नई दिल्ली,13 अगस्त (युआईटीवी)- भारतीय रेलवे ने यात्रियों को टिकट बुकिंग से लेकर ट्रेन की जानकारी और यात्री सहायता तक कई सेवाएँ एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। आरक्षित और अनारक्षित टिकटों की डिजिटल खरीद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रेलवे ने एक जुलाई 2025 को ‘रेलवन’ ऐप लॉन्च किया था। यह ऐप यात्रियों को मोबाइल फोन के जरिए आरक्षित और अनारक्षित टिकट बुक करने की सुविधा देने के साथ-साथ भारतीय रेलवे की कई सार्वजनिक सेवाओं को एक ही मंच पर उपलब्ध कराता है। रेल मंत्री,सूचना एवं प्रसारण मंत्री तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में रेलवे की डिजिटल सेवाओं और उनके इस्तेमाल से जुड़े आँकड़ों की जानकारी दी।
रेलवन ऐप को भारतीय रेलवे की विभिन्न डिजिटल सेवाओं को एकीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसके माध्यम से यात्री आरक्षित टिकट,अनारक्षित टिकट और प्लेटफॉर्म टिकट बुक कर सकते हैं। इसके अलावा ट्रेन पूछताछ,पीएनआर पूछताछ,रेल सहायता और यात्रा से संबंधित अन्य सेवाओं का लाभ भी इसी मंच से उठाया जा सकता है। इससे यात्रियों को अलग-अलग रेलवे सेवाओं के लिए अलग-अलग मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करने की जरूरत कम हो गई है। ऐप में सिंगल-साइन-ऑन की सुविधा भी दी गई है,जिसके तहत उपयोगकर्ता एक ही लॉगिन के जरिए कई सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।
रेलवे की ओर से डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने का उद्देश्य यात्रियों के लिए यात्रा प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और सरल बनाना है। पहले यात्रियों को टिकट बुकिंग,ट्रेन की स्थिति जानने,पीएनआर देखने और अन्य सेवाओं के लिए अलग-अलग माध्यमों का सहारा लेना पड़ता था। रेलवन के जरिए इन सेवाओं को एक मंच पर लाने से यात्रियों को मोबाइल फोन पर ही रेलवे से जुड़ी जरूरी सुविधाएँ मिलने लगी हैं। खासकर स्मार्टफोन और डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल बढ़ने के साथ रेलवे की ऑनलाइन सेवाओं का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है।
रेलवे के आँकड़ों के अनुसार,आरक्षित टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग में पिछले एक दशक से अधिक समय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्तमान में आरक्षित टिकटों में लगभग 89 प्रतिशत टिकट ऑनलाइन माध्यम से बुक किए जा रहे हैं। वर्ष 2013-14 में यह आँकड़ा लगभग 49 प्रतिशत था। यानी एक दशक से अधिक समय में ऑनलाइन आरक्षित टिकट बुकिंग की हिस्सेदारी में बड़ा इजाफा हुआ है। यह बदलाव यात्रियों की डिजिटल सेवाओं पर बढ़ती निर्भरता और रेलवे की ऑनलाइन टिकट व्यवस्था के विस्तार को दर्शाता है।
अनारक्षित टिकटों की डिजिटल बुकिंग में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रेलवे के मुताबिक काउंटर के अलावा अन्य माध्यमों से बुक किए जाने वाले अनारक्षित टिकटों की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 39 प्रतिशत हो गई है। अनारक्षित टिकटों की डिजिटल खरीद को बढ़ावा देने से यात्रियों को स्टेशन के टिकट काउंटर पर लंबी कतार में खड़े होने की जरूरत कम होती है। इससे यात्रियों के समय की बचत के साथ-साथ रेलवे स्टेशनों पर टिकट काउंटरों का दबाव भी कम किया जा सकता है।
