अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

ट्रंप का कहना है कि खतरे के कारण वे तुर्की में एयर फ़ोर्स वन से चुपचाप निकल गए थे

वाशिंगटन,13 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि हाल ही में तुर्की की यात्रा के दौरान उन्हें चुपके से ‘एयर फ़ोर्स वन’ से हटाकर दूसरे विमान में ले जाया गया था। अमेरिकी सीक्रेट सर्विस और सेना ने सुरक्षा खतरे के कारण उन्हें दूसरे विमान का इस्तेमाल करने की सलाह दी थी।

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपनी सुरक्षा टीम की सलाह मानी और तुर्की में नाटो समिट में शामिल होने के बाद चुपचाप राष्ट्रपति के विमान से बाहर निकल गए। खबरों के मुताबिक, यह ऑपरेशन यात्रा में शामिल प्रेस टीम के कई सदस्यों और ‘एयर फ़ोर्स वन’ में मौजूद अन्य कर्मचारियों को बताए बिना किया गया।

खबरों के अनुसार, ट्रंप को चुपके से एयरपोर्ट से दूसरे विमान में ले जाने के लिए कैटरिंग गाड़ी का इस्तेमाल किया गया। ‘एयर फ़ोर्स वन’ एयरपोर्ट पर ही रहा और एक तरह से ‘डिकॉय’ (धोखा देने वाली चीज़) का काम करता रहा,जबकि ट्रंप अमेरिकी सरकार के एक छोटे विमान से रवाना हो गए।

खबरों के मुताबिक,यह असामान्य सुरक्षा ऑपरेशन ईरान से संभावित खतरे की चिंताओं से जुड़ा था। ट्रंप पहले भी मान चुके हैं कि उन्हें खतरों का सामना करना पड़ता है और उन्होंने कहा है कि वे सीक्रेट सर्विस और सेना की सुरक्षा सलाह को गंभीरता से लेते हैं।

इस फैसले के बारे में बताते हुए ट्रंप ने कहा कि उनके सुरक्षा सलाहकार चाहते थे कि वे किसी दूसरे विमान से यात्रा करें और उन्होंने उनके निर्देशों का पालन किया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वैकल्पिक विमान को भी जोखिम का सामना करना पड़ सकता था, जिससे राष्ट्रपति की यात्रा से जुड़े सुरक्षा के मुश्किल हिसाब-किताब का पता चलता है।

खबरों के मुताबिक,यह घटना तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन में ट्रंप की भागीदारी के बाद हुई। गुप्त रूप से विमान बदलने और कैटरिंग वाहन के इस्तेमाल की खबरें सामने आने से पहले हफ्तों तक इस ऑपरेशन का विवरण गुप्त रखा गया था।

राष्ट्रपति की गतिविधियों को छिपाने के लिए अपनाए गए असाधारण उपायों के कारण इस घटना ने सबका ध्यान खींचा है। हालाँकि,अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने पहले भी सुरक्षा कारणों से गुप्त यात्रा व्यवस्थाएँ की हैं,लेकिन राष्ट्रपति के विमान जैसे दिखने वाले दूसरे विमान (डिकॉय) का इस्तेमाल और ऑपरेशन से जुड़ी गोपनीयता ने राष्ट्रपति की सुरक्षा और पारदर्शिता पर नई बहस छेड़ दी है।

व्हाइट हाउस और अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों से इस ऑपरेशन से जुड़े हालात,खासकर खतरे की प्रकृति और जानकारी को गुप्त रखने के कारणों के बारे में सवाल पूछे गए हैं। हालाँकि, ट्रंप ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि राष्ट्रपति की सुरक्षा टीमें उपलब्ध खुफिया जानकारी के आधार पर ऐसे फैसले लेती हैं।

यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है,जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है, जिससे ट्रंप की अंतर्राष्ट्रीय यात्रा के दौरान बरती गई असाधारण सुरक्षा सावधानियों का महत्व और बढ़ गया है।