तेहरान,11 अगस्त (युआईटीवी)- ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह सैय्यद मोजतबा हुसैनी खामेनेई ने देश के सैन्य नेतृत्व में बड़ा फेरबदल करते हुए कई महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियाँ की हैं। ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूर्व इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के कमांडर मोहसिन रेजाई को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने के बाद सर्वोच्च नेता ने अलग-अलग आदेश जारी कर सैन्य ढांचे के छह प्रमुख पदों पर नई जिम्मेदारियाँ सौंपीं। इन नियुक्तियों में ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ से लेकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के मुख्य कमांडर और नौसेना प्रमुख जैसे अहम पद शामिल हैं।
ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक,अयातुल्लाह सैय्यद मोजतबा हुसैनी खामेनेई देश के सभी सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर हैं। उनके नए आदेशों के बाद ईरान के सैन्य नेतृत्व में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। इसे ऐसे समय में अहम माना जा रहा है,जब ईरान क्षेत्रीय स्तर पर लगातार सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है और उसकी सैन्य एवं सुरक्षा व्यवस्था पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।
नई नियुक्तियों के तहत मेजर जनरल अली अब्दोल्लाही को ईरानी सशस्त्र बलों का चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया गया है। यह पद ईरान की सैन्य व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। चीफ ऑफ स्टाफ के तौर पर अली अब्दोल्लाही के सामने विभिन्न सैन्य इकाइयों के बीच समन्वय बनाए रखने और देश की रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी।
इसके साथ ही ब्रिगेडियर जनरल कियमार्स हैदरी को ईरानी सशस्त्र बलों का डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ बनाया गया है। सैन्य कमान के इस महत्वपूर्ण पद पर उनकी नियुक्ति से शीर्ष सैन्य नेतृत्व में नई जिम्मेदारियों का वितरण हुआ है। ईरान की मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए चीफ ऑफ स्टाफ और उनके डिप्टी की भूमिका आने वाले समय में काफी महत्वपूर्ण रहने की संभावना है।
नई नियुक्तियों में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के नेतृत्व को लेकर हुआ है। मेहर न्यूज के अनुसार,मेजर जनरल अहमद वाहिदी को आईआरजीसी का मुख्य कमांडर नियुक्त किया गया है। आईआरजीसी ईरान की सैन्य और सुरक्षा व्यवस्था का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। देश की क्षेत्रीय सुरक्षा नीति और सैन्य रणनीति में इस संगठन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
अहमद वाहिदी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है,जब ईरान की सुरक्षा व्यवस्था पर कई तरह के दबाव हैं। आईआरजीसी की जिम्मेदारियों में देश की सुरक्षा के अलावा क्षेत्रीय गतिविधियों और रणनीतिक हितों की रक्षा भी शामिल रही है। नए कमांडर के सामने संगठन की सैन्य तैयारियों को मजबूत करने और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप रणनीति तैयार करने की चुनौती होगी।
सर्वोच्च नेता ने मेजर जनरल मुस्तफा इजादी को आईआरजीसी का डिप्टी कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया है। नियुक्ति आदेश में उनकी निष्ठा, क्षमता और बहुमूल्य अनुभव का उल्लेख किया गया। आदेश में कहा गया कि आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ की सिफारिश को ध्यान में रखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुस्तफा इजादी लंबे समय से ईरानी सैन्य ढाँचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
