वॉशिंगटन,11 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बच्चों को खसरा, गलघोंटू और रूबेला यानी एमएमआर के टीके अलग-अलग लगाने की अपनी सलाह का बचाव किया है। हालाँकि,इसी दौरान उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस बात का कोई सीधा प्रमाण मौजूद नहीं है कि तीनों टीकों को एक साथ देने से बच्चों के स्वास्थ्य को कोई गंभीर खतरा हो सकता है। ट्रंप की यह टिप्पणी बच्चों के टीकाकरण से जुड़ी अमेरिकी स्वास्थ्य नीति में किए गए नए बदलावों के बीच आई है। उन्होंने बच्चों के लिए नई वैक्सीन सिफारिशों को लागू करने वाले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं,जिसके तहत कुछ टीकों को लेकर संघीय स्तर की सिफारिशों में बदलाव किया गया है।
नए आदेश के तहत कहा गया है कि यदि खसरा,गलघोंटू और रूबेला के अलग-अलग टीके अमेरिका में उपलब्ध हो जाते हैं,तो इन्हें संयुक्त एमएमआर टीके के बजाय अलग-अलग लगाए जाने की नीति अपनाई जाएगी। ट्रंप से जब यह सवाल पूछा गया कि क्या इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण है कि संयुक्त एमएमआर टीका जानलेवा हो सकता है, तो उन्होंने सीधे तौर पर इसका जवाब ‘नहीं’ में दिया। इसके बावजूद उन्होंने अलग-अलग टीके लगाने की अपनी राय दोहराई और कहा कि उन्होंने सुना है कि कुछ लोग संयुक्त टीके को लेकर जोखिम की आशंका जताते हैं।
ट्रंप ने इस संदर्भ में जोखिम की संभावना का एक काल्पनिक उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी टीके में पाँच प्रतिशत जोखिम होने की बात मानी जाए,तो उन्हें अलग-अलग टीके लगाने में कोई समस्या नहीं दिखती। उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया है कि अलग-अलग टीके सुरक्षित होते हैं,जबकि इन्हें एक साथ देने से खतरनाक परिणाम हो सकते हैं। हालाँकि, उनके इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई प्रत्यक्ष वैज्ञानिक प्रमाण पेश नहीं किया। खास तौर पर यह बात महत्वपूर्ण है कि ट्रंप ने खुद स्वीकार किया कि संयुक्त एमएमआर टीके के जानलेवा होने का कोई सीधा प्रमाण उनके पास नहीं है।
राष्ट्रपति ने यह भी सुझाव दिया कि बच्चों को एक ही चिकित्सकीय दौरे के दौरान कई टीके देने के बजाय अलग-अलग चिकित्सकीय मुलाकातों में टीके लगाए जाने चाहिए। उन्होंने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अपने बच्चों के लिए भी इसी तरह का तरीका अपनाया था। ट्रंप ने बताया कि वह अपने बच्चों को पाँच अलग-अलग टीके लगवाने के लिए पाँच बार डॉक्टर के पास ले गए थे। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में बार-बार डॉक्टर के पास जाना असुविधाजनक जरूर था,लेकिन उन्होंने इसे अपनाया।
ट्रंप ने टीकों के बीच अंतर रखने को ऑटिज्म की दर से भी जोड़ते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि टीकों के बीच अंतर रखने से ऑटिज्म की दर पर असर पड़ेगा। हालांकि, उनके इस अनुमान के समर्थन में भी कोई स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं रखा गया। ऑटिज्म को लेकर टीकों के साथ संबंध का दावा लंबे समय से वैज्ञानिक शोध का विषय रहा है, लेकिन उपलब्ध चिकित्सा प्रमाणों ने एमएमआर टीके और ऑटिज्म के बीच कारणात्मक संबंध स्थापित नहीं किया है।
ट्रंप की नई नीति के सामने आने के बाद यह सवाल भी उठाया गया कि यदि बच्चों को अलग-अलग टीके लगवाने के लिए कई बार डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा,तो परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। खास तौर पर उन परिवारों के लिए यह चिंता महत्वपूर्ण हो सकती है,जिन्हें हर चिकित्सकीय मुलाकात पर सह-भुगतान या अन्य स्वास्थ्य खर्च वहन करना पड़ता है। इस सवाल पर ट्रंप ने परिवारों की मदद का भरोसा दिलाया,लेकिन किसी विशेष वित्तीय कार्यक्रम या सहायता योजना की घोषणा नहीं की। उन्होंने कहा कि सरकार परिवारों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेगी कि खर्च के मामले में कोई समस्या न हो।
