नई दिल्ली,5 मार्च (युआईटीवी)- देश की उच्च सदन की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया गुरुवार से शुरू होने जा रही है। इस चुनाव के जरिए 10 राज्यों की कुल 37 सीटों को भरा जाएगा,जिन पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त होने वाला है। भारत निर्वाचन आयोग ने पहले ही इन सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी थी और अब इसके साथ ही राजनीतिक दलों की गतिविधियाँ भी तेज हो गई हैं।
चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार,राज्यसभा चुनावों के लिए मतदान 16 मार्च को कराया जाएगा। मतदान सुबह 9 बजे से शुरू होकर शाम 4 बजे तक चलेगा और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना की जाएगी। आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा के भीतर और पूरी पारदर्शिता के साथ पूरी की जाएगी,ताकि उच्च सदन के लिए प्रतिनिधियों का चयन निष्पक्ष तरीके से हो सके।
इन चुनावों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही उम्मीदवारों को कई चरणों से गुजरना होगा। नामांकन पत्रों की जाँच 6 मार्च को की जाएगी। इसके बाद उम्मीदवारों को अपनी उम्मीदवारी वापस लेने के लिए 9 मार्च तक का समय दिया गया है। इसके बाद अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी जाएगी और फिर मतदान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
चुनाव आयोग ने इस बार भी राज्यसभा चुनावों की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए कई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने कहा है कि मतदान के दौरान मतपत्र पर वरीयता अंकित करने के लिए केवल रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उपलब्ध कराए गए निर्धारित बैंगनी रंग के स्केच पेन का ही उपयोग किया जाएगा। यदि कोई सदस्य किसी अन्य पेन या लेखन सामग्री का इस्तेमाल करता है,तो उसका मत अमान्य घोषित किया जा सकता है। आयोग का कहना है कि इस तरह के नियमों का उद्देश्य मतदान प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकना है।
राज्यसभा के जिन 37 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है,वे देश के दस अलग-अलग राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें महाराष्ट्र,ओडिशा,तमिलनाडु,पश्चिम बंगाल,असम, बिहार,छत्तीसगढ़,हरियाणा,हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं। इन राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य राज्यसभा के लिए मतदान करते हैं,इसलिए इन चुनावों का परिणाम काफी हद तक राज्यों में मौजूद राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करता है।
राजनीतिक दलों ने इस चुनाव को लेकर अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है और उम्मीदवारों की घोषणा का दौर भी तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने कई राज्यों के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी ने बिहार से नितिन नवीन और शिवेश कुमार को उम्मीदवार बनाया है। वहीं असम से तेरश गोवाला और जोगेन मोहन को मैदान में उतारा गया है। छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार घोषित किया गया है,जबकि हरियाणा से संजय भाटिया को टिकट दिया गया है।
इसके अलावा ओडिशा से मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को उम्मीदवार बनाया गया है,जबकि पश्चिम बंगाल से राहुल सिन्हा को राज्यसभा के लिए पार्टी का प्रत्याशी घोषित किया गया है। इन नामों की घोषणा के साथ ही भाजपा ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह इन चुनावों में अपनी स्थिति को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
भाजपा ने अपने राष्ट्रीय महासचिव और बिहार प्रभारी विनोद तावड़े को भी राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। तावड़े 2019 के बाद संसदीय राजनीति में वापसी करने जा रहे हैं। पार्टी का मानना है कि संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका और राजनीतिक अनुभव उच्च सदन में पार्टी के लिए उपयोगी साबित होगा।
इसके साथ ही भाजपा ने अपने सहयोगी दल रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मौजूदा केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले को भी फिर से राज्यसभा के लिए नामांकित किया है। आठवले लंबे समय से दलित राजनीति के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं और राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान भी मजबूत है। पार्टी के इस फैसले को सामाजिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
भाजपा की सूची में कुछ नए और सामाजिक प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए भी नाम शामिल किए गए हैं। इनमें नागपुर नगर निगम की पूर्व महापौर और आदिवासी नेता माया चिंतामन इवानते का नाम भी शामिल है। इसके अलावा हिंगोली जिले के धनगर समुदाय से आने वाले रामराव वाडकुटे को भी उम्मीदवार बनाया गया है। इन नामों के जरिए पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह विभिन्न समुदायों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए प्रतिबद्ध है।
दूसरी ओर विपक्षी दल भी इस चुनाव को लेकर सक्रिय हो गए हैं। कांग्रेस ने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा संकेत देते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार को समर्थन देने की घोषणा की है। यह घोषणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की। इस दौरान एनसीपी-एसपी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले,कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार और विधायक सतेज पाटिल भी मौजूद थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह कदम महाराष्ट्र की विपक्षी राजनीति को एकजुट करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। शरद पवार लंबे समय से देश की राजनीति के अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं और उनका राज्यसभा में जाना विपक्ष के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश माना जा सकता है।
राज्यसभा चुनावों का महत्व इसलिए भी अधिक होता है क्योंकि उच्च सदन में विधायी प्रक्रियाओं पर इसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। सरकार के लिए संसद में विधेयक पारित कराने के दौरान राज्यसभा की संख्या बल काफी अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में हर चुनाव राजनीतिक दलों के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी चुनावों में विभिन्न राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियाँ भी परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं। जिन राज्यों में सत्तारूढ़ दल के पास मजबूत बहुमत है,वहाँ उसके उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। वहीं जिन राज्यों में विधानसभा का गणित जटिल है,वहाँ चुनाव अधिक रोचक हो सकता है।
राज्यसभा के इन द्विवार्षिक चुनावों के साथ ही देश की राजनीति में एक नया दौर शुरू होने जा रहा है। नामांकन प्रक्रिया की शुरुआत के साथ ही आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की सूची और राजनीतिक समीकरणों में कई दिलचस्प बदलाव देखने को मिल सकते हैं। राजनीतिक दलों की रणनीति और विधानसभा के आँकड़ों के आधार पर यह चुनाव उच्च सदन की भावी संरचना तय करेगा।
