मास्को,30 अगस्त (युआईटीवी)- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि चीन के तियानजिन में 31 अगस्त से शुरू हो रहा शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का शिखर सम्मेलन संगठन में नई ताकत का संचार करेगा और इसे समकालीन चुनौतियों का सामना करने के लिए और अधिक सक्षम बनाएगा। बीजिंग में चीन के स्वतंत्रता दिवस समारोह और एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए अपनी यात्रा की पूर्व संध्या पर दिए गए एक लिखित साक्षात्कार में पुतिन ने इस सम्मेलन को संगठन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।
पुतिन ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन न केवल सदस्य देशों को एक साझा मंच पर लाएगा,बल्कि यूरेशियाई क्षेत्र में एकजुटता को भी मजबूत करेगा। उनके अनुसार,इस तरह का सहयोग आज की दुनिया में विशेष रूप से आवश्यक है,जहाँ वैश्विक व्यवस्था लगातार बदलाव के दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा, “यह सब एक अधिक न्यायसंगत बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को आकार देने में मदद करेगा।” पुतिन का यह बयान स्पष्ट संकेत है कि रूस एससीओ को पश्चिमी प्रभुत्व वाले वैश्विक ढाँचे के विकल्प के रूप में देखता है।
रूसी राष्ट्रपति ने एससीओ की सफलता और इसके आकर्षण के पीछे के सिद्धांतों का जिक्र करते हुए कहा कि यह संगठन अपने सरल लेकिन शक्तिशाली मूल्यों के कारण विशेष है। उन्होंने कहा कि एससीओ की नींव संस्थापक दर्शन के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता,समान सहयोग की भावना,किसी तीसरे पक्ष को निशाना न बनाने और प्रत्येक राष्ट्र की विशेषताओं व संप्रभुता का सम्मान करने पर आधारित है। उनके अनुसार,यही मूल्य इसे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रासंगिक बनाते हैं और यही कारण है कि यह संगठन लगातार मजबूत होता जा रहा है।
पुतिन ने जोर देकर कहा कि एससीओ का एक प्रमुख उद्देश्य यूरेशिया में समान और अविभाज्य सुरक्षा की संरचना का निर्माण करना है। इस संदर्भ में उन्होंने संगठन के सदस्य देशों के बीच घनिष्ठ समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि साझा सुरक्षा केवल सैन्य दृष्टिकोण से नहीं बल्कि राजनीतिक,आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग के माध्यम से भी संभव है।
रूसी राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि तियानजिन शिखर सम्मेलन एससीओ की भूमिका को और अधिक प्रखर बनाएगा और वैश्विक मंच पर इसके महत्व को बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि रूस चीनी अध्यक्षता द्वारा तय की गई प्राथमिकताओं का पूरी तरह समर्थन करता है। इन प्राथमिकताओं में संगठन को मजबूत करना,सभी क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करना और अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य में एससीओ की भूमिका का विस्तार करना शामिल है। पुतिन ने कहा, “मुझे विश्वास है कि हमारे संयुक्त प्रयासों से हम एससीओ को नई गति देंगे और समय की माँग के अनुसार इसका आधुनिकीकरण करेंगे।”
सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार,पुतिन का मानना है कि एससीओ एक ऐसा मंच है,जो अंतर्राष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका पर आधारित विश्व व्यवस्था के निर्माण में सहयोग कर सकता है। उन्होंने दोहराया कि रूस हमेशा से बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थक रहा है,जहाँ हर देश की आवाज को समान महत्व दिया जाए और जहाँ सहयोग आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित हो।
गौरतलब है कि चीन 2024-2025 तक एससीओ की अध्यक्षता करेगा और इसी क्रम में तियानजिन शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। यह सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चलेगा और इसमें सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष भाग लेंगे। पुतिन ने उम्मीद जताई कि यह बैठक एससीओ को नई दिशा प्रदान करेगी और आने वाले वर्षों में इसकी भूमिका और मजबूत होगी।
एससीओ की स्थापना 2001 में हुई थी और आज यह संगठन न केवल सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग का महत्वपूर्ण मंच है,बल्कि आर्थिक,सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्रों में भी सहयोग का विस्तार कर रहा है। भारत,रूस,चीन,पाकिस्तान और मध्य एशियाई देशों के शामिल होने से यह संगठन दुनिया की एक बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में तियानजिन शिखर सम्मेलन का महत्व और बढ़ जाता है क्योंकि यह सदस्य देशों के बीच सहयोग की नई संभावनाओं को जन्म दे सकता है।
पुतिन के बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि रूस एससीओ को अपनी विदेश नीति और क्षेत्रीय रणनीति का अहम हिस्सा मानता है। पश्चिमी देशों के साथ बढ़ते तनाव और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच रूस के लिए एससीओ ऐसा मंच है जो उसे समान विचारधारा वाले देशों के साथ खड़ा होने का अवसर देता है। पुतिन ने कहा कि यह संगठन किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य सदस्य देशों की साझी प्रगति और स्थिरता सुनिश्चित करना है।
तियानजिन में होने वाला यह शिखर सम्मेलन केवल एक औपचारिक बैठक नहीं बल्कि एक ऐसा अवसर है,जहाँ एससीओ अपनी प्रासंगिकता और ताकत को नए सिरे से परिभाषित करेगा। पुतिन की उम्मीदें इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में एससीओ न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक राजनीति में भी एक प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला है। यह सम्मेलन यूरेशियाई क्षेत्र में एकजुटता का संदेश देगा और एक बहुध्रुवीय,न्यायसंगत विश्व व्यवस्था की दिशा में ठोस कदम साबित हो सकता है।
