मशहूर पंजाबी गायक दलेर मेहंदी (तस्वीर क्रेडिट@AnupamPKher)

दलेर मेहंदी विवाद में नया मोड़,मंत्री सुबोध उनियाल ने माफी माँगने के दावे को नकारा; बोले- मैंने कोई अपराध नहीं किया

मुंबई,27 अक्टूबर (युआईटीवी)- पंजाबी गायक दलेर मेहंदी और उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बीच विवाद लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। हाल ही में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि मंत्री ने गायक से फोन पर बात कर माफी माँग ली है और दोनों पक्षों के बीच मामला सुलझ गया है। हालाँकि,अब इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ आ गया है। मंत्री सुबोध उनियाल ने माफी माँगने की खबरों को खारिज करते हुए साफ कहा है कि उन्होंने दलेर मेहंदी से माफी नहीं माँगी। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर विवाद चर्चा में आ गया है।

एक साक्षात्कार में सुबोध उनियाल ने उन दावों पर नाराजगी जताई,जिनमें कहा गया था कि उन्होंने गायक से माफी मांगकर मामले को समाप्त कर दिया है। मंत्री के मुताबिक, उनके माफी माँगने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने सवाल किया कि जब उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है,तो वह माफी क्यों मांगेंगे। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि वह घटना को लेकर सामने आई आलोचनाओं और माफी संबंधी दावों से सहमत नहीं हैं।

सत्य वाणी को दिए गए साक्षात्कार में सुबोध उनियाल से सीधे पूछा गया कि क्या उन्होंने दलेर मेहंदी से माफी माँगी है। इस पर मंत्री ने कहा कि माफी माँगने का कोई सवाल ही नहीं है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या उन्होंने कोई अपराध किया है,जिसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए।

मंत्री का यह बयान उस समय सामने आया है,जब इससे पहले गायक मीका सिंह की टीम की ओर से जारी बयान में दावा किया गया था कि सुबोध उनियाल ने फोन पर दलेर मेहंदी से बातचीत के दौरान माफी माँगी थी। इस बयान के बाद यह माना जा रहा था कि दोनों पक्षों के बीच विवाद को खत्म करने की कोशिश सफल हो गई है,लेकिन मंत्री के ताजा बयान ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुबोध उनियाल ने उन खबरों पर भी नाराजगी जताई,जिनमें उनकी ओर से माफी मांगे जाने की बात कही गई थी। उनके बयान और मीका सिंह की टीम की ओर से पहले किए गए दावे के बीच अंतर के कारण अब यह मामला फिर चर्चा में है। फिलहाल,दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि फोन पर हुई बातचीत में वास्तव में क्या कहा गया था।

साक्षात्कार के दौरान मंत्री सुबोध उनियाल ने दलेर मेहंदी की तबीयत को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि गायक की तबीयत खराब थी,तो उन्हें कार्यक्रम में शामिल नहीं होना चाहिए था। अगर वह कार्यक्रम में पहुँचे भी थे,तो उन्हें दर्शकों को अपनी खराब सेहत के बारे में बता देना चाहिए था।

मंत्री ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की तबीयत खराब है या नहीं,इसका पता केवल उसके चेहरे को देखकर नहीं लगाया जा सकता। उनके मुताबिक,कार्यक्रम में मौजूद लोगों को कलाकार की स्थिति के बारे में तभी जानकारी मिल सकती थी,जब वह स्वयं इसके बारे में बताते।

यह टिप्पणी उस विवाद से जुड़ी है,जो उत्तराखंड में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान मंच पर हुई घटना के बाद शुरू हुआ था। मंत्री ने उस समय गायक की प्रस्तुति के तरीके पर सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि दलेर मेहंदी ठीक से बोल नहीं पा रहे थे और लाइव गाने के बजाय केवल होंठ हिलाते दिखाई दे रहे थे। उन्होंने यह भी दावा किया था कि गायक शराब के नशे में थे। हालाँकि,ये मंत्री की ओर से लगाए गए आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

