अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

ईरान पर ट्रंप का अगला कदम क्या होगा? बोले- जल्द पता चलेगा, हालात ज्यादा समय नहीं चलेंगे

वॉशिंगटन,3 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपने प्रशासन के अगले कदम का खुलासा करने से इनकार कर दिया है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की अगली कार्रवाई क्या होगी,तो उन्होंने कहा कि यदि वह इसकी जानकारी अभी दे देंगे तो यह बड़ी खबर बन जाएगी। ट्रंप ने संकेत दिया कि आने वाले समय में इस बारे में जानकारी सामने आ सकती है। उन्होंने साथ ही दावा किया कि ईरान से जुड़ा मौजूदा संघर्ष ज्यादा समय तक नहीं चलेगा और हालात जल्द बदल सकते हैं।

पत्रकारों के सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि उनके अगले कदम के बारे में जल्द पता चल जाएगा। उन्होंने ईरान की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि वहां हालात अच्छे नहीं हैं। हालाँकि,अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका प्रशासन ईरान को लेकर सैन्य,कूटनीतिक या किसी अन्य तरह की कार्रवाई पर विचार कर रहा है। उन्होंने संभावित कार्रवाई के लिए कोई निश्चित समयसीमा भी नहीं बताई। पत्रकारों से बातचीत के बाद ट्रंप मरीन वन हेलीकॉप्टर से रवाना हो गए।

ईरान को लेकर ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है,जब दोनों देशों के बीच तनाव और क्षेत्रीय घटनाक्रम को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बनी हुई है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से संभावित अगले कदम को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन ट्रंप ने अपने बयान में किसी ठोस योजना या फैसले की जानकारी सार्वजनिक नहीं की। उन्होंने केवल इतना संकेत दिया कि घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।

इसी बातचीत के दौरान ट्रंप ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने ईरान से जुड़े संघर्ष को ऊर्जा बाजार की मौजूदा स्थिति से जोड़ते हुए कहा कि जैसे ही ईरान का मामला खत्म होगा, तेल की कीमतों में गिरावट आने की संभावना है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका के पास जल्द ही पर्याप्त तेल उपलब्ध होगा और इसके बाद ऊर्जा की कीमतें पहले के स्तर पर लौट सकती हैं।

ट्रंप ने कहा कि ईरान से जुड़ी स्थिति ज्यादा समय तक नहीं चलेगी। उनके अनुसार,स्थिति खत्म होने के बाद तेल की कीमतों में कमी आएगी और संभव है कि कीमतें उनके कार्यकाल की शुरुआत में मौजूद स्तर से भी नीचे चली जाएँ। हालाँकि,उन्होंने यह नहीं बताया कि मौजूदा स्थिति के समाप्त होने का उनका अनुमान किन परिस्थितियों या घटनाक्रम पर आधारित है।

ट्रंप की टिप्पणियों में ऊर्जा आपूर्ति का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा,क्योंकि पत्रकार उनसे अमेरिका में डीजल की उपलब्धता और देश से डीजल निर्यात पर संभावित रोक को लेकर सवाल कर रहे थे। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने यूरोपीय देशों से दुनिया के बाजार में अधिक डीजल उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। उनके मुताबिक,यूरोप के पास पर्याप्त डीजल मौजूद है और वह वैश्विक बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति कर सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यूरोप बाजार में डीजल की उपलब्धता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देने की स्थिति में है और अमेरिका भी अपनी भूमिका निभाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका डीजल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है। ट्रंप के मुताबिक,प्रशासन वही कदम उठाएगा जो ऊर्जा आपूर्ति और बाजार की स्थिति को देखते हुए जरूरी होगा।

जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका से डीजल निर्यात पर रोक लगाने का विकल्प अब पूरी तरह समाप्त हो गया है, तो ट्रंप ने कहा कि ऐसा प्रतिबंध कभी गंभीर योजना का हिस्सा नहीं था। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उनके प्रशासन ने कभी डीजल निर्यात पर रोक लगाने की योजना बनाई थी। इसके बजाय उन्होंने यूरोपीय देशों की ओर से अतिरिक्त डीजल उपलब्ध कराने के कदम को सकारात्मक बताया।

ट्रंप ने कहा कि यूरोपीय देशों के पास पर्याप्त डीजल भंडार है और वे बाजार में अतिरिक्त ईंधन उपलब्ध कराने की स्थिति में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप दुनिया के कई अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक डीजल का इस्तेमाल करता है। इसके बावजूद वहाँ उपलब्ध भंडार का एक हिस्सा वैश्विक बाजार में भेजा जा सकता है। ट्रंप ने यूरोप की इस पहल को अपनी अपील पर मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के रूप में पेश किया।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिका और यूरोप के संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच अच्छे संबंध हैं और यूरोपीय देशों ने बाजार में अधिक डीजल उपलब्ध कराने के उनके अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप के मुताबिक,यूरोपीय देशों के पास पर्याप्त डीजल होने के कारण उन्होंने बाजार में इसकी अतिरिक्त आपूर्ति करने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने यूरोपीय देशों से कहा था कि अगर वे डीजल को बाजार में उपलब्ध कराते हैं तो इससे स्थिति को सँभालने में मदद मिलेगी।

ईंधन की आपूर्ति को लेकर ट्रंप का रुख ऐसे समय सामने आया है,जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर मध्य पूर्व के घटनाक्रम का असर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल के साथ-साथ डीजल जैसे परिष्कृत ईंधन की उपलब्धता भी कई देशों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। डीजल परिवहन, कृषि, निर्माण और उद्योगों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। ऐसे में इसकी कीमत और उपलब्धता में होने वाला बदलाव व्यापक आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।

ईरान से जुड़ा घटनाक्रम वैश्विक तेल बाजार के लिए विशेष महत्व रखता है,क्योंकि फारस की खाड़ी और उसके आसपास का क्षेत्र दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर तेल और ईंधन की आपूर्ति,समुद्री परिवहन तथा बीमा लागत पर असर पड़ सकता है। इसके विपरीत,तनाव कम होने और आपूर्ति सामान्य होने की स्थिति में बाजार पर दबाव घट सकता है।

ट्रंप ने अपने बयान में इसी संभावित बदलाव की ओर संकेत करते हुए कहा कि ईरान से जुड़ा मामला समाप्त होने के बाद तेल की कीमतों में कमी आ सकती है। हालाँकि, वास्तविक कीमतें केवल भू-राजनीतिक स्थिति पर निर्भर नहीं करतीं। वैश्विक माँग, उत्पादन, तेल भंडार, रिफाइनरी क्षमता, परिवहन व्यवस्था और प्रमुख उत्पादक देशों की नीतियां भी कीमतों को प्रभावित करती हैं।

फिलहाल ट्रंप ने ईरान को लेकर अमेरिका की अगली कार्रवाई के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। उनका कहना है कि आने वाले समय में इसकी जानकारी मिल जाएगी और मौजूदा संघर्ष ज्यादा लंबे समय तक नहीं चलेगा। साथ ही,उन्होंने ऊर्जा बाजार के संदर्भ में यह संकेत दिया है कि ईरान से जुड़ी स्थिति सामान्य होने पर तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है।

इस बीच,डीजल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की संभावना को उन्होंने खारिज कर दिया है और यूरोप से अतिरिक्त डीजल बाजार में उपलब्ध कराने की अपील दोहराई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि ईरान को लेकर अमेरिकी प्रशासन का अगला कदम क्या होता है और क्षेत्रीय घटनाक्रम का वैश्विक तेल तथा ईंधन बाजार पर आने वाले दिनों में क्या प्रभाव पड़ता है।