नई दिल्ली,9 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और उनके सह-आरोपी विनोद तोमर को यौन उत्पीड़न मामले में बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर शुक्रवार को होने वाली सुनवाई टल गई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत में मामले की अगली सुनवाई अब 28 अक्टूबर को होगी। अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों की अपील पर जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। इस मामले में चार महिला पहलवानों ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है।
महिला पहलवानों ने अपनी आपराधिक अपील में बृजभूषण शरण सिंह के साथ-साथ सह-आरोपी विनोद तोमर को बरी किए जाने के आदेश पर भी सवाल उठाए हैं। उनकी ओर से दलील दी गई है कि निचली अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन उचित तरीके से नहीं किया। अपीलकर्ताओं का मानना है कि फैसले में तथ्यों और कानूनी सिद्धांतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया,जिसके कारण आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया गया। अब सेशन कोर्ट में इस बात पर विचार होगा कि निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली अपील में उठाए गए आधारों पर आगे क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।
शुक्रवार को सुनवाई के लिए बृजभूषण शरण सिंह स्वयं अदालत पहुँचे थे। इससे पहले की सुनवाई में अदालत ने उन्हें और विनोद तोमर को नोटिस जारी कर अपील पर अपना पक्ष रखने को कहा था। अब अदालत ने जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय दिया है, जिसके चलते सुनवाई की अगली तारीख 28 अक्टूबर निर्धारित की गई है। मामले की आगे की कार्यवाही में दोनों पक्षों की दलीलें महत्वपूर्ण रहेंगी।
बृजभूषण शरण सिंह को इस मामले में तीन अगस्त को दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने बरी कर दिया था। इसके बाद आरोप लगाने वाली महिला पहलवानों ने फैसले को चुनौती देने के लिए सेशन कोर्ट का रुख किया। उनकी अपील में निचली अदालत के आदेश की कानूनी वैधता और साक्ष्यों के आकलन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। महिला पहलवानों का कहना है कि मामले में प्रस्तुत तथ्यों की व्याख्या करते समय जरूरी पहलुओं को सही ढंग से नहीं परखा गया।
अपील में कहा गया है कि मजिस्ट्रेट अदालत का आदेश कानूनी कसौटी पर टिकाऊ नहीं है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार,साक्ष्यों का आकलन चुनिंदा तरीके से किया गया और कुछ निष्कर्ष अनुमान तथा अटकलों पर आधारित हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि मामले में लागू होने वाले स्थापित कानूनी सिद्धांतों का उचित तरीके से पालन नहीं किया गया। महिला पहलवानों ने अदालत से निचली अदालत के फैसले की समीक्षा करने और उनकी आपत्तियों पर विचार करने की माँग की है।
अपील का एक प्रमुख पहलू पीड़िताओं के व्यवहार को लेकर की गई कथित टिप्पणियाँ भी हैं। महिला पहलवानों का आरोप है कि निचली अदालत के आदेश में पीड़िता के आचरण को परखने के लिए पुरानी सामाजिक धारणाओं और रूढ़िवादी सोच का सहारा लिया गया। उनका कहना है कि यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में किसी महिला के व्यवहार को लेकर पहले से बनी धारणाओं के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। हालाँकि,इन आपत्तियों पर अदालत का अंतिम रुख सुनवाई और कानूनी परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा।
बृजभूषण शरण सिंह और महिला पहलवानों के बीच विवाद की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी। उस समय देश की कई चर्चित महिला पहलवानों ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। पहलवानों के आरोपों के अनुसार, वर्ष 2016 से 2022 के बीच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, प्रशिक्षण शिविरों, भारतीय कुश्ती महासंघ के कार्यालय और अन्य स्थानों पर कथित अनुचित व्यवहार की घटनाएँ हुईं। इन आरोपों के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया और खेल प्रशासन में जवाबदेही को लेकर भी बहस शुरू हुई।
बृजभूषण शरण सिंह ने शुरुआत से ही अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। मामले में निचली अदालत के बरी करने के फैसले के बाद अब महिला पहलवानों की अपील पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अपील दायर किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप साबित हो गए हैं;अदालत को दोनों पक्षों की दलीलों और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर निर्णय लेना होगा।
यह मामला खेल जगत के साथ-साथ महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा,शिकायतों के निपटारे और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े सवालों के कारण भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। महिला पहलवानों ने अपने अपील पत्र में साक्ष्यों के मूल्यांकन और फैसले के आधार पर गंभीर आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं,जबकि आरोपियों को पहले निचली अदालत से राहत मिल चुकी है। अब 28 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। अदालत में जवाब दाखिल होने और दोनों पक्षों की दलीलें सामने आने के बाद ही मामले की अगली दिशा स्पष्ट हो सकेगी।
