नई दिल्ली,5 जनवरी (युआईटीवी)- इंग्लैंड के अनुभवी बल्लेबाज और पूर्व कप्तान जो रूट ने एक बार फिर टेस्ट क्रिकेट में अपनी काबिलियत और निरंतरता का शानदार प्रदर्शन किया। सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एशेज सीरीज के पांचवें टेस्ट में उन्होंने 160 रनों की दमदार पारी खेलते हुए न केवल इंग्लैंड की पहली पारी को मजबूती दी,बल्कि अपना नाम क्रिकेट इतिहास के महान खिलाड़ियों की सूची में और ज्यादा चमकदार अक्षरों में दर्ज करा दिया। इस पारी के साथ रूट ने टेस्ट क्रिकेट में अपना 41वां शतक जड़ दिया और ऑस्ट्रेलिया के महान कप्तान रिकी पोंटिंग की बराबरी कर ली। अब दोनों संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर हैं,जबकि उनसे आगे केवल सचिन तेंदुलकर और जैक कैलिस ही मौजूद हैं।
रूट के लिए यह शतक कई मायनों में खास रहा। 2026 कैलेंडर ईयर का यह उनका पहला अंतर्राष्ट्रीय शतक था और ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर दूसरा। लगातार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बल्ला घुमाते हुए उन्होंने अपने धैर्य,तकनीक और मानसिक मजबूती का शानदार नमूना पेश किया। शुरुआती झटकों से जूझ रही इंग्लैंड टीम के लिए उनकी पारी संबल बनकर आई। यही वजह रही कि टीम एक सम्मानजनक स्कोर तक पहुँच पाई और मुकाबले में टिके रहने का भरोसा कायम रख सकी।
इंग्लिश टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला तो किया,लेकिन शुरुआती विकेटों के गिरने से ड्रेसिंग रूम में चिंता की लकीरें खिंच गईं। बेन डकेट और जैक क्रॉली ने पहले विकेट के लिए 35 रन जोड़े,लेकिन डकेट 27 रन बनाकर वापस लौट गए। इसके बाद क्रॉली भी ज्यादा देर टिक नहीं पाए और मात्र 16 रन के निजी स्कोर पर पवेलियन लौट गए। इंग्लैंड का स्कोर जब 57 तक पहुँचा,तब तक वह अपने तीन अहम विकेट खो चुका था। पिच पर गेंदबाजों को मिल रही मदद और ऑस्ट्रेलियाई आक्रमण की धार ने इंग्लिश बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा।
ऐसे मुश्किल समय में जो रूट क्रीज पर पहुँचे। उन्होंने शुरुआत में पारी को सँभालने पर फोकस किया,गेंद को ध्यान से खेला और गलत शॉट्स से परहेज़ किया। उनके साथ हैरी ब्रूक ने मिलकर टीम के लिए मजबूत प्लेटफॉर्म तैयार किया। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 169 रनों की साझेदारी हुई,जिसने मैच का रूख काफी हद तक बदल दिया। ब्रूक ने 84 रन बनाते हुए रूट का बेहतरीन साथ दिया और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की लय बिगाड़ दी। उनकी यह साझेदारी इंग्लैंड के लिए जीवनदान साबित हुई,क्योंकि इसी ने टीम को संभलने का समय और आत्मविश्वास दिया।
रूट ने एक ओर जिम्मेदारी भरा खेल दिखाया,तो दूसरी ओर जब मौका मिला,स्ट्रोक्स का इस्तेमाल भी बखूबी किया। उन्होंने 242 गेंदों का सामना करते हुए 15 चौकों की मदद से 160 रन बनाए। यह पारी उनके क्लासिक टेस्ट स्टाइल का शानदार उदाहरण रही—नपे-तुले ड्राइव,शॉर्ट बॉल के खिलाफ सटीक नियंत्रण और स्पिनरों के खिलाफ पैरों का बढ़िया इस्तेमाल। रूट ने मध्यक्रम की रीढ़ की तरह खेलते हुए न केवल साझेदारियाँ निभाईं,बल्कि हर बार नए बल्लेबाज के साथ तालीमेल भी बनाया।
जेमी स्मिथ के साथ उन्होंने 94 रनों की अहम साझेदारी की,जबकि विल जैक्स के साथ 52 रन जोड़ते हुए इंग्लैंड को 384 के प्रतिस्पर्धी स्कोर तक पहुँचाने में बड़ा योगदान दिया। स्मिथ ने 46 रन बनाए और टीम के स्कोर को आगे बढ़ाया,लेकिन असली स्तंभ रूट ही रहे,जो लगातार एक छोर सँभाले रहे। उनकी मौजूदगी ने ड्रेसिंग रूम के भीतर स्थिरता और मैदान पर आत्मविश्वास दोनों को मजबूत किया।
इस शतक के साथ जो रूट का नाम टेस्ट क्रिकेट के सर्वकालिक महान बल्लेबाजों में और मजबूती से जुड़ गया है। टेस्ट इतिहास में सबसे ज्यादा शतकों की सूची में फिलहाल सचिन तेंदुलकर 51 शतकों के साथ शीर्ष पर हैं। उनके बाद दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज जैक कैलिस 45 शतकों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। अब 41-41 शतकों के साथ रूट और रिकी पोंटिंग तीसरे पायदान पर संयुक्त रूप से मौजूद हैं। रूट की उम्र और फिटनेस को देखते हुए यह अनुमान लगाना मुश्किल नहीं कि आने वाले समय में वे और शतक जोड़कर इस सूची में ऊपर चढ़ सकते हैं।
एशेज सीरीज के संदर्भ में देखें,तो ऑस्ट्रेलिया पाँच मैचों की इस जंग में पहले से ही 3-1 की बढ़त पर है। ऐसे में इंग्लैंड के लिए यह मुकाबला सम्मान बचाने और अंतर कम करने का मौका है। टीम चाहेगी कि रूट की यह पारी निर्णायक साबित हो और गेंदबाज विपक्ष को कम स्कोर पर रोकने में सफल रहें। दूसरी तरफ,ऑस्ट्रेलिया की कोशिश रहेगी कि वे सीरीज को और मजबूती से अपने नाम करें और इंग्लैंड को वापसी का कोई मौका न दें।
रूट की इस पारी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि टेस्ट क्रिकेट में अनुभव और धैर्य की कितनी अहमियत है। जब टीम दबाव में होती है,तो वही खिलाड़ी महान कहलाता है,जो परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालकर टीम को संकट से बाहर निकाल दे। रूट ने ठीक यही किया—पहले धैर्य,फिर प्रभुत्व और अंत तक जिम्मेदारी। उनकी बल्लेबाजी ने युवा खिलाड़ियों के लिए भी एक संदेश छोड़ा कि बड़े स्कोर सिर्फ आक्रामक शॉट्स से नहीं,बल्कि अनुशासन और समझदारी से भी बनते हैं।
अब निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि इंग्लैंड का यह स्कोर मैच के नतीजे को किस दिशा में ले जाता है,लेकिन इतना तय है कि जो रूट की यह 160 रनों की पारी एशेज इतिहास की यादगार पारियों में से एक के तौर पर लंबे समय तक याद की जाएग और उनके करियर के उस मुकाम के रूप में भी,जब उन्होंने रिकी पोंटिंग जैसे महान कप्तान की बराबरी का मील का पत्थर छू लिया।
