वाशिंगटन,8 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश की खनिज और खनन क्षमता को मजबूत करने के लिए 2 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की घोषणा की है। ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य घरेलू खनिज उत्पादन को बढ़ावा देना,रक्षा क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और रणनीतिक खनिजों के लिए दूसरे देशों पर अमेरिका की निर्भरता को कम करना है। राष्ट्रपति ने यह घोषणा विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेजबानी में आयोजित खनन उद्योग की गोलमेज बैठक के दौरान की। इस बैठक में अमेरिका के खनन क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ विश्वविद्यालयों और संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
ट्रंप प्रशासन की ओर से घोषित निवेश का बड़ा हिस्सा उन खनिजों और सामग्रियों से जुड़ा है, जिन्हें रक्षा,ऊर्जा,अंतरिक्ष,ऑटोमोबाइल और आधुनिक तकनीक के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी तरह का व्यवधान अमेरिका की रक्षा औद्योगिक क्षमता और महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में सरकार घरेलू उत्पादन और प्रसंस्करण क्षमता को बढ़ाकर आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों को दूर करना चाहती है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रणनीतिक महत्व के खनिज अमेरिका की ताकत का आधार हैं। इन्हीं कच्चे संसाधनों से उन्नत हथियारों से लेकर ऑटोमोबाइल तक कई महत्वपूर्ण उत्पाद तैयार किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि जरूरी खनिजों का खनन,उनका प्रसंस्करण और उनसे संबंधित विनिर्माण देश के भीतर ही हो तथा इसमें अमेरिकी कौशल और अमेरिकी श्रमिकों की भूमिका हो।
ट्रंप ने अमेरिकी श्रमिकों की क्षमता की प्रशंसा करते हुए कहा कि अमेरिका के पास दुनिया के सबसे बेहतर कौशल वाले लोग हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका वर्ष 1950 के दशक के बाद सबसे तेज गति से नई खदानें खोल रहा है। उनका कहना है कि घरेलू खनन क्षेत्र को बढ़ावा देने से न केवल रणनीतिक खनिजों की उपलब्धता बढ़ेगी,बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और देश की औद्योगिक क्षमता मजबूत होगी।
व्हाइट हाउस के अनुसार,इन निवेशों का उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखला में मौजूद कमजोरियों को दूर करना,भू-राजनीतिक संकटों या अंतरराष्ट्रीय व्यवधानों से अमेरिकी रक्षा औद्योगिक आधार को सुरक्षित रखना और अगली पीढ़ी की तकनीकों के विकास को समर्थन देना है। सरकार का मानना है कि आधुनिक हथियार प्रणालियों,अंतरिक्ष कार्यक्रमों,ऊर्जा भंडारण और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसी तकनीकों के लिए कई ऐसे खनिजों की आवश्यकता है, जिनकी वैश्विक आपूर्ति सीमित है या जिनके उत्पादन में अमेरिका दूसरे देशों पर निर्भर है।
घोषित पैकेज में सबसे बड़ा निवेश कैलिफोर्निया स्थित सिला नैनो टेक्नोलॉजीज में किया जाएगा। युद्ध विभाग इस कंपनी में 1.4 अरब डॉलर का निवेश करेगा। इस राशि का इस्तेमाल सिलिकॉन-कार्बन बैटरी एनोड के उत्पादन को बढ़ाने और लिथियम-आयन बैटरी सेल के निर्माण के लिए एक नई सुविधा विकसित करने में किया जाएगा। इन सामग्रियों का इस्तेमाल आधुनिक रक्षा और तकनीकी प्रणालियों में होता है। उपग्रहों, मानवरहित हवाई प्रणालियों और विभिन्न प्रकार के हथियारों में भी इनका उपयोग किया जाता है।
