नई दिल्ली,6 मार्च (युआईटीवी)- दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को विशेषाधिकार समिति की बैठक में पेश होने के लिए समन जारी किया है। साथ ही उनकी उस माँग को भी खारिज कर दिया गया है,जिसमें उन्होंने समिति की कार्यवाही का लाइव प्रसारण कराने की अपील की थी। विधानसभा सचिवालय की ओर से भेजे गए आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया गया है कि नियमों के तहत विशेषाधिकार समिति की कार्यवाही गोपनीय होती है और इसका लाइव प्रसारण नहीं किया जा सकता।
दिल्ली विधानसभा सचिवालय द्वारा 5 मार्च 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि यह पत्र केजरीवाल द्वारा 3 मार्च 2026 को भेजे गए पत्र के संदर्भ में है। दरअसल,केजरीवाल ने 18 फरवरी 2026 को जारी समन के जवाब में यह अनुरोध किया था कि विशेषाधिकार समिति की बैठक का लाइव प्रसारण किया जाए,ताकि पूरी कार्यवाही पारदर्शी तरीके से जनता के सामने आ सके। हालाँकि,विधानसभा सचिवालय ने उनके इस अनुरोध को नियमों का हवाला देते हुए अस्वीकार कर दिया।
विधानसभा सचिवालय की ओर से उप सचिव (विधान) सदानंद साह द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि विशेषाधिकार समिति की कार्यवाही पूरी तरह गोपनीय होती है। प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियमों के अनुसार इस प्रकार की बैठकों का लाइव प्रसारण या सार्वजनिक प्रसारण संभव नहीं है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि संसद और देश के अन्य राज्यों की विधानसभाओं में भी विशेषाधिकार समितियों की बैठकों का कभी प्रसारण नहीं किया गया है।
पत्र में यह भी कहा गया कि विधानसभा अध्यक्ष ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया है कि केजरीवाल,जो इस सदन के सदस्य के रूप में दस वर्षों से अधिक समय तक सेवा कर चुके हैं,उन्हें इस नियम की जानकारी नहीं है। सचिवालय के अनुसार पिछले वर्षों में विशेषाधिकार समिति की कई बैठकें आयोजित हुई हैं,लेकिन उनमें से किसी भी बैठक का कभी प्रसारण या लाइव टेलीकास्ट नहीं हुआ। इसलिए इस मामले में किसी तरह की विशेष अनुमति देने का सवाल ही नहीं उठता।
यह पूरा मामला वर्ष 2022 के कथित “फांसीघर” विवाद से जुड़ा हुआ है। इसी मामले को लेकर विशेषाधिकार समिति ने केजरीवाल को समन जारी किया है और उन्हें समिति के सामने उपस्थित होने के लिए कहा गया है। इस समन के तहत उनसे संबंधित बयान और परिस्थितियों के बारे में स्पष्टीकरण माँगा जाना है। समिति का उद्देश्य यह जाँच करना है कि उस समय दिए गए बयानों या उठाए गए सवालों से विधानसभा की गरिमा या विशेषाधिकार का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
इस मामले में 3 मार्च को केजरीवाल ने सार्वजनिक रूप से बयान देते हुए कहा था कि दिल्ली विधानसभा ने उन्हें “फांसीघर” से जुड़े सवाल पूछने के कारण बुलाया है। उन्होंने कहा था कि उन्होंने विशेषाधिकार समिति को पत्र लिखकर सूचित कर दिया है कि समन के अनुसार वे 6 मार्च को समिति के सामने उपस्थित होंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि कार्यवाही को पारदर्शी बनाने के लिए उन्होंने बैठक के लाइव प्रसारण का अनुरोध किया है।
केजरीवाल का तर्क था कि यदि समिति की कार्यवाही का लाइव प्रसारण किया जाता है,तो इससे जनता को पूरी प्रक्रिया समझने का अवसर मिलेगा और किसी तरह की गलतफहमी भी नहीं रहेगी। उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र में पारदर्शिता बहुत जरूरी है और जनता को यह जानने का अधिकार है कि उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
हालाँकि,विधानसभा सचिवालय के जवाब के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि समिति की कार्यवाही बंद कमरे में ही होगी और इसका प्रसारण नहीं किया जाएगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि केजरीवाल समिति के सामने क्या पक्ष रखते हैं और समिति इस मामले में आगे क्या निर्णय लेती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक प्रक्रियात्मक विवाद से ज्यादा राजनीतिक महत्व भी रखता है। केजरीवाल दिल्ली की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा हैं और इस तरह की कार्यवाही से राजनीतिक माहौल पर भी असर पड़ सकता है। आम आदमी पार्टी पहले भी कई मौकों पर यह आरोप लगाती रही है कि उनके नेताओं को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जाता है,जबकि विपक्षी दलों का कहना है कि कानून और नियमों के तहत ही कार्रवाई हो रही है।
दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि सदन की गरिमा और अधिकारों का उल्लंघन न हो। यदि किसी सदस्य या बाहरी व्यक्ति के बयान या कार्रवाई से सदन की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है,तो समिति उस मामले की जाँच करती है और आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है।
फिलहाल केजरीवाल के समिति के सामने पेश होने को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि समिति की कार्यवाही के बाद इस मामले में क्या निष्कर्ष निकलता है और क्या कोई आगे की कार्रवाई की जाती है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दिल्ली की राजनीति में और भी बहस देखने को मिल सकती है।