कार्यकारी आदेश में कुल 11 बीमारियों की पहचान की गई है,जिनके लिए बच्चों का टीकाकरण आवश्यक बताया गया है। वहीं कुछ दूसरी बीमारियों से संबंधित टीकों के लिए नीति को अधिक लक्षित बनाया गया है। ऐसे टीके उन बच्चों या समूहों को दिए जाने की सिफारिश की जाएगी,जिन्हें संबंधित बीमारी का अधिक जोखिम है या फिर माता-पिता और चिकित्सक की आपसी सहमति के आधार पर टीकाकरण किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत हेपेटाइटिस बी,इन्फ्लूएंजा और कोविड-19 के टीकों को लेकर सभी बच्चों के लिए पहले जैसी व्यापक सिफारिश नहीं रखी गई है। इस बदलाव ने अमेरिकी स्वास्थ्य नीति को लेकर बहस तेज कर दी है। समर्थकों का कहना है कि टीकाकरण के फैसलों में जोखिम वाले समूहों और व्यक्तिगत परिस्थितियों को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए, जबकि आलोचकों की चिंता है कि सार्वभौमिक टीकाकरण सिफारिशों में बदलाव से कुछ बीमारियों के खिलाफ सामूहिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग के सचिव रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर ने कहा कि सरकारी एजेंसियों ने टीकों की सुरक्षा और लंबे समय में स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की जांच के लिए कई अध्ययन शुरू किए हैं। उन्होंने बताया कि शोधकर्ताओं का लक्ष्य टीका लगवाने वाले और टीका नहीं लगवाने वाले बच्चों के स्वास्थ्य परिणामों की तुलना करना है। इन अध्ययनों में टीकों में इस्तेमाल होने वाले एल्युमीनियम एडजुवेंट्स,गर्भावस्था के दौरान दिए जाने वाले हेपेटाइटिस बी टीके और टीकाकरण के समय जैसे विभिन्न पहलुओं की भी जाँच की जाएगी।
कैनेडी ने कहा कि शोध में एलर्जी,ऑटोइम्यून बीमारी,ऑटिज्म और न्यूरोडेवलपमेंट से जुड़ी अन्य समस्याओं जैसे संभावित स्वास्थ्य प्रभावों पर भी ध्यान दिया जाएगा। उनका कहना है कि इन अध्ययनों के जरिए सरकार टीकाकरण और बच्चों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के बीच संभावित संबंधों को बेहतर ढंग से समझना चाहती है। हालाँकि,ऐसे शोधों के निष्कर्ष आने में समय लग सकता है और किसी भी संभावित संबंध की पुष्टि वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर ही की जा सकेगी।
नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ ने भी ऑटिज्म से संबंधित शोध को लेकर कई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। कैनेडी के अनुसार,संस्थान ने ऑटिज्म के प्रसार,संभावित कारणों,उपचार और इससे जुड़ी सेवाओं की जाँच के लिए 13 शोध परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें से पाँच परियोजनाओं में टीकों को संभावित कारणों में शामिल करके जांच की जाएगी। इन परियोजनाओं का उद्देश्य ऑटिज्म जैसी जटिल स्थिति को बेहतर ढंग से समझना और उसके कारणों को लेकर उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी का विस्तार करना है।
नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ के निदेशक जे भट्टाचार्य ने ऑटिज्म को बेहद जटिल स्थिति बताया है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर किसी निष्कर्ष तक पहुँचने के लिए समय और विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत होगी। उनके अनुसार,इसका जवाब आसान नहीं होगा और विज्ञान में समय लगता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऑटिज्म के कारणों को समझने के लिए अलग-अलग संभावित कारकों की वैज्ञानिक तरीके से जांच करनी होगी।