सरकार का मानना है कि बैटरी से जुड़ी सामग्रियों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने से अमेरिका की रक्षा और तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला अधिक सुरक्षित हो सकेगी। साथ ही, ऊर्जा भंडारण और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे क्षेत्रों में भी घरेलू उत्पादन क्षमता का विस्तार किया जा सकेगा। ट्रंप प्रशासन इसे अमेरिका की व्यापक खनिज आत्मनिर्भरता रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहा है।
इसके अलावा,अमेरिकी ऊर्जा विभाग सनराइज एनर्जी मेटल्स में 400 मिलियन डॉलर का निवेश करेगा। इस निवेश का उद्देश्य स्कैंडियम की आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना है। व्हाइट हाउस ने संबंधित परियोजना को दुनिया की पहली प्राथमिक स्कैंडियम खदान बताया है। स्कैंडियम का इस्तेमाल उच्च तापमान सहने वाले एल्युमिनियम मिश्र धातुओं के निर्माण में किया जाता है। इन मिश्र धातुओं का उपयोग लड़ाकू विमानों और अंतरिक्ष यानों जैसे उच्च तकनीकी क्षेत्रों में किया जाता है।
मिनेसोटा स्थित नीरॉन मैग्नेटिक्स को दुर्लभ-पृथ्वी रहित स्थायी चुंबक बनाने के लिए 150 मिलियन डॉलर दिए जाएँगे। इन चुंबकों को ऐसी तकनीकों के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है,जिनमें दुर्लभ-पृथ्वी तत्वों पर निर्भरता कम की जा सके। अमेरिका लंबे समय से रणनीतिक खनिजों और दुर्लभ-पृथ्वी तत्वों की आपूर्ति के मामले में विदेशी स्रोतों पर अपनी निर्भरता घटाने की कोशिश कर रहा है।
इसके साथ ही 85 मिलियन डॉलर से अधिक की राशि स्टैंडर्ड बॉक्साइट को उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य रिफ्रैक्टरी-ग्रेड बॉक्साइट की आपूर्ति को सुरक्षित करना है। इस प्रकार के बॉक्साइट का इस्तेमाल उच्च तापमान को सहन करने वाली सामग्रियों के निर्माण में किया जाता है। अमेरिकी प्रशासन इसे औद्योगिक उत्पादन और रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए आवश्यक मानता है।
अमेरिकी एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक कैलिफोर्निया में बोरॉन डिपॉजिट विकसित करने के लिए फाइव ई एडवांस्ड मैटेरियल्स में 8 मिलियन डॉलर का निवेश करेगा। इसके अलावा अलबामा में वेस्टवॉटर रिसोर्सेज को ग्रेफाइट परियोजना के लिए और पेंसिल्वेनिया में ग्लोबल एडवांस्ड मैटेरियल्स को टैंटलम और नियोबियम से जुड़ी परियोजनाओं के लिए 25 मिलियन डॉलर उपलब्ध कराए जाएँगे। इन खनिजों का इस्तेमाल विभिन्न उन्नत औद्योगिक,इलेक्ट्रॉनिक और रक्षा अनुप्रयोगों में किया जाता है।
अमेरिका अपनी खनिज आपूर्ति श्रृंखला को केवल घरेलू स्तर तक सीमित नहीं रखना चाहता,बल्कि मित्र देशों और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में भी परियोजनाओं में निवेश कर रहा है। इसी क्रम में अमेरिकी इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन मेडागास्कर में खनन परियोजना विकसित करने के लिए हरेना रेयर अर्थ्स में करीब 4.8 मिलियन डॉलर के बराबर निवेश करेगा। इस परियोजना का उद्देश्य अमेरिकी विनिर्माण उद्योग के लिए चुंबक धातुओं और दुर्लभ-पृथ्वी तत्वों की आपूर्ति सुरक्षित करना है।