रेलवे की डिजिटल व्यवस्था का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा राष्ट्रीय रेल पूछताछ प्रणाली है। वर्ष 2000 में शुरू की गई राष्ट्रीय रेल पूछताछ प्रणाली यात्रियों को लगभग वास्तविक समय में ट्रेनों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराती है। इसमें ट्रेन के आगमन और प्रस्थान की स्थिति के साथ-साथ ट्रेन का कार्यक्रम भी शामिल होता है। यात्रियों को यह जानकारी पूछताछ काउंटरों,राष्ट्रीय रेल पूछताछ प्रणाली की वेबसाइट,मोबाइल एप्लिकेशन और देशभर में उपलब्ध रेल पूछताछ संख्या 139 के माध्यम से मिलती है।
राष्ट्रीय रेल पूछताछ प्रणाली में यात्रियों की जरूरत के अनुसार कई सुविधाएँ शामिल हैं। ‘अपनी ट्रेन ढूंढें’, ‘लाइव स्टेशन’, ‘ट्रेन कार्यक्रम’ और ‘स्टेशनों के बीच ट्रेनें’ जैसी सुविधाओं के जरिए यात्री अपने सफर से जुड़ी जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। ट्रेन की वर्तमान स्थिति,किसी स्टेशन पर उसके पहुँचने का अनुमान और उसके संचालन से जुड़ी जानकारी यात्रियों के लिए यात्रा की योजना बनाने में काफी उपयोगी साबित होती है।
राष्ट्रीय रेल पूछताछ प्रणाली का मोबाइल एप्लिकेशन भी लंबे समय से यात्रियों के बीच इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका एंड्रॉयड संस्करण अक्टूबर 2014 में और आईओएस संस्करण अक्टूबर 2015 में लॉन्च किया गया था। रेलवे के अनुसार,एक अगस्त 2026 तक इस एप्लिकेशन के एंड्रॉयड संस्करण को 4.5 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका था,जबकि आईओएस संस्करण के डाउनलोड की संख्या 16 लाख से अधिक रही। ये आंकड़े बताते हैं कि यात्रियों के बीच ट्रेन संबंधी डिजिटल जानकारी की मांग कितनी तेजी से बढ़ी है।
राष्ट्रीय रेल पूछताछ प्रणाली वर्तमान में लगभग 80 हजार उपयोगकर्ताओं को सँभालती है और प्रतिदिन छह करोड़ से अधिक पूछताछ का निष्पादन करती है। इतने बड़े पैमाने पर पूछताछ को सँभालना रेलवे की डिजिटल सूचना प्रणाली के विस्तार को दर्शाता है। यात्रियों द्वारा इस सेवा की व्यापक रूप से सराहना किए जाने की बात भी रेलवे की ओर से कही गई है। डिजिटल माध्यमों से ट्रेन की जानकारी उपलब्ध होने के कारण यात्रियों को छोटी-छोटी जानकारियों के लिए रेलवे पूछताछ काउंटर पर जाने की आवश्यकता काफी कम हुई है।
ट्रेन की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होने का सीधा असर रेलवे स्टेशनों के पूछताछ काउंटरों पर भी पड़ा है। यात्रियों को ट्रेन के आगमन,प्रस्थान और कार्यक्रम की जानकारी वेबसाइट,मोबाइल ऐप या 139 के माध्यम से मिल जाती है। इससे पूछताछ काउंटरों पर लगने वाली कतारों और प्रतीक्षा समय को कम करने में मदद मिली है। विशेष रूप से बड़े स्टेशनों पर जहाँ प्रतिदिन हजारों यात्री ट्रेन की जानकारी लेने के लिए पहुँचते हैं,वहाँ डिजिटल सेवाएँ यात्रियों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही हैं।
रेलवे की डिजिटल व्यवस्था में टिकट रद्द होने और रिफंड की प्रक्रिया को भी काफी हद तक स्वचालित किया गया है। ऑनलाइन ई-टिकटिंग प्रणाली के तहत यदि कोई ट्रेन रद्द होती है तो निर्धारित प्रस्थान समय के तुरंत बाद स्वचालित रूप से रिफंड की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। लागू नियमों के अनुसार रिफंड की राशि यात्री के बैंक खाते में जमा कर दी जाती है। इससे यात्रियों को ट्रेन रद्द होने की स्थिति में अलग से रिफंड के लिए कार्यालय या टिकट काउंटर पर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
