न्यूजीलैंड के भारतीय मूल के बल्लेबाज जीत रावल ने क्रिकेट को कहा अलविदा (तस्वीर क्रेडिट@np_nationpress)

न्यूजीलैंड के भारतीय मूल के बल्लेबाज जीत रावल ने क्रिकेट को कहा अलविदा,अब चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में सँभालेंगे जिम्मेदारी

नई दिल्ली,9 अक्टूबर (युआईटीवी)- न्यूजीलैंड के भारतीय मूल के पूर्व सलामी बल्लेबाज जीत रावल ने पेशेवर क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है। 38 वर्षीय रावल ने आखिरी बार जनवरी 2020 में न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व किया था। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में उनका सफर भले ही ज्यादा लंबा नहीं रहा,लेकिन घरेलू क्रिकेट में उन्होंने अपनी बल्लेबाजी और निरंतर प्रदर्शन से खास पहचान बनाई। क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद अब वह चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में अपने पेशेवर करियर पर ध्यान देंगे। वह पहले से ही एक ऑडिटिंग फर्म में इस भूमिका में काम कर रहे हैं।

रावल का क्रिकेट तक पहुँचने का सफर परिवार के एक बड़े फैसले और उनके पिता के सपने से जुड़ा रहा है। उनका जन्म 22 सितंबर 1988 को गुजरात के अहमदाबाद में हुआ था। उनके पिता चाहते थे कि बेटा एक दिन न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए खेले। इसी लक्ष्य को पूरा करने की उम्मीद में परिवार ने न्यूजीलैंड जाने का फैसला किया। वहाँ पहुँचने के बाद रावल ने क्रिकेट में अपनी प्रतिभा को निखारा और धीरे-धीरे घरेलू स्तर से राष्ट्रीय टीम तक का सफर तय किया।

नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स क्रिकेट एसोसिएशन को दिए एक साक्षात्कार में रावल ने अपने इस सफर को याद करते हुए कहा कि न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय टीम के लिए खेलना उनका और उनके पिता का बचपन का सपना था। उन्होंने बताया कि उन्हें यह अवसर दिलाने के लिए उनके पिता ने पूरे परिवार को न्यूजीलैंड ले जाने जैसा बड़ा कदम उठाया था। संन्यास के फैसले पर संतुष्टि जताते हुए रावल ने कहा कि ब्लैककैप्स के लिए खेलने का सपना पूरा कर पाना उनके लिए गर्व की बात है। उनके लिए यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं,बल्कि पिता के विश्वास और परिवार के त्याग का परिणाम भी रही।

न्यूजीलैंड जाने से पहले रावल ने भारत में अपने स्कूल के दिनों में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। अहमदाबाद में पढ़ाई के दौरान वह पूर्व भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल के साथ विद्यानगर स्कूल में खेलते थे। दोनों खिलाड़ी सलामी बल्लेबाज की भूमिका निभाते थे। स्कूल के मैदान से शुरू हुआ यह सफर आगे चलकर रावल को न्यूजीलैंड की क्रिकेट व्यवस्था तक ले गया। न्यूजीलैंड में उन्होंने अंडर-19 टीम का प्रतिनिधित्व किया और घरेलू क्रिकेट में ऑकलैंड तथा नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स की ओर से खेलते हुए अपनी जगह बनाई।

रावल को न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने का मौका नवंबर 2016 में मिला। उस समय उनकी उम्र 28 वर्ष थी और उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर में कुल 24 टेस्ट मैच खेले। इन मुकाबलों की 39 पारियों में उन्होंने एक शतक और सात अर्धशतकों की मदद से 1,143 रन बनाए। हालांकि, उन्हें न्यूजीलैंड की ओर से एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय और टी20 अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने का अवसर नहीं मिला। जनवरी 2020 में आखिरी बार राष्ट्रीय टीम के लिए खेलने के बाद उनका अंतर्राष्ट्रीय करियर आगे नहीं बढ़ सका।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सीमित अवसरों के बावजूद घरेलू क्रिकेट में रावल का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने लंबे समय तक रन बनाकर अपनी उपयोगिता साबित की। कुल 164 प्रथम श्रेणी मुकाबलों में उनके नाम 10,432 रन दर्ज हैं। इस दौरान उन्होंने 24 शतक और 50 अर्धशतक लगाए। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनका सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर 256 रन रहा। ये आँकड़े बताते हैं कि वह लंबे प्रारूप में लगातार बल्लेबाजी करने और बड़ी पारियाँ खेलने की क्षमता रखते थे।

लिस्ट-ए क्रिकेट में भी रावल का रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा। उन्होंने 96 मुकाबलों में चार शतक और 13 अर्धशतक की सहायता से 2,714 रन बनाए। वहीं, टी20 प्रारूप में उन्होंने 76 मैच खेले और आठ अर्धशतकों के साथ 1,484 रन अपने खाते में जोड़े। अलग-अलग प्रारूपों में उनके प्रदर्शन ने उन्हें न्यूजीलैंड के घरेलू क्रिकेट का जाना-पहचाना नाम बनाया। राष्ट्रीय टीम में उनका सफर भले ही सीमित रहा,लेकिन घरेलू स्तर पर उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स के क्रिकेट महाप्रबंधक इयान सैंडब्रुक ने रावल के संन्यास पर उनकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि रावल टीम के लिए अनुभवी खिलाड़ी होने के साथ-साथ अच्छे नेतृत्वकर्ता भी रहे हैं। उनके मुताबिक,टीम को रावल के बनाए रन, विकेट और मैदान पर उनके शांत स्वभाव से मिलने वाले नेतृत्व की कमी महसूस होगी। उन्होंने रावल को बेहतरीन साथी और भरोसेमंद खिलाड़ी बताते हुए टीम में उनके योगदान को महत्वपूर्ण माना।

क्रिकेट से विदाई के बाद रावल अब अपने दूसरे पेशेवर क्षेत्र पर अधिक ध्यान देंगे। चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में उनका काम पहले से जारी है और वह एक ऑडिटिंग फर्म से जुड़े हुए हैं। खेल के मैदान पर वर्षों तक मेहनत करने के बाद अब वह वित्तीय और लेखा संबंधी पेशे में अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करेंगे। उनका यह फैसला दिखाता है कि पेशेवर खिलाड़ियों के लिए खेल के बाद भी करियर के दूसरे रास्ते खुले रहते हैं।

जीत रावल का सफर अहमदाबाद के स्कूल मैदान से न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय टेस्ट टीम और वहाँ के घरेलू क्रिकेट तक पहुँचा। उनके पिता का सपना पूरा करने की कोशिश, लंबे प्रारूप में लगातार रन बनाने की क्षमता और टीम के प्रति समर्पण उनके करियर के अहम पहलू रहे। अब क्रिकेट से संन्यास लेकर वह जीवन के नए अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं।