नई दिल्ली,26 सितंबर (युआईटीवी)- एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया लिमिटेड को कस्टम अधिकारियों की ओर से 153.58 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी की माँग को लेकर कारण बताओ नोटिस मिला है। कंपनी के अनुसार,यह मामला कुछ आयातित सामान के मूल्यांकन योग्य मूल्य में रॉयल्टी भुगतान को शामिल नहीं किए जाने के आरोप से जुड़ा है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि यह नोटिस राजस्व खुफिया निदेशालय की जाँच के बाद जारी किया गया है। मामले में कंपनी से संबंधित आयात पर देय शुल्क को लेकर स्पष्टीकरण माँगा गया है।
कंपनी को मिला कारण बताओ नोटिस 22 सितंबर की तारीख का है और इसे नवी मुंबई स्थित न्हावा शेवा बंदरगाह के कस्टम आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी किया गया है। एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया को यह नोटिस 24 सितंबर को प्राप्त हुआ। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि कुछ आयातित सामान के कस्टम मूल्य का निर्धारण करते समय संबंधित रॉयल्टी भुगतान को मूल्यांकन योग्य मूल्य में शामिल नहीं किया गया। इसी आधार पर 153.58 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी की मांग की गई है।
कस्टम मामलों में किसी आयातित वस्तु पर शुल्क तय करने के लिए उसके मूल्यांकन योग्य मूल्य का महत्व होता है। इसमें सामान्य तौर पर वस्तु की कीमत के साथ बीमा और माल ढुलाई जैसे खर्च भी शामिल होते हैं। मौजूदा मामले में विवाद इस बात को लेकर है कि कुछ आयातित सामान से संबंधित रॉयल्टी भुगतान को भी इस मूल्य में जोड़ा जाना चाहिए था या नहीं। राजस्व खुफिया निदेशालय की जांच के बाद कस्टम अधिकारियों ने कंपनी से इस संबंध में जवाब माँगा है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है,जब एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया और उसकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी कंपनी सैमसंग के आयात से जुड़े एक अन्य कस्टम विवाद की भी जाँच चल रही है। यह जाँच आयात किए गए ओएलईडी ग्लास स्क्रीन पर पाँच प्रतिशत की रियायती कस्टम ड्यूटी के कथित गलत दावे को लेकर हो रही है। जाँच एजेंसी का मानना है कि पाँच प्रतिशत की रियायती दर सामान्य बाजार में बिकने वाले उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले पुराने एलसीडी और एलईडी पैनल से संबंधित प्रावधानों के तहत उपलब्ध है।
ओएलईडी से जुड़े आयात के मामले में जाँच अधिकारियों का मत है कि इन कंपनियों को अधिक दर से कस्टम ड्यूटी का भुगतान करना चाहिए था। अधिकारियों के अनुसार, ओएलईडी हिस्सों पर 15 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लागू हो सकती है। इस वजह से पाँच प्रतिशत की दर से शुल्क भुगतान किए जाने को लेकर सवाल उठे हैं। हालाँकि,इस मामले में अंतिम स्थिति संबंधित जाँच और कस्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया ने ओएलईडी आयात से जुड़े अधिकारियों के सवालों के लिखित जवाब भी भेजे हैं। कंपनी ने अधिकारियों के आकलन के आधार पर कस्टम ड्यूटी में अंतर की राशि स्वेच्छा से जमा करने की जानकारी दी है। हालाँकि,मौजूदा कारण बताओ नोटिस में रॉयल्टी भुगतान को लेकर 153.58 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी की माँग एक अलग मुद्दे के तौर पर सामने आई है। कारण बताओ नोटिस मिलने का अर्थ यह नहीं है कि कंपनी पर अंतिम देनदारी तय हो चुकी है। इस तरह के मामलों में कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है और इसके बाद संबंधित प्राधिकरण आगे की कार्रवाई करता है।
कस्टम ड्यूटी से जुड़े विवाद के बीच एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के वित्तीय प्रदर्शन में भी मजबूत वृद्धि देखने को मिली है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में अपने शुद्ध मुनाफे में सालाना आधार पर 27.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की। अप्रैल से जून के बीच कंपनी का शुद्ध मुनाफा 653 करोड़ रुपये रहा,जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी तिमाही में यह 513 करोड़ रुपये था। इस तरह एक साल के भीतर कंपनी के मुनाफे में 140 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
कंपनी की आय में भी इस अवधि के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि हुई। अप्रैल-जून तिमाही में एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया की आय 15.5 प्रतिशत बढ़कर 7,233 करोड़ रुपये पहुँच गई। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी की आय 6,262 करोड़ रुपये थी। कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में यह सुधार ऐसे समय हुआ,जब गर्मियों के मौसम में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की माँग मजबूत रही और प्रीमियम उत्पादों की बिक्री में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर और अन्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की माँग बढ़ने से कंपनियों को कारोबार में गति मिली। एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के मामले में भी प्रीमियम श्रेणी के उत्पादों की बिक्री और मौसमी माँग ने तिमाही प्रदर्शन को सहारा दिया। कंपनी का बढ़ता राजस्व और मुनाफा घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में उसकी स्थिति को भी दर्शाता है।
फिलहाल एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के सामने कस्टम विभाग से मिले कारण बताओ नोटिस का जवाब देने और मामले में अपना पक्ष रखने की प्रक्रिया है। रॉयल्टी भुगतान को आयातित वस्तुओं के मूल्यांकन में शामिल करने को लेकर उठे सवालों पर आगे की कार्रवाई कस्टम अधिकारियों के निर्णय पर निर्भर करेगी। साथ ही ओएलईडी आयात पर रियायती शुल्क से जुड़ी जाँच भी कंपनी के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में आने वाले समय में कस्टम मामलों में कंपनी की ओर से दिए गए जवाब और अधिकारियों के अंतिम निष्कर्ष पर नजर रहेगी। दूसरी ओर, मजबूत तिमाही नतीजे कंपनी के कारोबार की सकारात्मक तस्वीर पेश कर रहे हैं,जिससे कस्टम विवाद और वित्तीय प्रदर्शन दोनों एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गए हैं।
