वॉशिंगटन,13 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के नए ‘पब्लिक चार्ज’ नियम के खिलाफ एक नया विधेयक पेश किया है। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य ऐसे संघीय धन के इस्तेमाल पर रोक लगाना है, जिसका उपयोग उन नियमों को लागू करने,संचालित करने या उनका प्रवर्तन करने में किया जा सकता है,जिनके तहत कुछ सरकारी सहायता लेने वाले प्रवासियों के लिए अमेरिका का स्थायी निवासी यानी ग्रीन कार्ड हासिल करना मुश्किल हो सकता है। सांसदों का कहना है कि नए नियम से प्रवासियों के बीच अनिश्चितता बढ़ेगी और कई पात्र लोग जरूरी सरकारी सहायता लेने से भी बच सकते हैं।
‘प्रोटेक्ट अमेरिकन वैल्यूज एक्ट’ नाम से यह विधेयक बुधवार को सीनेटर माइकल बेनेट, मैजी हिरोनो और कांग्रेस सदस्य जूडी चू ने पेश किया। इस विधेयक को 17 अन्य सीनेटरों और प्रतिनिधि सभा के कई सदस्यों का भी समर्थन हासिल है। भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल और राजा कृष्णमूर्ति भी इसके सह-प्रायोजकों में शामिल हैं। प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य संघीय सरकार के धन को ट्रंप प्रशासन के नए ‘पब्लिक चार्ज’ नियम को लागू करने से रोकना है।
ट्रंप प्रशासन का नया ‘पब्लिक चार्ज’ नियम 18 सितंबर से प्रभावी होने वाला है। अंतिम रूप दिए गए इस नियम के तहत वर्ष 2022 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन की ओर से लागू की गई नीति को पलट दिया गया है। बाइडेन प्रशासन की नीति में कहा गया था कि पूरक पोषण सहायता कार्यक्रम यानी स्नैप के तहत मिलने वाली खाद्य सहायता, मेडिकेड और आवास सहायता जैसी कई गैर-नकद सरकारी सुविधाओं को ‘पब्लिक चार्ज’ संबंधी फैसलों में शामिल नहीं किया जाएगा। अब ट्रंप प्रशासन के नए नियम ने इस व्यवस्था को बदल दिया है,जिसे लेकर डेमोक्रेटिक सांसदों ने गंभीर आपत्ति जताई है।
अमेरिकी आव्रजन व्यवस्था में ‘पब्लिक चार्ज’ एक ऐसा मूल्यांकन है,जिसके जरिए आव्रजन अधिकारी यह तय करते हैं कि कोई व्यक्ति भविष्य में सरकारी सहायता पर मुख्य रूप से निर्भर हो सकता है या नहीं। यदि अधिकारियों को लगता है कि आवेदक भविष्य में सरकार पर अत्यधिक आर्थिक रूप से निर्भर हो सकता है,तो कुछ परिस्थितियों में उसके अमेरिका में प्रवेश या स्थायी निवासी का दर्जा हासिल करने के आवेदन पर प्रतिकूल निर्णय लिया जा सकता है। यही वजह है कि सरकारी सहायता और ग्रीन कार्ड की पात्रता के बीच संभावित संबंध प्रवासी समुदायों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
डेमोक्रेटिक सांसदों का आरोप है कि नए नियम में यह पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन-किन सरकारी लाभों को ‘पब्लिक चार्ज’ परीक्षण के दौरान ध्यान में रखा जाएगा। उनके मुताबिक इस अस्पष्टता के कारण आव्रजन अधिकारियों को ग्रीन कार्ड आवेदनों की समीक्षा करते समय काफी व्यापक विवेकाधिकार मिल सकता है। सांसदों का कहना है कि स्पष्ट और निश्चित कानूनी मानकों के अभाव में अलग-अलग मामलों में अधिकारियों का आकलन अलग हो सकता है,जिससे आवेदकों के बीच अनिश्चितता बढ़ेगी।
सीनेटर माइकल बेनेट ने नए नियम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सीमा सुरक्षा या सरकारी खर्च को बेहतर बनाने के बारे में नहीं है। उनके अनुसार इसका उद्देश्य उन प्रवासियों को दंडित करना है जो अपने और अपने परिवार के लिए बेहतर जीवन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘प्रोटेक्ट अमेरिकन वैल्यूज एक्ट’ यह स्पष्ट संदेश देता है कि अमेरिका अपने समुदायों के साथ खड़ा रहेगा और प्रशासन की ऐसी नीतियों का विरोध करेगा,जिन्हें वह अमानवीय मानते हैं।