भट्टाचार्य ने खसरे के टीके के महत्व को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि खसरे का टीका महत्वपूर्ण है,विशेष रूप से उस समय जब बीमारी का प्रकोप सामने आता है। हालाँकि,उन्होंने इस बात का विरोध किया कि यदि माता-पिता ने अपने बच्चों के टीकाकरण को लेकर अलग फैसला लिया है,तो उन बच्चों को स्कूल से बाहर कर दिया जाए। इस बयान के बाद स्कूलों में टीकाकरण नियमों को लेकर भी बहस तेज होने की संभावना है।
कार्यकारी आदेश में राज्यों को स्कूलों में लागू टीकाकरण नियमों की समीक्षा करने की सलाह भी दी गई है। व्हाइट हाउस की घरेलू नीति अधिकारी हेइडी ओवरटन ने दावा किया कि जनवरी 2026 से 28 राज्यों ने रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र की सिफारिशों का पालन करना बंद कर दिया है और उन्होंने अपनी-अपनी नीतियाँ बनानी शुरू कर दी हैं। इससे अमेरिका में टीकाकरण नीति के संघीय और राज्य स्तर के बीच अंतर को लेकर चर्चा और बढ़ सकती है।
अमेरिका में बच्चों के टीकाकरण की नीति लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रही है। एक तरफ सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ संक्रामक बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए व्यापक टीकाकरण को महत्वपूर्ण मानते हैं,वहीं दूसरी तरफ कुछ समूह टीकों की सुरक्षा,उनके दुष्प्रभावों और व्यक्तिगत स्वास्थ्य संबंधी फैसलों में अभिभावकों की भूमिका पर जोर देते हैं। नई नीति इन दोनों दृष्टिकोणों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में प्रस्तुत की जा रही है,लेकिन इसके संभावित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर बहस जारी है।
एमएमआर टीके को लेकर ट्रंप की टिप्पणी ने इस बहस को और अधिक चर्चा में ला दिया है। खास तौर पर तब,जब उन्होंने संयुक्त टीके को अलग-अलग देने की सलाह तो दी, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि उसके जानलेवा होने का कोई सीधा प्रमाण मौजूद नहीं है। ऐसे में उनके बयान ने वैज्ञानिक प्रमाण,व्यक्तिगत राय और सरकारी स्वास्थ्य नीति के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
अब अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसियों और शोध संस्थानों के सामने चुनौती यह है कि टीकाकरण नीति में किए जा रहे बदलावों के बीच वैज्ञानिक प्रमाणों को स्पष्ट रूप से सामने रखा जाए। नए शोधों के परिणाम आने के बाद यह समझने में मदद मिल सकती है कि विभिन्न टीकों के समय,संयोजन और उपयोग से बच्चों के स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है। फिलहाल ट्रंप प्रशासन ने टीकाकरण नीति में बड़ा बदलाव करते हुए कुछ टीकों की सार्वभौमिक सिफारिशों को सीमित किया है और एमएमआर टीकों को अलग-अलग देने की सलाह को आगे बढ़ाया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच विशेषज्ञों और अभिभावकों की नजर अब नई नीति के वास्तविक प्रभाव पर रहेगी। एक ओर सरकार अतिरिक्त शोध के जरिए टीकों की सुरक्षा और दीर्घकालिक प्रभावों की जाँच करने की बात कह रही है,वहीं दूसरी ओर खसरे जैसी संक्रामक बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण के महत्व पर भी जोर दिया जा रहा है। आने वाले समय में नए वैज्ञानिक अध्ययनों के निष्कर्ष और राज्यों द्वारा अपनाई जाने वाली अलग-अलग नीतियां यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी कि अमेरिका में बच्चों के टीकाकरण का ढाँचा किस दिशा में आगे बढ़ता है।
