नई दिल्ली,7 अगस्त (युआईटीवी)- थाईलैंड के नोंथबुरी प्रांत में शुक्रवार को एक स्कूल के भीतर हुई अंधाधुंध फायरिंग की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। राजधानी बैंकॉक के उत्तर में स्थित नोंथबुरी प्रांत के बंग क्रुई जिले में मौजूद देबसिरिन नोंथबुरी स्कूल में एक छात्र ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। इस दर्दनाक घटना में कम से कम एक शिक्षक की मौत हो गई,जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और छात्र अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। पुलिस और बचाव दल ने तत्काल मौके पर पहुँचकर स्थिति को नियंत्रित किया और छात्रों तथा कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला।
स्थानीय बचाव संगठन पोह टेक तुंग फाउंडेशन के अनुसार शुरुआती रिपोर्ट में दो लोगों की मौत और 15 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई। घायलों में एक शिक्षक और कई छात्र शामिल हैं। एक घायल की हालत गंभीर बताई गई है,जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। अधिकारियों ने घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया, जहाँ उनका उपचार जारी है।
यह घटना उस समय हुई जब स्कूल में सामान्य रूप से पढ़ाई चल रही थी। देबसिरिन नोंथबुरी स्कूल नोंथबुरी प्रांत के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में से एक है,जहाँ लगभग तीन हजार छात्र शिक्षा प्राप्त करते हैं। अचानक हुई गोलीबारी से पूरे परिसर में भय और भगदड़ का माहौल बन गया। कई छात्र कक्षाओं से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागे, जबकि स्कूल का स्टाफ बच्चों को सुरक्षित निकालने में जुट गया। कुछ ही देर में पुलिस और आपातकालीन सेवाओं की टीमें मौके पर पहुँच गईं और पूरे क्षेत्र को घेर लिया गया।
नोंथाबुरी प्रांतीय पुलिस के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल डेचरापी कोंगडी ने बताया कि घटना को अंजाम देने वाला संदिग्ध एक छात्र था। पुलिस के अनुसार,गोलीबारी के बाद उसने खुद को भी गोली मार ली,जिससे उसकी मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि घटना के पीछे की वजहों की गहन जाँच की जा रही है और फिलहाल किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी छात्र के पास हथियार कैसे पहुँचा और उसने इस हमले की योजना कब और कैसे बनाई।
थाईलैंड के सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने पुष्टि की कि अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। सुरक्षा बलों ने पूरे स्कूल परिसर की तलाशी ली ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी अन्य प्रकार का खतरा मौजूद न हो। इसके बाद छात्रों और शिक्षकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया। प्रशासन ने अभिभावकों से शांत रहने की अपील की और कहा कि सभी छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
घटना के बाद स्कूल परिसर के बाहर बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों की जानकारी लेने के लिए पहुंच गए। कई परिवारों में चिंता और भय का माहौल देखने को मिला। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण है और सभी छात्रों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। घायलों के परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की भी घोषणा की गई है।
इस घटना ने एक बार फिर थाईलैंड में स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था और हथियारों की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले कुछ वर्षों में देश में गोलीबारी की कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं,जिनके बाद भी हथियारों तक आसान पहुँच को लेकर चिंता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा उपायों को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है,ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
थाईलैंड दक्षिण-पूर्व एशिया के उन देशों में शामिल है,जहाँ आम नागरिकों के पास बड़ी संख्या में हथियार मौजूद हैं। स्मॉल आर्म्स सर्वे के वर्ष 2017 के आँकड़ों के अनुसार,देश में एक करोड़ तीन लाख से अधिक हथियार आम लोगों के पास थे। इसका अर्थ है कि प्रत्येक 100 लोगों पर लगभग 15 बंदूकें उपलब्ध थीं। यह आँकड़ा क्षेत्र के अधिकांश अन्य देशों की तुलना में काफी अधिक माना जाता है।
वहीं,यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज डेटाबेस के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया में फिलीपींस के बाद थाईलैंड ऐसा देश है,जहाँ बंदूक से होने वाली हत्याओं की संख्या सबसे अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि हथियारों की आसान उपलब्धता और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ मिलकर ऐसी घटनाओं का जोखिम बढ़ा सकती हैं। इसलिए केवल कानून को सख्त बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा,बल्कि मानसिक स्वास्थ्य सहायता,स्कूलों में परामर्श सेवाओं और समय रहते जोखिम की पहचान करने वाली व्यवस्थाओं को भी मजबूत करना आवश्यक है।
फिलहाल पुलिस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जाँच कर रही है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश में जुटे हैं कि आरोपी छात्र के मन में इस हमले की क्या वजह थी और क्या उसने पहले किसी तरह के संकेत दिए थे। जाँच पूरी होने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।
इस दर्दनाक गोलीबारी ने न केवल थाईलैंड बल्कि पूरी दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि शैक्षणिक संस्थानों को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। शिक्षा के मंदिर माने जाने वाले स्कूलों में इस तरह की हिंसा समाज के लिए गहरी चिंता का विषय है। सरकार,सुरक्षा एजेंसियों और शैक्षणिक संस्थानों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति न हो और छात्रों तथा शिक्षकों को भयमुक्त और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
