ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (तस्वीर क्रेडिट@SavalRohit)

ईरान में इंटरनेट पर शिकंजा कसने की तैयारी, स्टारलिंक के खिलाफ कार्रवाई तेज; टर्मिनल जब्त करने से लेकर सिग्नल बाधित करने तक की रणनीति

नई दिल्ली,15 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिका और इजरायल के साथ जारी संघर्ष के बीच ईरान ने देश में इंटरनेट पर सरकारी नियंत्रण मजबूत करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। सरकार की नजर विशेष रूप से एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक पर है, जिसे ईरानी अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित खतरा मानते हैं। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय इंटरनेट तक आम नागरिकों की पहुँच पर और सख्ती किए जाने के संकेत भी मिले हैं। ईरान की सरकार का तर्क है कि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों में डिजिटल नेटवर्क और संवेदनशील सूचनाओं की रक्षा करना जरूरी है। हालाँकि,आलोचकों का कहना है कि इंटरनेट पर बढ़ती पाबंदियां नागरिकों की स्वतंत्र सूचना तक पहुँच को सीमित कर सकती हैं और देश के भीतर होने वाली घटनाओं को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय तक पहुँचाना कठिन बना सकती हैं।

ईरान में इंटरनेट नियंत्रण का मुद्दा लंबे समय से विवाद का विषय रहा है,लेकिन मौजूदा संघर्ष और सुरक्षा संबंधी चिंताओं ने इसे और संवेदनशील बना दिया है। इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध,सैटेलाइट कनेक्टिविटी को रोकने के प्रयास और स्टारलिंक उपकरणों के खिलाफ कार्रवाई की खबरें इस बात का संकेत हैं कि तेहरान डिजिटल संचार को राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक नजरिये से देख रहा है। दूसरी ओर,आम नागरिकों,कारोबारियों और स्वतंत्र सूचना के पक्ष में आवाज उठाने वालों के लिए यह स्थिति नई चुनौतियाँ पैदा कर सकती है।

ईरान में स्टारलिंक के इस्तेमाल को गैरकानूनी घोषित किया गया है। इस सेवा से जुड़े टर्मिनल रखने,उनका उपयोग करने या उनकी आपूर्ति करने पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। आरोप की गंभीरता के आधार पर दंड भी कठोर हो सकता है। ऐसे में देश में इस तकनीक का इस्तेमाल करने वाले लोगों के सामने कानूनी जोखिम बने हुए हैं।

स्टारलिंक पारंपरिक इंटरनेट व्यवस्था से अलग तरीके से काम करता है। सामान्य इंटरनेट कनेक्शन के लिए स्थानीय दूरसंचार नेटवर्क, केबल या मोबाइल टावरों की जरूरत पड़ती है,जबकि स्टारलिंक कम ऊँचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले उपग्रहों के नेटवर्क के माध्यम से इंटरनेट उपलब्ध कराता है। इसके लिए उपयोगकर्ताओं को विशेष टर्मिनल की जरूरत होती है,जो उपग्रहों से संपर्क स्थापित कर इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध कराता है।

इसी तकनीक के कारण स्टारलिंक उन क्षेत्रों में भी उपयोगी हो सकता है,जहाँ पारंपरिक दूरसंचार नेटवर्क कमजोर है या सरकारी प्रतिबंधों के कारण इंटरनेट उपलब्ध नहीं है। ईरान जैसे देश में,जहाँ इंटरनेट पर नियंत्रण की कोशिशें होती रही हैं,यह सेवा स्वतंत्र संचार का एक वैकल्पिक माध्यम बन सकती है। हालाँकि,इस सुविधा का इस्तेमाल करने वालों को स्थानीय कानूनों और संभावित कार्रवाई का जोखिम उठाना पड़ सकता है।

ईरानी अधिकारियों का मानना है कि विदेशी सैटेलाइट नेटवर्क के माध्यम से देश के भीतर संचार होने से सुरक्षा एजेंसियों के लिए सूचनाओं के प्रवाह पर निगरानी रखना कठिन हो सकता है। सरकार को यह आशंका भी है कि इस तकनीक का इस्तेमाल संवेदनशील जानकारियाँ जुटाने या सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों में किया जा सकता है। वहीं,आलोचकों के अनुसार,राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर इंटरनेट पर व्यापक प्रतिबंध लगाने से सामान्य नागरिकों की जरूरतें भी प्रभावित होती हैं।

