जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री साने ताकाइची (तस्वीर क्रेडिट@ashokshera94)

जापान में टाइफून नंबर 15 का खतरा बढ़ा,प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने लोगों से समय रहते सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की

टोक्यो,10 अगस्त (युआईटीवी)- जापान में खराब होते मौसम और शक्तिशाली टाइफून नंबर 15 के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने देशवासियों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने भारी बारिश,भूस्खलन,बाढ़,तेज हवाओं और ऊँची समुद्री लहरों की आशंका को देखते हुए लोगों से समय रहते सुरक्षित स्थानों पर जाने और मौसम संबंधी ताजा सूचनाओं पर लगातार नजर रखने को कहा है। प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी है कि तूफान के प्रभाव से देश के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में कई तरह की प्राकृतिक आपदाओं का खतरा पैदा हो सकता है।

प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि टाइफून नंबर 15 फिलहाल जापान के पूर्वी हिस्से के समुद्र में उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है। मौसम संबंधी पूर्वानुमानों के मुताबिक,तूफान 11 तारीख को दक्षिणी तोहोकू और उत्तरी कांटो क्षेत्रों के काफी करीब पहुँच सकता है। इसके तट से टकराने की भी आशंका जताई गई है। ऐसे में प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को पहले से तैयार रहने और स्थानीय अधिकारियों की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार तूफान की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय के संकट प्रबंधन केंद्र में स्थापित सूचना समन्वय कक्ष के माध्यम से मौसम और आपदा से जुड़ी जानकारियाँ जुटाई जा रही हैं। सरकार संभावित परिस्थितियों के आधार पर आवश्यक व्यवस्थाओं को और मजबूत करने की तैयारी में है। आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों को पूरी तरह तैयार रहने और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

टाइफून नंबर 15 के कारण सबसे अधिक चिंता तोहोकू क्षेत्र के प्रशांत महासागर से लगे इलाकों को लेकर जताई गई है। प्रधानमंत्री के अनुसार, 11 तारीख की देर सुबह से लेकर देर रात तक इस क्षेत्र में भारी बारिश हो सकती है। लगातार तेज बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में ढलान वाले क्षेत्रों और उन स्थानों पर रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है,जहाँ पहले भी भारी बारिश के दौरान भूस्खलन की घटनाएँ हुई हैं।

भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने और उनके उफान पर आने की आशंका है। प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की है कि वे नदियों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें और स्थानीय प्रशासन की चेतावनी को नजरअंदाज न करें। जिन इलाकों में बाढ़ का खतरा अधिक है,वहाँ रहने वाले लोगों को हालात बिगड़ने का इंतजार किए बिना सुरक्षित स्थानों पर चले जाने की सलाह दी गई है।

तूफान के साथ तेज हवाओं का भी खतरा बना हुआ है। प्रधानमंत्री तकाइची ने बताया कि 11 तारीख को सुबह से शाम तक कई इलाकों में तेज हवाएँ चल सकती हैं। इन हवाओं के कारण इमारतों और अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुँचने की आशंका है। इसके अलावा पेड़ गिरने,बिजली व्यवस्था प्रभावित होने और यातायात सेवाओं में बाधा आने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। प्रशासन ने लोगों से तूफान के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलने की अपील की है।

समुद्री इलाकों में भी खतरा कम नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 11 तारीख की देर सुबह से देर रात तक ऊँची समुद्री लहरें उठ सकती हैं। समुद्री उफान के कारण जहाजों और तटीय सुविधाओं को नुकसान पहुँचने की आशंका है। मछुआरों,समुद्री परिवहन से जुड़े लोगों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों से विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। प्रशासन की ओर से समुद्र में जाने से बचने और तटीय क्षेत्रों में जारी चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।

कांटो-कोशिन क्षेत्र को लेकर भी मौसम विभाग और प्रशासन ने सावधानी बरतने को कहा है। प्रधानमंत्री के अनुसार,11 तारीख को लगभग दोपहर से देर रात तक इस क्षेत्र में ऊँची समुद्री लहरों का खतरा बना रह सकता है। निचले इलाकों में जलभराव और नदियों के जलस्तर में वृद्धि की भी आशंका है। भारी बारिश और नदी के उफान की स्थिति में अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निकासी निर्देशों को गंभीरता से लेने की अपील की गई है।

प्रधानमंत्री तकाइची ने देशवासियों से कहा कि आपदा के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात समय रहते खतरे को पहचानना और सुरक्षित स्थान पर पहुँचना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने इलाके के संभावित खतरे वाले स्थानों,सुरक्षित निकासी केंद्रों और वहाँ तक पहुँचने वाले रास्तों की जानकारी पहले से हासिल कर लें। उन्होंने कहा कि आपात स्थिति आने के बाद रास्ते बंद हो सकते हैं या यातायात प्रभावित हो सकता है,इसलिए पहले से तैयारी करना जरूरी है।

उन्होंने लोगों से रेडियो,टेलीविजन,इंटरनेट और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी मौसम एवं आपदा संबंधी सूचनाओं पर लगातार नजर रखने को कहा। मौसम की स्थिति तेजी से बदल सकती है और स्थानीय स्तर पर खतरे की गंभीरता अलग-अलग हो सकती है। इसलिए लोगों को केवल सोशल मीडिया पर प्रसारित सूचनाओं पर निर्भर रहने के बजाय आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर निर्णय लेने की सलाह दी गई है।

प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से बुजुर्गों,बच्चों और उन लोगों पर ध्यान देने की अपील की है,जिन्हें आपात स्थिति में सुरक्षित स्थान पर पहुँचने के लिए अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता हो सकती है। परिवारों को सलाह दी गई है कि वे पहले से आपातकालीन योजना तैयार रखें और जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे से संपर्क बनाए रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

जापान पहले भी शक्तिशाली तूफानों,भूकंप,बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करता रहा है। ऐसे में देश की आपदा प्रबंधन प्रणाली को काफी मजबूत माना जाता है। फिर भी अत्यधिक बारिश और तेज हवाओं के दौरान स्थानीय स्तर पर अचानक परिस्थितियाँ गंभीर हो सकती हैं। इसी वजह से सरकार ने टाइफून नंबर 15 के कमजोर या मजबूत होने की स्थिति पर लगातार नजर रखने और जरूरत के अनुसार बचाव एवं राहत व्यवस्था को सक्रिय करने की तैयारी की है।

प्रधानमंत्री तकाइची ने कहा कि सरकार लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी और परिस्थितियों के अनुसार आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने देशवासियों से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और किसी भी खतरे को हल्के में न लेने की अपील की।

फिलहाल टाइफून नंबर 15 जापान के पूर्वी समुद्री क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है और इसके कारण पूर्वी तथा उत्तर-पूर्वी जापान के कई हिस्सों में मौसम बिगड़ने की आशंका है। भारी बारिश,बाढ़,भूस्खलन,तेज हवाओं और ऊँची समुद्री लहरों का खतरा देखते हुए प्रशासन हाई अलर्ट पर है। प्रधानमंत्री की अपील के बाद अब संवेदनशील क्षेत्रों के लोगों से समय रहते सुरक्षित स्थानों पर जाने और आपदा से जुड़ी आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखने को कहा गया है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि किसी भी संभावित खतरे के सामने सावधानी बरतना और समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुँचना ही सबसे प्रभावी बचाव है।