अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग (तस्वीर क्रेडिट@maliniawasthi)

किम जोंग उन के पास बड़ा परमाणु भंडार,ट्रंप बोले- जब तक मैं हूँ,वह ठीक रहेंगे

वाशिंगटन,30 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का जिक्र करते हुए कहा है कि उत्तर कोरियाई नेता के पास काफी बड़ा परमाणु हथियार भंडार है। ट्रंप ने दावा किया कि जब तक वह अमेरिकी राष्ट्रपति पद पर हैं,तब तक किम जोंग उन के साथ स्थिति नियंत्रण में रहेगी। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि उत्तर कोरियाई नेता उनका सम्मान करते हैं और उन्हें पसंद करते हैं।

ट्रंप ने यह टिप्पणी मंगलवार को व्हाइट हाउस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान की। उनसे सवाल किया गया था कि जब अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने की बात करता है,तब उत्तर कोरिया के पास पहले से मौजूद परमाणु हथियारों को लेकर उनका रुख क्या है। इसी सवाल के जवाब में ट्रंप ने उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और किम जोंग उन के साथ अपने संबंधों का उल्लेख किया।

ट्रंप ने कहा कि किम जोंग उन के पास काफी बड़ी परमाणु क्षमता वाला भंडार है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक वह स्वयं पद पर हैं,तब तक किम जोंग उन ठीक रहेंगे। ट्रंप ने इसके पीछे दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत संबंधों को कारण बताया। हालाँकि,उन्होंने उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों की संख्या या उसके परमाणु भंडार का कोई सटीक आँकड़ा नहीं दिया।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगियों की चिंता लगातार बनी हुई है। उत्तर कोरिया लंबे समय से परमाणु हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास को अपनी सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता रहा है। किम जोंग उन के नेतृत्व में देश ने अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। उत्तर कोरिया का कहना रहा है कि उसकी सैन्य क्षमताएं देश की सुरक्षा और बाहरी खतरों से निपटने के लिए जरूरी हैं।

उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की नीति लंबे समय से महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दा रही है। वाशिंगटन और उसके सहयोगी देश उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों तथा लंबी दूरी की मिसाइल क्षमताओं को लेकर चिंता जताते रहे हैं। दूसरी ओर, प्योंगयांग अपने परमाणु कार्यक्रम को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और शासन की रक्षा से जोड़ता रहा है।

ट्रंप और किम जोंग उन के बीच पहले भी कई दौर की व्यक्तिगत कूटनीति हो चुकी है। दोनों नेताओं के बीच 2018 में सिंगापुर में ऐतिहासिक मुलाकात हुई थी। इसके बाद 2019 में वियतनाम के हनोई में दोनों नेताओं की बैठक हुई। उसी वर्ष दोनों की मुलाकात कोरियाई प्रायद्वीप के असैन्य क्षेत्र में भी हुई थी। इन बैठकों ने अमेरिका और उत्तर कोरिया के संबंधों में व्यक्तिगत कूटनीति के एक अलग दौर की शुरुआत की थी।

हालाँकि,ट्रंप और किम के बीच हुई पिछली वार्ताओं के बावजूद उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने की दिशा में कोई व्यापक समझौता नहीं हो सका। दोनों देशों के बीच परमाणु निरस्त्रीकरण, प्रतिबंधों और सुरक्षा गारंटी जैसे मुद्दों पर मतभेद बने रहे। इसके बाद भी ट्रंप कई मौकों पर किम जोंग उन के साथ अपने संबंधों को सकारात्मक तरीके से पेश करते रहे हैं।

ताजा बयान में भी ट्रंप ने उत्तर कोरियाई नेता के साथ अपने व्यक्तिगत समीकरण को प्रमुखता दी। उन्होंने कहा कि किम उनका सम्मान करते हैं और उन्हें पसंद करते हैं। ट्रंप की टिप्पणी से यह संकेत मिलता है कि वह उत्तर कोरिया के संदर्भ में व्यक्तिगत कूटनीति को अब भी महत्व देते हैं। हालाँकि,उनके बयान में किम जोंग उन के साथ किसी नई बैठक,वार्ता या आगामी कूटनीतिक पहल की घोषणा नहीं की गई।

ट्रंप ने उत्तर कोरिया के परमाणु भंडार का केवल व्यापक रूप से उल्लेख किया और उसकी वास्तविक संख्या बताने से परहेज किया। उत्तर कोरिया के पास मौजूद परमाणु हथियारों की सटीक संख्या सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है और अलग-अलग आकलनों में अलग-अलग अनुमान सामने आते रहे हैं। ऐसे में ट्रंप का बयान उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता के आकार को लेकर एक सामान्य टिप्पणी के तौर पर सामने आया है।

ईरान और उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों के संदर्भ में ट्रंप की टिप्पणी अमेरिकी परमाणु नीति को लेकर भी सवाल खड़े करती है। जहाँ अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने की नीति पर जोर देता रहा है,वहीं उत्तर कोरिया पहले से परमाणु हथियार रखने वाला देश है। ट्रंप ने अपने जवाब में दोनों मामलों की विस्तृत नीति की व्याख्या नहीं की,बल्कि किम जोंग उन के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को प्रमुखता दी।

इस बयान के बाद भी उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल विकास और अमेरिका के साथ उसके भविष्य के संबंधों को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। फिलहाल ट्रंप ने किम जोंग उन के साथ किसी नई वार्ता या मुलाकात की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में उनके ताजा बयान को दोनों नेताओं के पुराने व्यक्तिगत संबंधों के संदर्भ में देखा जा रहा है।