मुंबई,12 अगस्त (युआईटीवी)- मुंबई के कुर्ला पश्चिम इलाके के अशोक नगर स्थित टेकड़ी क्रमांक तीन में बुधवार सुबह भूस्खलन की दर्दनाक घटना सामने आई। पहाड़ी ढलान से मिट्टी और मलबे का बड़ा हिस्सा नीचे चॉल क्षेत्र में बने दो से तीन घरों पर जा गिरा। अचानक हुए इस हादसे से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मलबे की चपेट में आने से कई लोग दब गए। मुंबई पुलिस के अनुसार,हादसे में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है,जबकि कुछ लोग घायल बताए जा रहे हैं। मलबे में अभी भी लोगों के दबे होने की आशंका है और उन्हें बाहर निकालने के लिए बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और आपदा राहत एजेंसियाँ सक्रिय हो गईं। बृहन्मुंबई महानगरपालिका,मुंबई अग्निशमन दल, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल,मुंबई पुलिस,एंबुलेंस और अन्य संबंधित एजेंसियों के अधिकारी तथा कर्मचारी मौके पर पहुँच गए। राहत एवं बचाव दल मलबे को सावधानीपूर्वक हटाकर उसके नीचे फँसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। संकरी जगह और सीमित रास्ते के कारण बचाव अभियान में काफी मुश्किलें आ रही हैं।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका के अनुसार, घटनास्थल तक पहुँचने वाला रास्ता बेहद संकरा है। हालात ऐसे हैं कि वहाँ एक समय में केवल एक व्यक्ति ही आगे बढ़ सकता है। ऐसे में भारी मशीनरी और बचाव उपकरणों को घटनास्थल तक पहुँचाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इसके बावजूद बचाव दल लगातार मलबा हटाने और फँसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से पूरे अभियान की निगरानी की जा रही है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद मुंबई की महापौर रितू तावडे भी घटनास्थल पर पहुँचीं। उन्होंने मौके पर चल रहे राहत एवं बचाव कार्य का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। महापौर ने अधिकारियों और विभिन्न एजेंसियों के साथ स्थिति की जानकारी ली तथा बचाव अभियान को तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से बेहतर समन्वय के साथ काम करने को कहा,ताकि मलबे में फँसे लोगों को जल्द-से-जल्द बाहर निकाला जा सके।
महापौर ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि दुर्घटना में मृत प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को तत्काल चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं,घायल प्रत्येक व्यक्ति को इलाज के लिए 50 हजार रुपये की चिकित्सा सहायता देने की घोषणा की गई है। प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया है।
घटनास्थल पर प्रभाग समिति अध्यक्ष विजयेंद्र शिंदे,अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त पूर्व उपनगर डॉ. अविनाश ढाकणे,एल विभाग के सहायक आयुक्त प्रभारी अनिल जाधव समेत संबंधित अधिकारी मौजूद हैं। प्रशासनिक अधिकारी राहत एवं बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं और मौके की स्थिति के आधार पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
हादसे में अब तक जिन मृतकों की पहचान हुई है,उनमें 28 वर्षीय साहिल अंसारी और 14 वर्षीय मोहम्मद समीर शामिल हैं। वहीं,घायल सोहेल अंसारी की उम्र 18 वर्ष और मोहम्मद अंसारी की उम्र 14 वर्ष बताई गई है। दोनों घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। प्रशासन की ओर से मृतकों और घायलों की संख्या तथा पहचान से जुड़ी जानकारी की लगातार पुष्टि की जा रही है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि भूस्खलन अचानक हुआ और कुछ ही समय में पहाड़ी से मिट्टी और मलबा नीचे बने घरों पर आ गिरा। इससे प्रभावित मकानों में मौजूद लोगों को सँभलने तक का मौका नहीं मिला। हादसे के बाद स्थानीय निवासी भी बचाव कार्य में जुट गए और उन्होंने मलबे में फँसे लोगों को निकालने में सरकारी एजेंसियों की मदद की।
भूस्खलन के चश्मदीद गवाह सचिन कांबले ने घटना को लेकर बताया कि उन्हें पहाड़ी गिरने की सूचना कुछ लोगों से मिली थी। जानकारी मिलने के बाद वह अपने दोस्तों के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। वहाँ उन्होंने देखा कि कई लोग मलबे में फँसे हुए थे। स्थानीय लोगों ने मिलकर तत्काल बचाव का प्रयास शुरू किया और चार लोगों को बाहर निकाला। इनमें दो लोगों की मौत हो चुकी थी,जबकि दो लोग घायल थे। घायलों को इलाज के लिए राजावाड़ी अस्पताल भेजा गया।
सचिन कांबले के अनुसार,मलबे के नीचे अभी भी कई लोगों के फँसे होने की आशंका थी। उन्होंने बताया कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका बड़े स्तर पर बचाव अभियान चला रही थी और पुलिस का अमला भी घटनास्थल पर मौजूद था। स्थानीय लोगों ने भी राहत कार्य में सहयोग किया और बचाव दलों को घटनास्थल तक पहुँचने ने में मदद की।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे में फँसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। पहाड़ी क्षेत्र में मलबा हटाने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है,क्योंकि किसी भी तरह की जल्दबाजी से दबे हुए लोगों को नुकसान पहुँचने का खतरा हो सकता है। संकरे रास्ते की वजह से बचाव उपकरणों और संसाधनों को घटनास्थल तक पहुँचाना भी कठिन है। इसके बावजूद राहत दल लगातार अभियान चला रहे हैं।
मुंबई जैसे घनी आबादी वाले महानगर में पहाड़ी ढलानों और चॉल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए मानसून के दौरान भूस्खलन का खतरा लगातार बना रहता है। भारी बारिश के कारण मिट्टी की पकड़ कमजोर होने पर पहाड़ी ढलानों से मलबा नीचे की ओर खिसक सकता है। ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए प्रशासन की ओर से समय-समय पर सावधानी बरतने की अपील की जाती है। मौजूदा हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में बसे रिहायशी इलाकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान बचाव अभियान पर केंद्रित है। मलबे में दबे लोगों की तलाश के लिए अग्निशमन दल,राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल,महानगरपालिका के कर्मचारी,पुलिसकर्मी और अन्य एजेंसियाँ लगातार काम कर रही हैं। एंबुलेंस को भी मौके पर तैनात रखा गया है,ताकि किसी व्यक्ति को मलबे से बाहर निकालने के बाद तत्काल चिकित्सा सहायता दी जा सके।
हादसे के बाद इलाके में मातम और चिंता का माहौल है। प्रभावित परिवार अपने परिजनों के सुरक्षित बाहर आने की उम्मीद लगाए हुए हैं। स्थानीय लोग भी बचाव दलों के साथ लगातार सहयोग कर रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से घटनास्थल के आसपास अनावश्यक भीड़ न लगाने और बचाव अभियान में बाधा नहीं डालने की अपील की है।
बुधवार सुबह हुई इस घटना ने मुंबई में मानसून के दौरान पहाड़ी इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। चार लोगों की मौत की पुष्टि के बाद अब प्राथमिकता मलबे में फँसे बाकी लोगों को सुरक्षित निकालने की है। प्रशासन की ओर से राहत,बचाव और चिकित्सा व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है। आने वाले घंटों में मलबे से और लोगों के बाहर निकलने तथा हादसे से जुड़े नुकसान की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
