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लाल किला मेट्रो स्टेशन कार ब्लास्ट मामला: एनआईए हिरासत में भेजे गए पाँच और आरोपी,साजिश की परतें खोलने में जुटी एजेंसी

नई दिल्ली,14 जनवरी (युआईटीवी)- दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास कार में हुए भीषण विस्फोट के मामले में जाँच तेज होती जा रही है। इस मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने डॉक्टर शाहीन,मुफ्ती इरफान अहमद,जासिर बिलाल वानी, डॉ. अदील अहमद और मुजम्मिल को तीन दिनों की राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी (एनआईए) की हिरासत में भेज दिया है। अदालत का यह आदेश उस समय आया जब एनआईए ने सभी आरोपियों से गहन पूछताछ की आवश्यकता बताते हुए उनकी पुलिस रिमांड की माँग की। एजेंसी का कहना है कि इन आरोपियों से पूछताछ के जरिए इस आतंकी हमले के पीछे की पूरी साजिश,नेटवर्क और विदेशी संपर्कों का खुलासा किया जा सकता है।

एनआईए ने मंगलवार को विशेष रूप से डॉक्टर शाहीन की पुलिस हिरासत की माँग की थी। इससे पहले,पिछले महीने पटियाला हाउस कोर्ट ने डॉ. शाहीन को न्यायिक हिरासत में भेजा था। अब जाँच एजेंसी का तर्क है कि जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ रही है,कई नए तथ्य सामने आ रहे हैं और ऐसे में आरोपियों से आमने-सामने बैठाकर विस्तृत पूछताछ जरूरी हो गई है। एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि विस्फोट की योजना कैसे बनाई गई,इसमें कितने लोग शामिल थे और किन-किन माध्यमों से हथियार और विस्फोटक सामग्री जुटाई गई।

एनआईए के अनुसार, शुरुआती जाँच में यह संकेत मिले हैं कि इस आतंकी मॉड्यूल के संबंध जैश-ए-मोहम्मद जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से हो सकते हैं। एजेंसी का मानना है कि यह केवल एक स्थानीय साजिश नहीं थी,बल्कि इसके तार सीमा पार बैठे आतंकवादी हैंडलरों से भी जुड़े हुए हैं। इसी वजह से जाँच में केंद्रीय और राज्य स्तर की कई एजेंसियाँ मिलकर काम कर रही हैं, ताकि पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके।

इस मामले में अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार लोगों में डॉ. मुजम्मिल शकील गनी,डॉ. शाहीन सईद,मुफ्ती इरफान अहमद,जासिर बिलाल वानी और अन्य शामिल हैं। जाँच एजेंसियों का कहना है कि ये सभी किसी न किसी रूप में इस आतंकी साजिश से जुड़े हुए थे। कुछ आरोपियों पर योजना बनाने का आरोप है,तो कुछ पर लॉजिस्टिक सपोर्ट और संसाधन उपलब्ध कराने का शक है। एनआईए का दावा है कि पूछताछ के दौरान कुछ आरोपियों ने ऐसे सुराग दिए हैं,जिनसे विदेशी फंडिंग और आतंकी संगठनों से संपर्क की पुष्टि होती है।

इससे पहले 5 जनवरी को पटियाला हाउस कोर्ट ने इस मामले में आरोपी यासिर अहमद डार की न्यायिक हिरासत बढ़ाते हुए उसे 16 जनवरी तक एनआईए की हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। यासिर अहमद डार को एनआईए हिरासत की अवधि पूरी होने के बाद अदालत में पेश किया गया था। इस दौरान एनआईए ने रिमांड बढ़ाने की माँग की थी,जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। एजेंसी का कहना है कि यासिर अहमद डार से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियाँ सामने आई हैं,लेकिन अभी भी कई सवालों के जवाब मिलना बाकी हैं।

एनआईए की जाँच के अनुसार,इस आतंकी हमले का मुख्य षड्यंत्रकारी उमर-उन-नबी था,जो 10 नवंबर को लाल किला इलाके में विस्फोटक से भरी कार चला रहा था। जाँच एजेंसी का कहना है कि उमर-उन-नबी को इस हमले को अंजाम देने के लिए पूरी ट्रेनिंग दी गई थी और उसे यह निर्देश दिए गए थे कि वह भीड़भाड़ वाले इलाके में कार खड़ी कर विस्फोट करे,ताकि ज्यादा-से-ज्यादा नुकसान हो। इस विस्फोट में 15 लोगों की जान चली गई थी,जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

इस हमले के बाद राजधानी दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। लाल किला जैसे ऐतिहासिक और संवेदनशील इलाके में इस तरह का विस्फोट होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। इसके बाद से दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने राजधानी में सतर्कता बढ़ा दी है और कई संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

एनआईए का कहना है कि अब तक इस मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है,जिनमें डॉ. मुजम्मिल गनई,डॉ. अदील राथेर,डॉ. शाहीन सईद सहित अन्य आरोपी शामिल हैं। एजेंसी को उम्मीद है कि हिरासत के दौरान पूछताछ से इस साजिश में शामिल अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं और आगे और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं। जाँच अधिकारियों का मानना है कि यह मामला अभी पूरी तरह से खुला नहीं है और आने वाले दिनों में कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

फिलहाल,पटियाला हाउस कोर्ट के ताजा आदेश के बाद एनआईए को आरोपियों से पूछताछ के लिए तीन दिन का समय मिला है। एजेंसी का फोकस इस आतंकी हमले की हर कड़ी को जोड़ने और यह सुनिश्चित करने पर है कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। देश की सुरक्षा के लिहाज से यह मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है और जाँच पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।