ईरान की करीब नौ करोड़ आबादी हाल के समय में इंटरनेट से जुड़ी समस्याओं का सामना करती रही है। जनवरी 2026 में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान देशभर में इंटरनेट सेवाएं बाधित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष शुरू होने पर भी इंटरनेट तक पहुँच पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए।

ईरानी सरकार इन कदमों को साइबर सुरक्षा और संवेदनशील सूचनाओं की रक्षा से जोड़ती है। उसका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में सरकारी डेटाबेस,महत्वपूर्ण डिजिटल प्रणालियों और राष्ट्रीय संपत्तियों को संभावित साइबर हमलों से बचाना जरूरी है। युद्ध या तनाव के दौरान डिजिटल नेटवर्क पर हमलों की आशंका बढ़ सकती है,इसलिए सरकारें सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाती हैं।

हालाँकि,इंटरनेट सेवाओं पर लगातार प्रतिबंधों का असर आम जीवन पर भी पड़ता है। डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन कारोबार, शिक्षा, परिवारों के बीच संपर्क और सूचनाओं के आदान-प्रदान जैसी गतिविधियाँ इंटरनेट पर निर्भर करती हैं। कनेक्टिविटी बाधित होने से कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है,जबकि नागरिकों के लिए समाचारों और दूसरी जरूरी जानकारियों तक पहुँचना मुश्किल हो सकता है।

इंटरनेट बंद होने की स्थिति में देश के भीतर होने वाली घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। जब आम नागरिक वीडियो,तस्वीरें और प्रत्यक्ष जानकारी साझा नहीं कर पाते,तो बाहरी दुनिया के लिए घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति समझना कठिन हो सकता है। इसी वजह से ईरान में इंटरनेट प्रतिबंधों को लेकर सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन का सवाल उठ रहा है।

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय साइबरस्पेस परिषद के सचिव मोहम्मद अमीन अघामिरी ने स्टारलिंक को दुश्मन देशों के लिए एक रणनीतिक उपकरण बताया है। उनके मुताबिक, इस तकनीक का इस्तेमाल सूचनाएँ जुटाने,निगरानी करने और सैन्य गतिविधियों के समन्वय के लिए किया जा सकता है। उन्होंने यह दावा भी किया है कि ईरान के पास ऐसे सिस्टम मौजूद हैं,जिनकी मदद से स्टारलिंक टर्मिनलों को निष्क्रिय किया जा सकता है।

हालाँकि,अधिकारियों ने इन प्रणालियों की तकनीकी प्रकृति या उन्हें इस्तेमाल करने के तरीके के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ईरान स्टारलिंक के खिलाफ किन उपायों को किस स्तर पर लागू कर रहा है और उनका प्रभाव कितना व्यापक है।

तेहरान की चिंता इस बात से भी जुड़ी है कि उपग्रह आधारित इंटरनेट स्थानीय संचार नेटवर्क पर निर्भर नहीं होता। ऐसे में पारंपरिक इंटरनेट सेवाओं को बंद करने या सीमित करने के बावजूद कुछ उपयोगकर्ताओं के लिए कनेक्टिविटी बनाए रखना संभव हो सकता है। सरकार के दृष्टिकोण से यह निगरानी और नियंत्रण के लिए चुनौती बन सकता है,जबकि उपयोगकर्ताओं के लिए यही तकनीक वैकल्पिक संचार का माध्यम उपलब्ध कराती है।

तेहरान के एक दूरसंचार विशेषज्ञ ने अल जजीरा को बताया कि ईरानी अधिकारी स्टारलिंक की सेवाओं को बाधित करने के लिए कई तरह के उपाय अपना रहे हैं। इनमें सिग्नल जाम करने वाले उपकरणों का इस्तेमाल,टर्मिनलों की शुरुआती सेटिंग में रुकावट डालना और कनेक्शन से जुड़े तकनीकी संकेतों की पहचान करने की कोशिशें शामिल हैं। इन दावों के अनुसार,अधिकारियों की रणनीति केवल इंटरनेट सिग्नल को बाधित करने तक सीमित नहीं है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि गश्ती दलों और ड्रोन की सहायता से स्टारलिंक टर्मिनलों का पता लगाने,उन्हें जब्त करने और उनकी बिक्री से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यदि ऐसे कदम व्यापक स्तर पर लागू होते हैं,तो देश में इन उपकरणों की उपलब्धता और उनके इस्तेमाल पर असर पड़ सकता है।