कांग्रेस सदस्य जूडी चू ने भी नए नियम की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन की मौजूदा नीति उनके पहले कार्यकाल में लागू किए गए ‘पब्लिक चार्ज’ नियम से भी अधिक व्यापक है। उनके मुताबिक पिछली व्यवस्था की तुलना में अंतिम रूप दिए गए नए नियम में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन सरकारी लाभों को ‘पब्लिक चार्ज’ परीक्षण में गिना जाएगा। जूडी चू का आरोप है कि इससे ट्रंप प्रशासन के आव्रजन अधिकारियों को स्पष्ट कानूनी मानकों के बजाय अपने आकलन के आधार पर ग्रीन कार्ड आवेदन पर निर्णय लेने की अधिक शक्ति मिल सकती है।
डेमोक्रेटिक सांसदों ने चेतावनी दी है कि नियम को लेकर बनी यह अनिश्चितता केवल ग्रीन कार्ड आवेदकों तक सीमित नहीं रह सकती। उनका कहना है कि कई प्रवासी परिवार आवश्यक सरकारी सहायता लेने से भी डर सकते हैं,क्योंकि उन्हें आशंका हो सकती है कि भविष्य में इन लाभों का इस्तेमाल उनके आव्रजन आवेदन के खिलाफ किया जा सकता है। इससे ऐसे परिवारों पर आर्थिक और सामाजिक दबाव बढ़ सकता है,जो पहले से ही सीमित संसाधनों के साथ जीवन यापन कर रहे हैं।
सांसदों के अनुसार,इस नीति का प्रभाव उन परिवारों पर भी पड़ सकता है जिनमें अलग-अलग आव्रजन स्थिति वाले सदस्य रहते हैं। ऐसे परिवारों में कुछ सदस्य अमेरिकी नागरिक हो सकते हैं,जबकि दूसरे सदस्य कानूनी स्थायी निवासी या अन्य आव्रजन स्थिति में हो सकते हैं। यदि परिवार का कोई सदस्य सरकारी सहायता लेने से केवल इस डर के कारण बचता है कि इससे परिवार के किसी अन्य सदस्य के आव्रजन मामले पर असर पड़ सकता है,तो इसका व्यापक सामाजिक प्रभाव हो सकता है।
‘प्रोटेक्ट अमेरिकन वैल्यूज एक्ट’ के समर्थकों का कहना है कि संघीय धन का इस्तेमाल ऐसे नियम को लागू करने के लिए नहीं होना चाहिए,जिसे वे अस्पष्ट और प्रवासियों के लिए नुकसानदेह मानते हैं। प्रस्तावित कानून के तहत सरकार को उस नियम के कार्यान्वयन, संचालन या प्रवर्तन के लिए संघीय संसाधनों का इस्तेमाल करने से रोका जाएगा। हालाँकि,विधेयक का आगे बढ़ना अमेरिकी कांग्रेस में राजनीतिक समर्थन और बहस पर निर्भर करेगा।
‘पब्लिक चार्ज’ से जुड़े प्रावधान अमेरिकी आव्रजन कानून में नए नहीं हैं। लंबे समय से अमेरिकी कानून में यह प्रावधान मौजूद रहा है कि यदि कोई आव्रजन अधिकारी किसी व्यक्ति के भविष्य में मुख्य रूप से सरकारी सहायता पर निर्भर होने की आशंका जताता है, तो कुछ मामलों में उसके आव्रजन आवेदन पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालाँकि,अलग-अलग राष्ट्रपतियों और प्रशासन के दौरान इस प्रावधान की व्याख्या और इसका दायरा बदलता रहा है।
खास तौर पर स्वास्थ्य,पोषण और आवास जैसी गैर-नकद सरकारी सुविधाओं को लेकर अमेरिकी प्रशासन के बीच मतभेद रहे हैं। सवाल यह रहा है कि क्या इन सुविधाओं को किसी व्यक्ति की आर्थिक आत्मनिर्भरता का आकलन करते समय शामिल किया जाना चाहिए। यही मुद्दा अब एक बार फिर अमेरिकी आव्रजन नीति के केंद्र में आ गया है।
डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में ‘पब्लिक चार्ज’ नीति का दायरा बढ़ाने की कोशिश की गई थी। उस समय प्रशासन ने इस मूल्यांकन के दायरे को व्यापक बनाने वाली व्यवस्था लागू की थी,जिसके तहत कुछ सरकारी लाभों के इस्तेमाल को आव्रजन निर्णयों में अधिक महत्व दिया जा सकता था। इस नीति को लेकर प्रवासी अधिकार संगठनों और डेमोक्रेटिक नेताओं ने काफी विरोध किया था।
