन्होंने टीम को विस्फोटक शुरुआत दिला दी।
सैमसन के आउट होने के बाद ईशान किशन क्रीज पर आए और उन्होंने अभिषेक शर्मा के साथ दूसरे विकेट के लिए 42 गेंदों में 72 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। इस दौरान दोनों बल्लेबाजों ने बेहतरीन टाइमिंग और आक्रामक शॉट्स का प्रदर्शन किया। ईशान ने 24 गेंदों में 38 रन बनाए,जबकि अभिषेक शर्मा ने मात्र 30 गेंदों पर 55 रन की शानदार पारी खेली। उनकी पारी में चार छक्के और चार चौके शामिल थे,जिसने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने भी 33 रन का उपयोगी योगदान दिया और मध्यक्रम को स्थिरता प्रदान की।
14.5 ओवर तक भारत का स्कोर चार विकेट पर 172 रन था। ऐसा लग रहा था कि टीम 220-230 तक पहुँचेगी,लेकिन इसके बाद हार्दिक पंड्या और तिलक वर्मा ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। दोनों ने 31 गेंदों में 84 रन की अटूट साझेदारी कर जिम्बाब्वे के गेंदबाजों की धज्जियाँ उड़ा दीं। हार्दिक पंड्या ने कप्तानी जिम्मेदारी के अनुरूप खेलते हुए 23 गेंदों पर नाबाद 50 रन बनाए,जिसमें चार छक्के और दो चौके शामिल थे। तिलक वर्मा ने भी 16 गेंदों में नाबाद 44 रन ठोक दिए,जिसमें चार छक्के और तीन चौके शामिल रहे। अंतिम ओवरों में इस जोड़ी की तूफानी बल्लेबाजी ने भारत को 256 रन के विशाल स्कोर तक पहुंचा दिया।
जिम्बाब्वे की ओर से रिचर्ड नगारवा,ब्लेसिंग मुजरबानी,टिनोटेंडा मापोसा और सिकंदर रजा को एक-एक विकेट मिला,लेकिन वे भारतीय बल्लेबाजों के आक्रामक तेवर के सामने बेबस नजर आए। विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम ने भी साहसिक शुरुआत की। ब्रायन बेनेट और तदिवानाशे मारुमानी ने पहले विकेट के लिए 44 रन जोड़े। मारुमानी 20 रन बनाकर आउट हो गए,लेकिन बेनेट ने आक्रामक रुख बनाए रखा।
बेनेट ने डायोन मायर्स के साथ दूसरे विकेट के लिए 28 रन जोड़े,हालाँकि मायर्स सिर्फ 6 रन ही बना सके। इसके बाद जिम्बाब्वे का मध्यक्रम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं पाया। भारतीय तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 24 रन देकर तीन विकेट झटके और विपक्षी बल्लेबाजी क्रम को झकझोर दिया। वरुण चक्रवर्ती,अक्षर पटेल और शिवम दुबे ने भी एक-एक विकेट हासिल किया।
हालाँकि,ब्रायन बेनेट अंत तक डटे रहे और उन्होंने 59 गेंदों में नाबाद 97 रन की जुझारू पारी खेली, जिसमें छह छक्के और आठ चौके शामिल थे। उन्होंने आखिरी दम तक संघर्ष किया,लेकिन लक्ष्य इतना बड़ा था कि उनकी शानदार पारी भी टीम को जीत नहीं दिला सकी। जिम्बाब्वे की टीम निर्धारित 20 ओवर में छह विकेट पर 184 रन ही बना सकी और भारत ने मुकाबला 72 रन से अपने नाम कर लिया।
भारतीय गेंदबाजी में जहाँ अर्शदीप ने किफायती और प्रभावी स्पेल डाला,वहीं शिवम दुबे का दिन महँगा रहा। उन्होंने दो ओवर में 46 रन लुटा दिए,जो मैच का सबसे महँगा स्पेल साबित हुआ। बावजूद इसके,टीम की समग्र गेंदबाजी प्रदर्शन ने जीत सुनिश्चित की।
इस जीत से भारतीय टीम का मनोबल काफी ऊँचा हुआ है। बल्लेबाजी क्रम की गहराई और अंतिम ओवरों में आक्रामकता ने यह दिखा दिया कि टीम किसी भी बड़े लक्ष्य को खड़ा करने की क्षमता रखती है। हार्दिक पंड्या और तिलक वर्मा की साझेदारी ने संकेत दिया कि निचला क्रम भी मैच जिताने का दम रखता है। वहीं,अर्शदीप सिंह की धारदार गेंदबाजी ने यह साबित किया कि दबाव के क्षणों में टीम के पास विश्वसनीय विकल्प मौजूद हैं।
अब भारत की नजरें अपने अगले सुपर-8 मुकाबले पर होंगी,जहाँ जीत उसके लिए अनिवार्य होगी। नेट रन रेट में सुधार भी अहम होगा,क्योंकि ग्रुप-1 में मुकाबला बेहद कड़ा है। साउथ अफ्रीका पहले ही मजबूत स्थिति में है और वेस्टइंडीज भी दावेदारी पेश कर रहा है। ऐसे में भारत को न केवल जीत दर्ज करनी होगी,बल्कि बड़े अंतर से जीतने की रणनीति भी अपनानी होगी।
चेन्नई में मिली यह जीत भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए उत्साह से भरी रही। दर्शकों ने बल्लेबाजों के चौके-छक्कों और गेंदबाजों की धारदार गेंदों का जमकर आनंद लिया। टीम इंडिया ने यह साबित कर दिया है कि वह टूर्नामेंट में अब भी खिताब की प्रबल दावेदार है। आने वाले मुकाबले तय करेंगे कि यह जीत महज एक यादगार प्रदर्शन साबित होती है या भारत की सेमीफाइनल की राह का निर्णायक मोड़ बनती है। फिलहाल,टीम इंडिया ने यह संदेश जरूर दे दिया है कि वह आखिरी दम तक लड़ने को तैयार है।