सिग्नल बाधित करने के प्रयासों के अलावा उपकरणों की पहचान और जब्ती पर जोर देना यह दर्शाता है कि ईरान इस तकनीक की आपूर्ति व्यवस्था को भी नियंत्रित करना चाहता है। टर्मिनलों की तस्करी रोकना,उन्हें बेचने वाले नेटवर्क का पता लगाना और उपयोगकर्ताओं तक उनकी पहुँच सीमित करना इस रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

ईरान पहले भी इस तकनीक को अपने सहयोगी देशों के साथ साझा करने की संभावना जता चुका है। इससे संकेत मिलता है कि तेहरान स्टारलिंक को केवल घरेलू इंटरनेट सेवा नहीं,बल्कि व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय मानता है। हालाँकि,इस संबंध में वास्तविक सहयोग या तकनीकी जानकारी साझा किए जाने की सीमा स्पष्ट नहीं है।

ईरान में स्टारलिंक की अहमियत बढ़ने की एक प्रमुख वजह यह है कि यह स्थानीय दूरसंचार ढाँचे पर पूरी तरह निर्भर हुए बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध करा सकता है। सरकारी प्रतिबंधों के बावजूद,यदि किसी उपयोगकर्ता के पास सक्रिय टर्मिनल और जरूरी उपकरण उपलब्ध हों,तो उसके लिए इंटरनेट से जुड़ना संभव हो सकता है। इसके माध्यम से तस्वीरें,वीडियो और अन्य सूचनाएँ देश के बाहर भेजी जा सकती हैं।

वर्ष 2022 से ईरान में स्टारलिंक टर्मिनलों की तस्करी के जरिए पहुँचने की खबरें सामने आती रही हैं। माना जाता है कि देश में हजारों उपकरण लाए गए हैं,हालाँकि इनकी वास्तविक संख्या की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। प्रतिबंधों के कारण इन उपकरणों की आपूर्ति और उपयोग के बारे में सटीक जानकारी जुटाना भी मुश्किल है।

इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने जून में दावा किया था कि 2021-22 के दौरान उनके कार्यकाल में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए हजारों स्टारलिंक उपकरण गुप्त रूप से ईरान भेजे गए थे। यह उनका दावा है और उपलब्ध जानकारी के आधार पर भेजे गए उपकरणों की कुल संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

इन घटनाक्रमों से स्पष्ट होता है कि ईरान में इंटरनेट नियंत्रण को लेकर विवाद केवल तकनीक तक सीमित नहीं है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा,राजनीतिक असहमति, नागरिकों की सूचना तक पहुँच और वैश्विक डिजिटल संपर्क से जुड़े व्यापक सवालों को भी सामने लाता है।

ईरान की सरकार स्टारलिंक पर कार्रवाई को सुरक्षा जरूरतों से जोड़ रही है,जबकि आलोचकों को आशंका है कि इससे नागरिकों के लिए स्वतंत्र रूप से जानकारी हासिल करना और साझा करना और कठिन हो जाएगा। पारंपरिक इंटरनेट पर पाबंदियाँ और वैकल्पिक नेटवर्क को रोकने की कोशिशें एक साथ चलने से लोगों के पास संचार के विकल्प सीमित हो सकते हैं।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान स्टारलिंक टर्मिनलों के खिलाफ अपनी कार्रवाई को किस हद तक बढ़ाता है और इंटरनेट नियंत्रण से जुड़े नियमों को कितना सख्त करता है। साथ ही,यह भी अहम होगा कि सुरक्षा उपायों के बीच आम नागरिकों,कारोबार और आवश्यक डिजिटल सेवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को किस तरह संभाला जाता है।

मौजूदा हालात बताते हैं कि ईरान में इंटरनेट अब केवल संचार या तकनीकी सुविधा का विषय नहीं रह गया है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा,राजनीतिक नियंत्रण और नागरिकों के सूचना संबंधी अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के बीच स्टारलिंक के खिलाफ बढ़ती कार्रवाई इसी व्यापक टकराव का हिस्सा है।