होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की नई रणनीति, संसद की समिति ने सुरक्षा और समुद्री आवाजाही की योजना को दी मंजूरी (तस्वीर क्रेडिट@np_nationpress)

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की नई रणनीति,संसद की समिति ने सुरक्षा और समुद्री आवाजाही की योजना को दी मंजूरी

तेहरान,10 अगस्त (युआईटीवी)- होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अपनी समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति ने होर्मुज जलडमरूमध्य तथा खाड़ी की सुरक्षा और टिकाऊ प्रगति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार रणनीतिक कार्य योजना के सामान्य ढाँचे को मंजूरी दे दी है। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, समिति की बैठक में योजना पर विस्तार से चर्चा हुई और इसे बिना किसी विरोध के स्वीकृति प्रदान की गई।

समिति के प्रवक्ता हसन कशकावी ने बताया कि योजना के सामान्य ढांचे को मंजूरी देने से पहले सांसदों ने ईरान की संबंधित संस्थाओं से प्राप्त सूचनाओं और रिपोर्टों की समीक्षा की। इसके बाद समिति के सदस्यों ने योजना पर चर्चा की और इसे आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। आईआरएनए के अनुसार,इस प्रस्ताव को 13 जुलाई को औपचारिक रूप से ईरानी संसद के सामने पेश किया गया था। अब समिति की मंजूरी के बाद इस पर आगे की संसदीय प्रक्रिया बढ़ने की संभावना है।

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान की रणनीतिक और आर्थिक नीति में बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह संकीर्ण समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है तथा दुनिया के ऊर्जा व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में शामिल है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या समुद्री आवाजाही में बाधा का असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा पर ही नहीं,बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।

ईरान ने 28 फरवरी को होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया था। इसके तहत उसने इजरायल और अमेरिका के जहाजों या उनसे जुड़े जहाजों के सुरक्षित गुजरने पर रोक लगा दी थी। ईरान की ओर से यह कदम उसके क्षेत्र में हुए संयुक्त हमलों के बाद उठाया गया था। इसके बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है।

क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बीच ईरान और अमेरिका के बीच संबंध भी प्रभावित हुए हैं। जून में दोनों देशों ने लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों को अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिनों के भीतर बातचीत करनी थी। हालाँकि,इसके बाद क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ने के कारण बातचीत की प्रक्रिया का भविष्य अनिश्चित हो गया है।

ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने समझौते की भावना का पालन नहीं किया। दूसरी ओर अमेरिका ने ईरान की समुद्री गतिविधियों और क्षेत्रीय सैन्य क्षमता को लेकर लगातार चिंता जताई है। इसी बीच जुलाई में अमेरिकी सेना ने ईरान के ठिकानों पर कई बार हमले किए। अमेरिकी पक्ष का कहना था कि ये कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर ईरान की ओर से किए गए हमलों के जवाब में की गई थी। अमेरिका ने यह भी कहा था कि उसका उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को कम करना है।

अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सुविधाओं पर मिसाइल तथा ड्रोन से हमले किए। दोनों पक्षों के बीच इस तरह की सैन्य कार्रवाई ने पहले से तनावपूर्ण स्थिति को और गंभीर बना दिया। इसके बाद समुद्री मार्गों की सुरक्षा,जहाजों की आवाजाही और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी है।

इसी पृष्ठभूमि में ईरानी संसद की समिति की ओर से रणनीतिक कार्य योजना को मंजूरी दिए जाने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। योजना का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ समुद्री मार्गों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना बताया गया है। हालाँकि,योजना के विस्तृत प्रावधान अभी सार्वजनिक तौर पर पूरी तरह सामने नहीं आए हैं।

ईरान और ओमान के बीच भी होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित समुद्री आवाजाही के लिए एक नए रास्ते को लेकर बातचीत चल रही है। दोनों देश पिछले कुछ हफ्तों से इस संबंध में संभावित व्यवस्था पर चर्चा कर रहे हैं। यदि दोनों पक्ष किसी वैकल्पिक या सुरक्षित समुद्री मार्ग पर सहमति बनाते हैं,तो इससे क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को लेकर पैदा हुई चिंताओं को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

ओमान पहले भी क्षेत्रीय तनाव के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच संवाद बहाल कराने के प्रयासों में भी ओमान की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित समुद्री आवाजाही को लेकर दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत को भी व्यापक क्षेत्रीय कूटनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है।

हालाँकि,ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल अमेरिका के साथ कोई प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हो रही है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार,विदेश मंत्री ने विदेश मंत्रालय के राजनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन केंद्र में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बातचीत दोबारा शुरू करने के रास्ते तलाशने के लिए मध्यस्थ देश अभी भी प्रयास कर रहे हैं।

अराघची ने कहा कि ईरान की नजर में अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के लिए कुछ शर्तों का पूरा होना जरूरी है। उनका कहना है कि जब तक अमेरिका समझौता ज्ञापन का उल्लंघन बंद नहीं करता और कथित उल्लंघनों की भरपाई नहीं करता,तब तक बातचीत दोबारा शुरू नहीं की जा सकती। ईरानी विदेश मंत्री की इस टिप्पणी से साफ है कि दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी अभी भी बनी हुई है।

ईरान का रुख ऐसे समय में सामने आया है,जब होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा का मुद्दा अंतर्राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुका है। इस जलडमरूमध्य से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति होती है। यदि यहां लंबे समय तक जहाजों की आवाजाही बाधित होती है या सैन्य टकराव बढ़ता है,तो इसका असर अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। इससे तेल की कीमतों,समुद्री बीमा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।

ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति की मंजूरी को इसी व्यापक रणनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है। ईरान एक ओर अपनी समुद्री और सैन्य सुरक्षा को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है,वहीं दूसरी ओर ओमान के साथ सुरक्षित समुद्री आवाजाही को लेकर बातचीत भी जारी रखे हुए है। इससे संकेत मिलता है कि तेहरान सुरक्षा और कूटनीति दोनों स्तरों पर अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।

क्षेत्रीय तनाव के बीच सबसे बड़ी चुनौती यह है कि समुद्री सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाए। ईरान अपने क्षेत्रीय हितों और सुरक्षा अधिकारों पर जोर दे रहा है,जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी वाणिज्यिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही को प्राथमिकता दे रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और सैन्य कार्रवाई ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

अब सबकी नजर ईरानी संसद में प्रस्तावित रणनीतिक कार्य योजना की आगे की प्रक्रिया और होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान-ओमान वार्ता के नतीजे पर है। साथ ही,मध्यस्थ देशों की कोशिशों के बावजूद ईरान और अमेरिका के बीच सीधी बातचीत कब शुरू होगी,यह भी महत्वपूर्ण सवाल बना हुआ है। यदि दोनों देशों के बीच संवाद बहाल होता है और समुद्री सुरक्षा को लेकर कोई व्यापक व्यवस्था बनती है,तो इससे खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखते हुए सुरक्षा और समुद्री आवाजाही से जुड़ी नई योजना की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। संसद की समिति की मंजूरी के बाद यह मुद्दा आने वाले दिनों में ईरान की घरेलू राजनीति के साथ-साथ क्षेत्रीय कूटनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वहीं, अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर ईरान की कड़ी शर्तें बताती हैं कि दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की राह अभी आसान नहीं है।