अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@garrywalia_)

होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी दबाव कायम,ट्रंप बोले—समझौते तक नहीं खुलेगा रास्ता,अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट पर दबदबा बनाए रखेगा ट्रंप

वाशिंगटन,24 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि जब तक ईरान कोई ठोस समझौता नहीं करता,तब तक अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा। ट्रंप ने साफ कहा कि यह अहम समुद्री मार्ग केवल रणनीतिक महत्व का नहीं है,बल्कि इसे ईरान पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का “पूरा नियंत्रण” है और यह मार्ग तभी खोला जाएगा जब ईरान कोई समझौता करेगा या फिर क्षेत्र में सकारात्मक स्थिति बनेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मार्ग को बंद रखने का मुख्य उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना है। उनके अनुसार,यदि यह रास्ता खुला रहता है तो ईरान प्रतिदिन लगभग 500 मिलियन डॉलर की कमाई कर सकता है,जिसे रोकना अमेरिका की रणनीति का हिस्सा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह एक संकरा समुद्री मार्ग है,जो खाड़ी के प्रमुख तेल उत्पादक देशों को अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ता है। यहाँ किसी भी प्रकार की रुकावट का सीधा असर तेल की आपूर्ति और कीमतों पर पड़ता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ती सैन्य और राजनीतिक गतिविधियों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।

हालाँकि,ट्रंप ने यह स्वीकार किया कि इस स्थिति का असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है,खासकर ईंधन की कीमतों के रूप में। उन्होंने कहा कि अल्पकालिक प्रभाव देखने को मिल सकता है,लेकिन उन्होंने भरोसा जताया कि बाजार फिलहाल स्थिर बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पहले आशंका थी कि तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं,लेकिन ऐसा नहीं हुआ और कीमतें अपेक्षा से कम स्तर पर बनी हुई हैं।

ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अमेरिका में रिकॉर्ड स्तर पर हो रहा तेल और गैस उत्पादन इस स्थिति को संतुलित बनाए हुए है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस समय अपने इतिहास में सबसे अधिक ऊर्जा उत्पादन कर रहा है,जिससे वैश्विक आपूर्ति में कमी के बावजूद संतुलन बना हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि जब होर्मुज जलडमरूमध्य सीमित रूप से संचालित हो रहा है,तब दुनिया भर के जहाज अमेरिका के तटीय राज्यों जैसे टेक्सास,लुइसियाना और अलास्का की ओर रुख कर रहे हैं,ताकि वहाँ से तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

इस पूरे घटनाक्रम को ट्रंप ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा। उनके अनुसार,यह केवल आर्थिक दबाव की रणनीति नहीं है,बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा है। उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले का समाधान जल्द नहीं निकलने वाला है और अमेरिका इस पर लंबी रणनीति के तहत काम कर रहा है।

ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की जल्दबाजी नहीं है। उनके अनुसार,अमेरिका के पास पर्याप्त समय और संसाधन हैं,जिससे वह अपनी रणनीति को धीरे-धीरे लागू कर सकता है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे तेल का प्रवाह सीमित होगा,ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ता जाएगा,जिससे उसे अंततः बातचीत के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर यह रुख वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है,तो अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है और कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। वहीं,यह भी आशंका जताई जा रही है कि इस तरह की रणनीति से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।

ट्रंप का यह बयान अमेरिका की उस नीति को दर्शाता है,जिसमें आर्थिक और सामरिक दबाव के जरिए ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश की जा रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान इस पर कैसी प्रतिक्रिया देता है और क्या आने वाले समय में कोई कूटनीतिक समाधान निकल पाता है या नहीं। फिलहाल,होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक राजनीति के केंद्र में बना हुआ है और इसकी स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।