ट्रंप प्रशासन ने खनन क्षेत्र में मानव संसाधन की कमी को भी गंभीरता से लिया है। राष्ट्रपति ने 14 खनन स्कूलों के लिए 100 मिलियन डॉलर की घोषणा की है। इस राशि का उद्देश्य खनन,खनिज और उनसे जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाओं में डिग्री हासिल करने वाले स्नातकों की संख्या को दोगुना करना है। सरकार का मानना है कि केवल खदानों में निवेश करना पर्याप्त नहीं है,बल्कि उन्हें संचालित करने और नई तकनीक विकसित करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की भी जरूरत होगी।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी खनन क्षेत्र की अगली पीढ़ी को तैयार करने के लिए 100 मिलियन डॉलर उपलब्ध कराना खुशी की बात है। उनका कहना है कि अमेरिका को ऐसे युवाओं की जरूरत है,जो आधुनिक खनन तकनीकों,खनिज प्रसंस्करण और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल कर सकें।
इसके अतिरिक्त,80 मिलियन डॉलर से अधिक की राशि अलग-अलग शैक्षणिक संस्थानों को कार्यबल विकास कार्यक्रमों और तकनीकी नवाचार केंद्रों के लिए दी जाएगी। राष्ट्रपति के अनुसार,कुल 81 मिलियन डॉलर की अनुदान राशि कोलोराडो स्कूल ऑफ माइन्स, साउथ डकोटा स्कूल ऑफ माइन्स और जॉन्स हॉपकिंस विश्वविद्यालय को प्रदान की जाएगी। इन संस्थानों के माध्यम से खनन क्षेत्र में नई तकनीकों,प्रशिक्षण और शोध को बढ़ावा देने की योजना है।
खनन उद्योग की इस महत्वपूर्ण बैठक में विदेश मंत्री मार्को रुबियो,आंतरिक मंत्री डग बर्गम और वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक भी शामिल हुए। उनके साथ खनन उद्योग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। व्हाइट हाउस ने इस बैठक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह 120 से अधिक वर्षों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति और खनन उद्योग के नेताओं के बीच सबसे बड़ी बैठकों में से एक थी।
ट्रंप प्रशासन की इस पहल को अमेरिका की व्यापक आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। आधुनिक अर्थव्यवस्था में खनिजों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। बैटरी,सेमीकंडक्टर,रक्षा उपकरण,अंतरिक्ष तकनीक,इलेक्ट्रिक वाहन और अक्षय ऊर्जा प्रणालियों के निर्माण के लिए विभिन्न रणनीतिक खनिजों की जरूरत होती है। ऐसे में इन संसाधनों की आपूर्ति पर नियंत्रण आर्थिक और सैन्य दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जाता है।
अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई महत्वपूर्ण खनिजों के खनन, प्रसंस्करण या अंतिम उत्पाद के निर्माण के लिए उसकी आपूर्ति श्रृंखला विदेशी देशों पर निर्भर है। वैश्विक तनाव,व्यापारिक विवाद,प्रतिबंध या किसी अन्य भू-राजनीतिक संकट की स्थिति में इन संसाधनों की आपूर्ति बाधित हो सकती है। ट्रंप प्रशासन इसी जोखिम को कम करने के लिए घरेलू उत्पादन के साथ रणनीतिक साझेदारियों और विदेशों में परियोजनाओं में निवेश पर जोर दे रहा है।
इस निवेश योजना के जरिए सरकार एक तरफ नई खदानों और प्रसंस्करण संयंत्रों को बढ़ावा देना चाहती है,तो दूसरी तरफ नई पीढ़ी के खनन विशेषज्ञ और तकनीकी कर्मचारी तैयार करने की कोशिश कर रही है। इससे अमेरिका के खनन उद्योग को लंबे समय में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने का लक्ष्य है।
ट्रंप का यह कदम अमेरिका की उस नीति का हिस्सा है,जिसमें रणनीतिक खनिजों को राष्ट्रीय सुरक्षा और औद्योगिक नीति के केंद्र में रखा जा रहा है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि उनका प्रशासन अमेरिका की उत्पादन क्षमता को देश के भीतर वापस लाने और विदेशी निर्भरता कम करने पर जोर देगा। अब इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन और निवेश के वास्तविक परिणाम यह तय करेंगे कि अमेरिका कितनी तेजी से अपनी खनिज आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत कर पाता है।
