नोवाक जोकोविच (तस्वीर क्रेडिट@Djoko_UTD)

पीटीपीए से अलग हुए नोवाक जोकोविच,पारदर्शिता और संचालन पर उठाए सवाल — कहा, ‘मेरे लिए यह अध्याय खत्म’

नई दिल्ली,5 जनवरी (युआईटीवी)- सर्बिया के महान टेनिस खिलाड़ी और 24 ग्रैंड स्लैम खिताब जीत चुके नोवाक जोकोविच एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह कोई रिकॉर्ड या नया टूर्नामेंट नहीं,बल्कि उनका अपने ही स्थापित संगठन से अलग होने का बड़ा फैसला है। जोकोविच ने घोषणा की है कि उन्होंने “प्रोफेशनल टेनिस प्लेयर्स एसोसिएशन” (पीटीपीए) से पूरी तरह दूरी बना ली है। यह वही संस्था है,जिसकी स्थापना उन्होंने कनाडाई खिलाड़ी वासेक पोस्पिसिल के साथ मिलकर खिलाड़ियों के अधिकारों और आवाज को मजबूत करने के उद्देश्य से की थी,लेकिन अब उनका कहना है कि संगठन में पारदर्शिता,गवर्नेंस और व्यक्तिगत छवि को लेकर ऐसी समस्याएँ उत्पन्न हो गईं,जिनके चलते वहाँ बने रहना उनके सिद्धांतों के अनुरूप नहीं रहा।

पीटीपीए की शुरुआत एक गैर-लाभकारी संस्था के तौर पर हुई थी। इसका घोषित लक्ष्य था कि टेनिस में खिलाड़ियों को एक स्वतंत्र और प्रभावशाली मंच प्रदान किया जाए,ताकि वे खेल के भविष्य को आकार देने वाले फैसलों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें। लंबे समय से यह शिकायत रही थी कि बड़े फैसले अक्सर टॉप प्रशासकीय निकायों — जैसे एटीपी,डब्ल्यूटीए और आईटीएफ के दायरे में ही सीमित रह जाते हैं,जबकि खिलाड़ी,जो इस खेल के केंद्र में होते हैं,कई बार खुद को हाशिये पर महसूस करते हैं। इसी पृष्ठभूमि में जोकोविच और पोस्पिसिल ने पीटीपीए को आगे बढ़ाया और इसे एक ऐसी “खिलाड़ी-प्रथम” सोच का प्रतीक बताया,जो किसी भी संस्थागत या वाणिज्यिक दबाव से मुक्त हो।

लेकिन,कुछ ही वर्षों के भीतर हालात इस मुकाम पर पहुँच गए कि जोकोविच ने सार्वजनिक रूप से संगठन से अलग होने का ऐलान कर दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने बयान में उन्होंने लिखा कि काफी सोच-विचार के बाद यह कठिन फैसला लिया गया। उनके मुताबिक,पारदर्शिता और संचालन प्रक्रिया पर लगातार उठते सवाल,साथ ही संगठन के भीतर उनकी छवि को जिस तरह पेश किया जा रहा था,उसने उनके मन में गहरी चिंताएँ पैदा कर दीं। उन्होंने अफसोस जताया कि जिस विजन के साथ उन्होंने और पोस्पिसिल ने इस संस्था की नींव रखी थी,वह अब संगठन की मौजूदा दिशा से मेल नहीं खाता।

जोकोविच ने स्पष्ट कहा कि उन्हें अपने उस प्रयास पर गर्व है,जिसने खिलाड़ियों को एक मजबूत और स्वतंत्र आवाज दी। फिर भी,जब मूल्य और दृष्टिकोण मेल न खाएँ,तो अलग होना ही बेहतर होता है। यही कारण है कि उन्होंने इसे अपने जीवन और करियर के “एक बंद अध्याय” के रूप में वर्णित किया। उनके बयान के मुताबिक, अब वे पूरी तरह अपने खेल,परिवार और ऐसे प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करेंगे,जिनसे टेनिस के विकास में वे अपने सिद्धांतों और ईमानदारी के साथ योगदान दे सकें। उन्होंने पीटीपीए और उसमें शामिल खिलाड़ियों के लिए शुभकामनाएँ व्यक्त करते हुए आशा जताई कि संगठन अपने घोषित उद्देश्यों को आगे भी सही दिशा में ले जाने का प्रयास करेगा।