इसके बाद वर्ष 2022 में जो बाइडेन प्रशासन ने इस नीति को सीमित किया। बाइडेन प्रशासन की व्यवस्था के तहत कई गैर-नकद सरकारी लाभों को ‘पब्लिक चार्ज’ मूल्यांकन से बाहर रखा गया। इनमें स्नैप के तहत मिलने वाली खाद्य सहायता,मेडिकेड और आवास सहायता जैसी सुविधाएँ शामिल थीं। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना था कि इन लाभों का इस्तेमाल करने मात्र से किसी प्रवासी को भविष्य में सरकारी सहायता पर निर्भर माना नहीं जाएगा।
अब ट्रंप प्रशासन द्वारा नए नियम को अंतिम रूप दिए जाने के बाद यह मुद्दा फिर अमेरिकी राजनीतिक बहस के केंद्र में है। नए नियम को लेकर डेमोक्रेटिक सांसदों और प्रवासी अधिकार समर्थकों की चिंता मुख्य रूप से इस बात पर है कि सरकारी सहायता लेने वाले लोगों को अपने आव्रजन भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है। उनका कहना है कि नियम की अस्पष्टता के कारण लोग उन सुविधाओं का इस्तेमाल भी छोड़ सकते हैं,जिनके वे कानूनी रूप से पात्र हैं।
दूसरी ओर,ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीतियों का व्यापक उद्देश्य सरकारी संसाधनों पर निर्भरता को सीमित करना और आव्रजन प्रणाली में आर्थिक आत्मनिर्भरता को अधिक महत्व देना रहा है। ‘पब्लिक चार्ज’ व्यवस्था को इसी व्यापक नीति के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। प्रशासन की ओर से इस नियम को लेकर यह तर्क दिया जाता रहा है कि अमेरिका में स्थायी निवास हासिल करने वाले लोगों की आर्थिक आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण है।
हालांकि डेमोक्रेटिक सांसदों का कहना है कि सरकारी सहायता लेना और किसी व्यक्ति का स्थायी रूप से सरकार पर निर्भर होना एक ही बात नहीं है। उनके अनुसार,कई प्रवासी परिवार सीमित अवधि के लिए स्वास्थ्य,भोजन या आवास संबंधी सहायता का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे भविष्य में अपनी आजीविका चलाने के लिए पूरी तरह सरकार पर निर्भर रहेंगे। इसी वजह से सांसद नियम के स्पष्ट कानूनी मानकों की मांग कर रहे हैं।
भारतीय मूल के सांसदों का इस विधेयक में शामिल होना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रमिला जयपाल और राजा कृष्णमूर्ति लंबे समय से आव्रजन से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। उनके सह-प्रायोजक बनने से यह संकेत मिलता है कि प्रस्तावित कानून को अमेरिकी प्रवासी समुदायों,विशेषकर उन परिवारों से जुड़े व्यापक राजनीतिक समर्थन की उम्मीद है जो सरकारी स्वास्थ्य,पोषण या आवास सहायता का इस्तेमाल करते हैं।
अब इस विधेयक के सामने सबसे बड़ी चुनौती अमेरिकी कांग्रेस में पर्याप्त समर्थन जुटाने की होगी। डेमोक्रेटिक सांसद इसे प्रवासी परिवारों के अधिकारों और सरकारी सहायता तक उनकी पहुँच से जोड़ रहे हैं,जबकि ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीति के समर्थक इसे आर्थिक आत्मनिर्भरता और आव्रजन व्यवस्था में सख्ती के व्यापक प्रयास के तौर पर देखते हैं।
नए ‘पब्लिक चार्ज’ नियम के 18 सितंबर से लागू होने की तैयारी के बीच अमेरिकी आव्रजन नीति को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। एक तरफ प्रशासन नियम को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है,वहीं दूसरी ओर डेमोक्रेटिक सांसद संघीय धन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए विधेयक लेकर आए हैं। आने वाले समय में कांग्रेस में इस प्रस्ताव पर होने वाली बहस यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है कि अमेरिकी आव्रजन नीति में सरकारी सहायता और ग्रीन कार्ड की पात्रता के बीच संबंध किस दिशा में आगे बढ़ता है।