आईआरजीसी की नौसेना में भी नेतृत्व परिवर्तन किया गया है। रियर एडमिरल अली ओजमाई को आईआरजीसी नौसेना का नया कमांडर नियुक्त किया गया है। सर्वोच्च नेता ने नियुक्ति आदेश में उनकी लगन,क्षमता और अनुभव का उल्लेख किया। यह नियुक्ति रियर एडमिरल तंगसिरी की शहादत के बाद की गई है। आईआरजीसी नौसेना की भूमिका विशेष रूप से फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े सुरक्षा मामलों में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ऐसे में आईआरजीसी नौसेना के नेतृत्व में बदलाव का रणनीतिक महत्व भी माना जा रहा है। ईरान की समुद्री सुरक्षा,तटीय रक्षा और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से संबंधित गतिविधियों में आईआरजीसी नौसेना की अहम भूमिका रहती है। अली ओजमाई की नियुक्ति के बाद संगठन की समुद्री रणनीति और तैयारियों पर भी नजर रहेगी।
इसके अलावा सर्वोच्च नेता ने हुसैन ताएब को आईआरजीसी की बसीज संगठन का प्रमुख नियुक्त किया है। हुसैन ताएब को इस संगठन और ईरान की सुरक्षा व्यवस्था में लंबे अनुभव वाला अधिकारी माना जाता है। नियुक्ति आदेश में सर्वोच्च नेता ने उनकी प्रतिबद्धता,क्षमता और अनुभव का उल्लेख किया।
हुसैन ताएब की नियुक्ति को लेकर जारी आदेश में मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की शहादत का भी उल्लेख किया गया। आदेश के अनुसार,उनकी नियुक्ति आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ की सिफारिश पर की गई है। बसीज संगठन ईरान की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक स्तर पर लामबंदी की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके प्रमुख के रूप में हुसैन ताएब को संगठन की गतिविधियों और तैयारियों को दिशा देने की जिम्मेदारी मिलेगी।
इन नियुक्तियों से पहले पूर्व आईआरजीसी कमांडर मोहसिन रेजाई को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में सर्वोच्च नेता का प्रतिनिधि नियुक्त किया गया। मोहसिन रेजाई लंबे समय तक आईआरजीसी के नेतृत्व से जुड़े रहे हैं और ईरान की सुरक्षा एवं रणनीतिक मामलों में उन्हें अनुभवी चेहरा माना जाता है। उनकी नई नियुक्ति से सुरक्षा नीति और शीर्ष नेतृत्व के बीच समन्वय में उनकी भूमिका और बढ़ सकती है।
ईरान के सैन्य नेतृत्व में यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है,जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है। ईरान और उसके क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों के बीच बढ़ते तनाव के साथ-साथ अमेरिका के साथ भी संबंध बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे वातावरण में सैन्य नेतृत्व में अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति को ईरान की सुरक्षा रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरान के शीर्ष सैन्य पदों पर हुई इन नियुक्तियों से यह भी संकेत मिलता है कि देश का नेतृत्व सैन्य कमान और सुरक्षा ढाँचे को मौजूदा चुनौतियों के अनुरूप व्यवस्थित करने पर जोर दे रहा है। चीफ ऑफ स्टाफ, आईआरजीसी कमांडर,डिप्टी कमांडर,नौसेना प्रमुख और बसीज प्रमुख जैसे पदों पर नए अधिकारियों की नियुक्ति से सैन्य व्यवस्था में जिम्मेदारियों का नया संतुलन तैयार हुआ है।
विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर होगी कि नई सैन्य कमान ईरान की रक्षा नीति और क्षेत्रीय रणनीति में किस तरह के बदलाव करती है। खासकर आईआरजीसी और उसकी नौसेना के नेतृत्व में बदलाव का असर ईरान की समुद्री सुरक्षा नीति और क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों पर देखा जा सकता है। वहीं सशस्त्र बलों के शीर्ष पदों पर नई नियुक्तियाँ देश की व्यापक रक्षा व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण होंगी।
कुल मिलाकर,अयातुल्लाह सैय्यद मोजतबा हुसैनी खामेनेई द्वारा की गई इन नियुक्तियों ने ईरान के सैन्य नेतृत्व में बड़ा बदलाव किया है। छह प्रमुख सैन्य पदों पर नई जिम्मेदारियाँ सौंपने के साथ ही आईआरजीसी की कमान,नौसेना और बसीज संगठन में भी नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। अब इन नए अधिकारियों के सामने ईरान की सैन्य तैयारियों को मजबूत करने,आंतरिक और बाहरी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने तथा बदलते क्षेत्रीय समीकरणों के बीच देश की रणनीतिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।