जोकोविच के फैसले का संदर्भ समझने के लिए मार्च 2025 की घटनाओं को भी याद करना जरूरी है। उस समय पीटीपीए और कई खिलाड़ियों ने एटीपी,डब्ल्यूटीए, आईटीएफ और आईटीआईए सहित अन्य संस्थाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की थी। यह मामला कथित एंटीट्रस्ट उल्लंघनों से जुड़ा था,जिसमें आरोप लगाया गया कि इन निकायों के निर्णय खिलाड़ियों के हितों और प्रतिस्पर्धा के सिद्धांतों के खिलाफ जाते हैं। हालाँकि,एटीपी और डब्ल्यूटीए ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था और कहा था कि वे अपने फैसलों और नीतियों का मजबूती से बचाव करेंगे। इस विवाद ने टेनिस प्रशासन की पारदर्शिता और शक्ति संरचना पर व्यापक बहस छेड़ दी थी।

इसी पृष्ठभूमि में जोकोविच का यह कदम कई सवाल खड़े करता है। क्या पीटीपीए वास्तव में अपने उद्देश्य से भटक गया या फिर नेतृत्व और रणनीति को लेकर अंदरूनी मतभेद इतने गहरे हो गए कि एकमत राह संभव नहीं रही? खिलाड़ियों के अधिकारों पर काम करने वाले एक मंच से सबसे प्रमुख चेहरा हट जाना अपने-आप में यह संकेत देता है कि संगठन के भीतर स्थायी सहमति बनाना आसान नहीं था। कई विश्लेषक मानते हैं कि जोकोविच जैसे दिग्गज का बाहर जाना पीटीपीए की विश्वसनीयता के लिए चुनौती बन सकता है,जबकि कुछ का मानना है कि इससे संगठन के भीतर सुधार की संभावना भी खुल सकती है।

टेनिस जगत में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि खिलाड़ियों की आवाज को कितनी अहमियत दी जाती है और राजस्व बँटवारे से लेकर टूर्नामेंट कैलेंडर तक,कई अहम मुद्दों पर पारदर्शिता बढ़ाने की जरूरत है। पीटीपीए का अस्तित्व ही इस माँग से जुड़ा था। ऐसे में,जोकोविच का यह बयान कि उनके मूल्य संगठन की दिशा से मेल नहीं खाते,इस बहस को और तीखा बना देता है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि केवल एक नई संस्था बना देना पर्याप्त नहीं,बल्कि उसके अंदर चलने वाली प्रक्रियाएँ भी न्यायसंगत,खुली और जवाबदेह होनी चाहिए।

जोकोविच के व्यक्तिगत करियर पर नज़र डालें,तो उनका यह फैसला ऐसे समय आया है,जब वे अब भी उच्च स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। खेल के बाहर भी वे कई सामाजिक और परोपकारी गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। इसलिए,उनका यह कहना कि वे आगे भी टेनिस के विकास में योगदान देंगे,इस बात की ओर इशारा करता है कि वे किसी न किसी रूप में खेल की नीतिगत चर्चाओं से जुड़े रहेंगे — भले ही पीटीपीए के माध्यम से नहीं।

दूसरी ओर,एटीपी और डब्ल्यूटीए ने अपने बयान में एक बार फिर साफ कर दिया है कि वे लगने वाले आरोपों को गलत मानते हैं और अपने निर्णयों का कानूनी और नैतिक स्तर पर बचाव करते रहेंगे। इससे यह स्पष्ट है कि टेनिस प्रशासन के मौजूदा ढांचे और खिलाड़ियों की अपेक्षाओं के बीच तनाव अभी समाप्त नहीं हुआ है। आने वाले समय में यह देखने वाली बात होगी कि पीटीपीए,जोकोविच के बिना अपनी रणनीति कैसे तय करता है और क्या वह वास्तव में खिलाड़ियों के भरोसे को बरकरार रख पाता है।

अंततः,यह पूरा प्रकरण टेनिस में शक्ति,पारदर्शिता और प्रतिनिधित्व जैसे महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाता है। जोकोविच का निर्णय केवल एक व्यक्तिगत कदम नहीं,बल्कि उस व्यापक जटिलता का संकेत भी है,जो किसी भी बड़े वैश्विक खेल में प्रशासन और खिलाड़ियों के बीच संतुलन साधने की कोशिशों के साथ जुड़ी रहती है। उनके लिए यह अध्याय भले ही बंद हो गया हो, लेकिन इस बहस का अंत अभी दूर दिखाई देता है।