इस विवाद में दलेर मेहंदी के छोटे भाई और गायक मीका सिंह भी खुलकर सामने आए थे। उन्होंने अपने भाई का समर्थन करते हुए घटना पर नाराजगी जताई थी। विवाद बढ़ने के बाद मीका सिंह की टीम की ओर से एक बयान जारी किया गया,जिसमें कहा गया कि सुबोध उनियाल ने फोन पर बातचीत के दौरान दलेर मेहंदी से माफी माँगी है।

बयान में कहा गया था कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर मंत्री ने दलेर मेहंदी से बात की और माफी माँगी। इसमें दलेर मेहंदी को वरिष्ठ कलाकार बताते हुए संगीत जगत में उनके योगदान का उल्लेख किया गया था। साथ ही यह भी कहा गया कि हर कलाकार सम्मान का हकदार है।

मीका सिंह की टीम के इस बयान के बाद विवाद के शांत होने की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन अब मंत्री ने माफी माँगने के दावे को नकार दिया है। इस विरोधाभास के कारण मामले में दोनों पक्षों की ओर से सामने आए बयानों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

दलेर मेहंदी से जुड़ी घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विवाद ने व्यापक रूप ले लिया था। मीका सिंह ने भी वीडियो साझा करते हुए अपने भाई के समर्थन में प्रतिक्रिया दी थी। इसके बाद मामला उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचा।

मीका सिंह ने बताया था कि मुख्यमंत्री धामी ने उनसे और दलेर मेहंदी से बातचीत की थी। उनके मुताबिक,मुख्यमंत्री ने दोनों भाइयों से सम्मानजनक तरीके से बात की और उन्हें उत्तराखंड आने का निमंत्रण भी दिया। मीका सिंह ने यह भी कहा था कि मुख्यमंत्री ने मंत्री की ओर से माफी की पेशकश की थी।

हालाँकि,माफी की पेशकश किए जाने और मंत्री की ओर से व्यक्तिगत रूप से माफी माँगने के दावों में अंतर हो सकता है। अब सुबोध उनियाल के बयान के बाद यह अंतर और महत्वपूर्ण हो गया है। फिलहाल,इस संबंध में संबंधित पक्षों की ओर से सामने आए बयानों के अलावा कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

यह पूरा मामला 18 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के नरेंद्रनगर में आयोजित सिद्धपीठ माँ कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले से जुड़ा है। दलेर मेहंदी नवरात्रि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुति देने पहुँचे थे। कार्यक्रम के दौरान जब वह मंच पर गाना गा रहे थे,तभी कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल मंच पर पहुँचे और उनकी प्रस्तुति के तरीके पर नाराजगी जताई।

मंत्री ने आरोप लगाया था कि गायक लाइव गाने के बजाय लिप्सिंग कर रहे हैं। उन्होंने दलेर मेहंदी के बोलने के तरीके पर भी सवाल उठाए और कहा कि जब वह ठीक से बोल नहीं पा रहे थे,तो गाना कैसे गा सकते हैं। इस दौरान मंत्री ने कार्यक्रम के लिए भुगतान की गई रकम का भी जिक्र किया था।

सुबोध उनियाल ने दावा किया था कि दलेर मेहंदी को इस कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए 35 लाख रुपये दिए गए थे। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा था कि इतने पैसे दिए जाने के बावजूद उन्हें लगा कि गायक लाइव गाने के बजाय केवल होंठ हिला रहे हैं। इन टिप्पणियों के बाद मंच पर हुई घटना के वीडियो सामने आए और सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर बहस शुरू हो गई।

दलेर मेहंदी और सुबोध उनियाल के बीच विवाद अब माफी के दावे और उसके खंडन पर केंद्रित हो गया है। एक ओर मीका सिंह की टीम ने फोन पर माफी मांगे जाने की बात कही थी,वहीं दूसरी ओर मंत्री ने इसे स्पष्ट रूप से नकार दिया है। इस कारण विवाद के समाप्त होने को लेकर बनी उम्मीदों पर फिर सवाल उठने लगे हैं।

फिलहाल,मंत्री के ताजा बयान के बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। घटना के बाद कलाकार के सम्मान,मंच पर व्यवहार और सार्वजनिक कार्यक्रमों में जिम्मेदारी को लेकर भी चर्चा हुई थी। अब आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले में संबंधित पक्ष कोई नया बयान देते हैं या विवाद को समाप्त करने के लिए दोबारा बातचीत की पहल होती है।