हालांकि स्वचालित रिफंड की सुविधा फिलहाल केवल ऑनलाइन बुक किए गए ई-टिकटों के लिए उपलब्ध है। काउंटर से खरीदे गए टिकटों के मामले में यह सुविधा लागू नहीं है। यदि काउंटर टिकट पर बुक की गई ट्रेन रद्द हो जाती है,तो यात्री को रिफंड प्राप्त करने के लिए निकटतम यात्री आरक्षण प्रणाली काउंटर पर जाना पड़ता है। इस तरह रेलवे की डिजिटल व्यवस्था में ई-टिकट यात्रियों के लिए रिफंड प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाया गया है,जबकि काउंटर टिकट यात्रियों के लिए अभी भी भौतिक प्रक्रिया जारी है।
रेलवन ऐप को रेलवे की डिजिटल सेवाओं के एकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि इसमें टिकट बुकिंग के साथ यात्रा योजना और ट्रेन संबंधी जानकारी जैसी सुविधाएँ भी एक ही जगह उपलब्ध हैं। यात्री अपनी यात्रा से पहले ट्रेन की जानकारी हासिल कर सकते हैं,आरक्षित या अनारक्षित टिकट बुक कर सकते हैं और यात्रा के दौरान आवश्यक सहायता भी प्राप्त कर सकते हैं। इससे रेलवे की कई अलग-अलग सेवाओं के बीच यात्रियों को बार-बार जाने की परेशानी कम होती है।
रेलवे का डिजिटल परिवर्तन केवल टिकट बुकिंग तक सीमित नहीं है। ट्रेन की वास्तविक स्थिति,पीएनआर,प्लेटफॉर्म टिकट,यात्रा योजना,यात्री सहायता और रिफंड जैसी सेवाओं को डिजिटल माध्यम से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे रेलवे की सेवाओं में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ाने में मदद मिल सकती है। साथ ही डिजिटल रिकॉर्ड और स्वचालित प्रक्रियाओं के कारण यात्रियों को सेवाओं का इस्तेमाल करने में कम समय लग सकता है।
ऑनलाइन आरक्षित टिकट बुकिंग का आँकड़ा 49 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 89 प्रतिशत होना इस बदलाव की व्यापकता को स्पष्ट करता है। अनारक्षित टिकटों की डिजिटल हिस्सेदारी का लगभग 39 प्रतिशत तक पहुँचना भी यह दिखाता है कि डिजिटल टिकटिंग अब केवल लंबी दूरी की आरक्षित यात्रा तक सीमित नहीं रह गई है। रेलवे की कोशिश है कि अधिक से अधिक यात्री मोबाइल और ऑनलाइन माध्यमों से सेवाओं का लाभ उठाएँ, जिससे स्टेशनों पर भीड़ और काउंटरों पर दबाव कम हो।
कुल मिलाकर,रेलवन ऐप, राष्ट्रीय रेल पूछताछ प्रणाली और ऑनलाइन ई-टिकटिंग जैसी सेवाएं भारतीय रेलवे को अधिक डिजिटल और यात्री-केंद्रित बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रही हैं। एक तरफ रेलवन के जरिए कई सेवाओं को एक मंच पर लाने की कोशिश की गई है,वहीं राष्ट्रीय रेल पूछताछ प्रणाली यात्रियों को लगभग वास्तविक समय में ट्रेन संबंधी जानकारी उपलब्ध करा रही है। आरक्षित टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग में हुई भारी वृद्धि और अनारक्षित टिकटों के डिजिटल इस्तेमाल में बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि भारतीय रेल की यात्रा व्यवस्था तेजी से डिजिटल होती जा रही है। आने वाले समय में इन सेवाओं के विस्तार से यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग,ट्रेन की जानकारी और यात्रा से जुड़ी अन्य प्रक्रियाएँ और अधिक आसान होने की उम्मीद है।
