राँची,6 सितंबर (युआईटीवी)- झारखण्ड में लंपी वायरस ने तबाही मचा दिया है। जिससे 1000 से भी अधिक मवेशियों की मौत हो गई है। पशुपालक इससे परेशान हो गए हैं। झारखण्ड में पहले तो सूखा ने अपना प्रकोप दिखाया। अब लंपी वायरस ने अपने पाँव पसारने शुरू कर दिए हैं जिससे हजारों पशुओं की मौत हो गई है। सूखा की स्तिथि और लंपी वायरस से मरते अपने पशुओं को देख कर झारखण्ड के किसान और पशुपालक परेशान हो गए हैं। पिछले साल 2022 में भी लंपी वायरस ने अपना कहर बरपाया था जिससे लाखों मवेशियों की मौत हो गई थी। पिछले साल लंपी वायरस का कहर पंजाब,उत्तर प्रदेश,हरियाणा,राजस्थान और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में देखे गए थे।
झारखण्ड राज्यों के हजारीबाग,पलामू,लातेहार,गढ़वा,चतरा,गोड्डा,गुमला,दुमका,रामगढ़,साहिबगंज में बड़ी संख्या में मवेशियों की मौत पिछले एक सप्ताह के भीतर हुए हैं। झारखण्ड राज्य के विभिन्न जिलों से मिली जानकारी के अनुसार लगभग 1000 से अधिक मवेशियों की मौत हो गई है। पशुपालन विभाग गोड्डा,गुमला,लोहरदगा,साहिबगंज,चतरा आदि जिलों में लंपी वायरस के लक्षण पाए गए हैं। जिसके बाद पशुओं के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है लेकिन शिकायत मिल रही है कि उपलब्ध टीका पर्याप्त संख्या में नहीं है।
विभाग के उच्चाधिकारियों वायरस के खतरे को देखते हुए सभी जिलों के पशुपालन पदाधिकारी और नोडल पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। कहा गया है कि अगर उनके जिलों में इस तरह की बीमारी से संक्रमित पशु पाए जाते हैं तो उनके नमूने लिए जाए ,उन नमूने को एकत्रित कर कोल्ड चेन में रखा जाए और जल्द-से-जल्द संस्थान को भेजा जाए।
इस बीमारी को फैलने से रोकने और मवेशियों की जान बचाने हेतु रोकथाम अभियान चलाया जा रहा है जिसके वजह से पशुपालन अधिकारियों की छुट्टियाँ रद्द कर दी गई हैं और उनसे कहा गया है कि बहुत जरुरी हो तभी छुट्टी के लिए आवेदन दे अन्यथा नहीं।
पशुपालकों का कहना है कि पशुओं में जब इस बीमारी के लक्षण आ रहा है तो उसके एक से डेढ़ सप्ताह के अंदर ही पशुओं की मौत हो जा रही है। इसलिए इसके रोकथाम के लिए और बचाव के लिए पशुपालकों को जागरूक करने का निर्णय लिया गया है।
लंपी वायरस ज्यादातर गाय प्रजाति को संक्रमित करता है। यह विषाणु जनित संक्रामक बीमारी है। यह प्रमुख रूप संक्रमित मच्छरों और मक्खियों के काटने से होता है।
