प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@PKVarmaRanchi)

पीएम मोदी का बड़ा भरोसा,बोले- भारत के सामने चुनौतियाँ जरूर हैं,लेकिन 140 करोड़ समाधान भी हैं

नई दिल्ली,7 अक्टूबर (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर देशवासियों के सामने बड़ा भरोसा जताया है। ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के सामने चुनौतियाँ जरूर हैं,लेकिन देश के पास इन चुनौतियों का सामना करने के लिए 140 करोड़ समाधान भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भारत को अब छोटे लक्ष्य तय करने के बजाय ऐसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए,जो देश को दुनिया के अग्रणी देशों की कतार में खड़ा कर सकें।

प्रधानमंत्री ने भारत की क्षमता और भविष्य की संभावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया भारत के पायलट की चर्चा कर रही है,लेकिन वह दिन भी आएगा जब दुनिया ‘मेड इन इंडिया’ विमान की बात करेगी। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दूरदर्शी नीतियों और लगातार मेहनत की आवश्यकता होगी। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि सामूहिक प्रयासों और देशवासियों की क्षमता के दम पर भारत अपने बड़े लक्ष्यों को हासिल कर सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश को अब अपने भविष्य के लिए बड़े और असाधारण लक्ष्य निर्धारित करने का समय आ गया है। उनके मुताबिक,भारत का लक्ष्य ऐसा होना चाहिए कि दुनिया के हर क्षेत्र में देश का प्रभाव दिखाई दे और हर क्षेत्र में तिरंगा गर्व के साथ लहराए। उन्होंने एक बेहतर भारत,दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत और गरीबी से मुक्त भारत को भविष्य के महत्वपूर्ण लक्ष्यों के रूप में सामने रखा।

उन्होंने कहा कि भारत को केवल आर्थिक क्षेत्र में ही आगे नहीं बढ़ना है,बल्कि शिक्षा, मनोरंजन,स्वास्थ्य और कल्याण, खेल, नवाचार और तकनीक सहित हर क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनानी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की क्षमता इतनी व्यापक है कि दुनिया को आने वाले समय में हर क्षेत्र में भारत की ओर देखना चाहिए। इसके लिए देश के लक्ष्य भी उसी स्तर के बड़े और महत्वाकांक्षी होने चाहिए।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरबिंदो के विचारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने एक ऐसे भारत के उदय की कल्पना की थी, जो अद्भुत, गौरवशाली और महान हो। इसी तरह महर्षि अरबिंदो ने भी भारत के भाग्य के सूरज के उगने और उसकी रोशनी के पूरी दुनिया को आलोकित करने की बात कही थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के पूर्वजों ने अदम्य साहस,संघर्ष और त्याग के जरिए जिस भारत की नींव तैयार की,आज की पीढ़ी उसी विरासत को आगे बढ़ा रही है।

उन्होंने कहा कि आज भारत के पास ऐसा वातावरण है,जहाँ लोगों के सपने स्वतंत्र हैं और उन्हें पूरा करने की क्षमता भी देश के पास मौजूद है। प्रधानमंत्री के अनुसार,अब भारत अपने भविष्य की दिशा खुद तय करने की स्थिति में है। उन्होंने कहा कि आज देशवासी अपनी नियति के नियंता हैं और उन्हें अपनी सामूहिक शक्ति पर भरोसा रखना चाहिए।

विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर प्रधानमंत्री ने 2047 का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2026 में देश जिस विकसित भारत का सपना देख रहा है, वह निश्चित रूप से पूरा होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के आगे बढ़ने में अब कोई कारण बाधा नहीं बन सकता। उन्होंने देश की जनसंख्या और सामूहिक क्षमता का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 100 वर्ष पहले भारत की आबादी 40 करोड़ से भी कम थी,जबकि आज देश में 140 करोड़ से अधिक लोग हैं। उनका कहना था कि यही 140 करोड़ देशवासी मिलकर 2047 का विकसित भारत बनाएँगे और उसे जरूर बनाएँगे।

प्रधानमंत्री ने गरीबी कम करने के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस उपलब्धि को कभी असंभव माना जाता था,उसे देश ने संभव कर दिखाया है। उन्होंने दावा किया कि एक दशक के भीतर 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकलने में सफल रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इसे देशवासियों की सामूहिक क्षमता का उदाहरण बताते हुए कहा कि इसी वजह से उन्हें 140 करोड़ भारतीयों की शक्ति और सामर्थ्य पर पूरा भरोसा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में लंबे अनुभव के बाद उन्हें भारत में हो रहे बदलाव को अपनी आंखों के सामने देखने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि करीब 25 वर्षों के अनुभव के आधार पर वह पूरे भरोसे के साथ कह सकते हैं कि देश तेजी से बदल रहा है। उनके संबोधन में यह संदेश प्रमुख रहा कि भारत की विकास यात्रा केवल सरकार के प्रयासों से नहीं,बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से आगे बढ़ेगी।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकसित भारत का निर्माण किसी एक वर्ग या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए समाज के अलग-अलग वर्गों, युवाओं, महिलाओं, किसानों, उद्यमियों, कामगारों और पेशेवरों की भागीदारी जरूरी है। प्रधानमंत्री के अनुसार,भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विशाल आबादी नहीं,बल्कि इस आबादी की क्षमता, प्रतिभा और सामूहिक संकल्प है।

‘विकसित भारत संकल्प सभा’ को इसी व्यापक लक्ष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ‘सेवा ज्योति यात्रा’ के तहत आयोजित प्रमुख राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय कार्यक्रमों का हिस्सा है। इसका उद्देश्य 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को देश के लोगों तक पहुँचाना और सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक सुनिश्चित करने की दिशा में जागरूकता बढ़ाना है।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री के संबोधन में विकास के साथ जनभागीदारी पर भी विशेष जोर दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि भारत के सामने चुनौतियाँ हो सकती हैं,लेकिन हर चुनौती का सामना करने की क्षमता देशवासियों में मौजूद है। उनके मुताबिक,140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक शक्ति किसी भी बड़ी चुनौती को अवसर में बदल सकती है।

प्रधानमंत्री ने भविष्य के भारत की तस्वीर पेश करते हुए कहा कि देश को ऐसा भारत बनाना है, जो आर्थिक रूप से मजबूत हो, तकनीक में अग्रणी हो और शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल तथा नवाचार के क्षेत्र में दुनिया के लिए उदाहरण बने। उन्होंने कहा कि देश की विकास यात्रा को केवल आज की जरूरतों तक सीमित नहीं रखा जा सकता,बल्कि आने वाली पीढ़ियों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक लक्ष्य तय करने होंगे।

उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा में आत्मविश्वास बेहद महत्वपूर्ण है। आज देश के पास संसाधन भी हैं, प्रतिभा भी है और अपने सपनों को पूरा करने का सामर्थ्य भी है। इसलिए भारत को रुकने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से बड़े सपने देखने और उन्हें हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करने का आह्वान किया।

कुल मिलाकर, ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य, देश की सामूहिक शक्ति और बड़े राष्ट्रीय सपनों पर केंद्रित रहा। उन्होंने देशवासियों को भरोसा दिलाया कि भारत के सामने मौजूद चुनौतियां उसकी प्रगति की राह में स्थायी बाधा नहीं बन सकतीं। प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट रहा कि 140 करोड़ भारतीयों की भागीदारी और सामूहिक प्रयास से भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है और आने वाले वर्षों में भारत की पहचान दुनिया के अग्रणी देशों के रूप में और मजबूत हो सकती है।